मानसून में आउटडोर गेम्स खेलने नहीं जा पा रहे बच्चे? स्क्रीन से दूर रखने के लिए कराएं ये इनडोर एक्टिविटीज
जब बाहर बरसती बूंदें बच्चों को घर में कर दें कैद, तब डिजिटल स्क्रीन की लत से निपटना पैरेंट्स के लिए बन जाती है बड़ी चुनौती। बच्चों का स्क्रीन टाइम कम ...और पढ़ें

बारिश के मौसम में बच्चों को मोबाइल से दूर रखने और फैमिली बॉन्डिंग बढ़ाने के बेहतरीन टिप्स (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
मीनाक्षी अग्रवाल, नई दिल्ली। बारिश की बूंदें मन को उल्लासित कर देती हैं। शुरुआत में तो बालकनी और खिड़की से बारिश का दृश्य प्रफुल्लित करता है पर मानसून रफ्तार पकड़ते ही बच्चों के आउटडोर गेम्स सीमित हो जाते हैं। दोस्तों के साथ साइकिल चलाना, पार्क में खेलना, बाहर घूमने के विकल्प कम हो जाते हैं।
स्वाभाविक रूप से बच्चे मोबाइल, टीवी, टैबलेट और लैपटाप की ओर आकर्षित होने लगते हैं और ये झुकाव हर उम्र के बच्चों में समान रूप से पाया जाता है। शुरुआत में स्क्रीन एक विकल्प होता है और जल्दी ही ये एकमात्र विकल्प में बदल जाता है। स्क्रीन के बढ़ते उपयोग से माता-पिता और बच्चों में नोंकझोंक होने लग जाती है जो सुरसा की तरह विकराल रूप धारण कर लेती है। ज्यादा बारिश में जलभराव की समस्या की वजह से स्कूल भी आनलाइन हो जाते हैं, यह प्रबंध भी स्क्रीन टाइम को और बढ़ा देता है।

(Image Source: AI-Generated)
अपनाएं लोकतांत्रिक तरीका
सवाल यह नहीं है कि बच्चों को स्क्रीन से कैसे दूर रखें, बल्कि असल में सवाल ये होना चाहिए कि 'स्क्रीन के अलावा बच्चों को कौन से बेहतर विकल्प दिए जाएं?' जब भी बच्चों से कुछ बदलाव की अपेक्षा हो तो उनके साथ मिलकर ही उस बदलाव को रूप दें। बच्चों को बार बार मोबाइल या टीवी के लिए टोकने से बेहतर होगा उनसे कहें कि चलो साथ में कुछ करते हैं। बारिश में जब हम घर में ही सीमित होते हैं तब हम वो गतिविधियां कर सकते हैं जो आम दिनों में समय और एकाग्रता की कमी के कारण नहीं कर पाते हैं। अच्छा समय गुजारने के लिए अगर पूरा परिवार एक साथ बैठकर गतिविधियों की लिस्ट बना ले या पर्चियों पर लिखकर एक मर्तबान में डालकर एक पर्ची निकालकर तय करे, तो यह आसान और लोकतांत्रिक तरीका होगा।
खूब चले किस्सेबाजी
कहानियां सुनने का शौक किसी उम्र का मोहताज नहीं। आप सहभागिता शुरू करने के लिए कहानियां सुना सकते हैं, मजेदार अनुभव, बचपन की शरारत, अपने समय के रेनी डे का किस्सा सुना सकते हैं और बच्चों से भी सुन सकते हैं। बच्चे अपनी पसंदीदा कहानी और मूवी स्टोरी सुनाने को उत्साहित रहते हैं। इन्हीं कहानियों में आप परिवार के किस्से सुना सकते हैं जो बच्चों के लिए दिलचस्प होंगे। पुराने एल्बम निकालकर तस्वीरों को वंशावली के अनुसार लगा सकते हैं, कुछ फोटोज को डीआइवाई फोटो फ्रेम में लगा सकते हैं, एल्बम को पेंटिंग/ स्टिकर्स से नया लुक दे सकते हैं।
रचनात्मकता को दें पंख
क्रिएटिव अभिव्यक्ति जैसे ओरिगैमी, पेपर क्राफ्ट, ड्राइंग, पेंटिंग,ग्रीटिंग कार्ड, पुराने गत्ते से टेंट/ रोबोट/ घर इत्यादि बनाना, बारिश की थीम पर आर्ट वर्क करना वगैरह एक रचनात्मक विकल्प हो सकता है। बच्चे जो भी बनाएं, उनके प्रयास की सराहना करें। उनसे उसके बारे में पूछें-बात करें। इससे बच्चे रचनात्मक रूप से सुदृढ़ होंगे। उम्र के अनुसार बोर्ड गेम जैसे लूडो, कैरम, शतरंज, मोनोपली, स्क्रैबल, ऊनो, पजल ट्विस्टर इत्यादि बच्चों में नियमों का पालन, रणनीति बनाना, इंतजार करना, टीम वर्क और हार स्वीकार करने जैसी स्किल विकसित करते हैं।
घर में बने टेंट हाउस
घर के अंदर ही चादर-तकियों से बढ़िया सा मानसून टेंट बना सकते हैं। इसके अलावा बच्चों के लिए टेंट भी बाजार में उपलब्ध हैं। उन्हें लाएं, बच्चों को उसमें अपने मन की चीजें सजानें या करने दें। उसमें बैठकर टार्च लाइट में कहानियां सुना सकते हैं। बच्चे अपनी रुचि अनुसार उसकी सजावट कर सकते हैं, पिकनिक या कैंपिंग का बनावटी खेल भी खेल सकते हैं। ये गतिविधियां बच्चों के लिए हैं। आप सहभागी जरूर बनें, मगर रेफरी या मैनेजर नहीं। बच्चों को वो निर्णय लेने दें, जो उनके लिए सुरक्षित हों। बच्चों के लिए घर में कोजी सा रेनी डे ट्रेजर हंट भी खेला जा सकता है। इसमें कुछ मजेदार पहेलियां लिखें, घर के जरूरी सामानों के उपयोग से मिलती-जुलती बातों के हिंट दें। इससे बच्चे प्राब्लम साल्विंग और टीम वर्क भी सीख जाते हैं।
मिलाएं प्रकृति से
बच्चों को गार्डनिंग स्किल सिखाने के लिए बारिश सबसे उम्दा ऋतु है। छोटे गमलों में उन्हें बीज बोना सिखाएं, बीजों के अंकुरण के बारे में बात करें और धैर्य से पौधे की बढ़त को आब्जर्व करने दें। इससे बच्चों में प्रकृति के लगाव के साथ धैर्य और जिम्मेदारी का बोध भी बढ़ता है और वो हमेशा उसकी वैल्यू करते रहेंगे। बारिश के मौसम में बच्चों के साथ किचिन में कुछ हल्का फुल्का बनाना भी बांडिंग एक्टिविटी हैI कुछ नाश्ते, सलाद, फ्रूट चाट और थोड़े बड़े बच्चों के लिए बेसिक कुकिंग-बेकिंग एक मजेदार अनुभव के साथ-साथ उनका कौशल विकास भी करेगा। बच्चों को उनकी उम्र अनुसार छीलने, काटने, चुनने, घोल बनाने इत्यादि का अवसर दें। उनके साथ उससे संबंधित टिप्स बताएं, जिससे बच्चे उन्हें जरूर याद रखेंगे और आगे पारंगत होंगे। जो बच्चे किचिन में खुद कुछ बनाना जानते हैं वो कभी खाना वेस्ट नहीं करते, खाना बनाने में लगने वाली मेहनत को समझते हैं और खाने की तारीफ करना नहीं भूलते।
बुरा नहीं है बोर होना
अभिभावक के तौर पर हमें याद रखना होगा कि बच्चों के हर खाली मिनट को किसी गतिविधि से भरना जरूरी नहीं है। बच्चों को बोर भी होने दें। बोरियत से भरे क्षणों में ही सबसे ज्यादा इमैजिनेशन, रचनात्मकता और इंडिपेंडेंट प्ले का विकास होता है। आजकल बच्चे बोर होने से पहले ही किसी न किसी स्क्रीन पर पहुंच जाते हैं और ये उनके मानसिक विकास के लिए श्राप साबित हो रहा है। इस दौरान स्क्रीन को पूरी तरह बंद करने की जगह संतुलित युक्ति अपनाएं। अभिभावक खुद भी स्क्रीन का इस्तेमाल कम करें। स्क्रीन फ्री जोन तय करें और उनका आप भी पालन करें।
