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कोई अपना बार-बार दिल दुखाए, फिर भी चुप रहते हैं? समझिए ऐसा क्यों करते हैं आप

By Niharika PandeyEdited By: Harshita Saxena
Updated: Wed, 19 Aug 2026 09:00 AM (IST)

अक्सर लोग अपनों से बार-बार दिल दुखने के बाद भी चुप रहते हैं। इसके पीछे कई सारे कारण होते हैं, जैसे विवाद का डर और बदलाव की उम्मीद आदि। हालांकि, लोगों ...और पढ़ें

अपनों से बार-बार दुख मिलने पर भी क्यों सहते हैं आप (Picture Credit- AI Generated)

अपनों से बार-बार दुख मिलने पर भी क्यों सहते हैं आप (Picture Credit- AI Generated)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। कोई अपना या करीबी ही बार-बार हमारा दिल दुखाता है या नीचा दिखाने की कोशिश करता है, फिर भी हम किसी न किसी बहाने से खुद को समझाकर चुप हो जाते हैं। अगर आपके साथ भी लगातार ऐसा हो रहा है और आप यह सोच कर सह रहे हैं कि वो तो आपके अपने हैं तो सतर्क हो जाएं। इस आर्टिकल में हम ऐसे ही हर्ट करने वालों को थोड़ा और करीब से जानेंगे।

क्या आपके मन भी भी ऐसे ख्याल आते हैं?

  • शायद वह बहुत ही तनाव में था
  • उसका मकसद आपका दिल दुखाना नहीं था
  • उसकी जिंदगी में अभी काफी परेशानियां चल रही हैं

इन वजहों से हम हर्ट करने वालों को ही बचाते रहते हैं

  • विवाद से डर लगता है: यह जानते हुए कि आपके साथ सही नहीं हो रहा आप किसी बहस या विवाद से बचने के लिए सबकुछ चुपचाप सहते रहते हैं। अधिकांश लोगों को झगड़े के बारे में सोचकर ही तनाव या असहजता महसूस होने लगती है और उन्हें लगता है इससे रिश्ता बिगड़ सकता है।
  • खुद को सबसे पीछे रखते हैं: कई बार लगने लगता है कि हमें अच्छा पाने का हक नहीं और हम कमतर से भी काम चला लेते हैं। यदि कोई बार-बार आपका दिल दुखा रहा है या अपनी सीमा लांघ रहा है तो खुद से सवाल पूछना जरूरी हो जाता है।
  • ट्रॉमा से प्यार हो जाता है: कई लोग हर्ट करने के बाद कुछ समय का प्यार या अटेंशन भी जता देते हैं। इमोशंस की ऐसी खींचतान कंफ्यूजन पैदा करती है और यह ट्रॉमा बॉन्डिंग कहलाती है। इस वजह से हम अक्सर उन लोगों को भी छोड़ नहीं पाते, जो बार-बार हमें तकलीफ देते हैं।
  • बदलाव की उम्मीद रहती है: हमें लगता है, किसी ना किसी दिन यह इंसान बदलेगा। अगर छोटा-सा भी बदलाव नजर आता है तो उम्मीद और भी बढ़ जाती है। लेकिन सच तो यह है कि यह बदलाव स्थायी नहीं होता है और हम अपनी जिंदगी के कई साल गंवा देते हैं।
  • परवरिश का प्रभाव: हममें से ज्यादातर लोग इस सोच के साथ बड़े हुए हैं कि औरों को माफ कर देना, दिल बड़ा रखना और अपने से पहले दूसरों को आगे रखना सही होता है। हमें लगता है रिश्ते में शांति और मेलजोल बनाए रखना सिर्फ हमारा ही फर्ज है।
  • अकेले रह जाने का डर: यह सोचकर भी हम उन बातों को सहते रहते हैं, जो हमें ठीक नहीं लगते हैं या दुख देते हैं। जबकि किसी गलत रिश्ते में रहकर दुख झेलने से बेहतर है अकेले रहना।

ऐसे बचाएं खुद को

  • ऐसे लोगों की बातों को दिल से न लगाएं
  • विवाद से बचना चाहते हैं तो उस जगह से हट जाएं
  • जबरन बदलाव लाने की कोशिश न करें
  • अपने किसी भरोसेमंद व्यक्ति या थेरेपिस्ट से बात करें या मदद लें
  • औरों से पहले खुद को रखने को लेकर गिल्ट महसूस न करें

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