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    एक ही घर में रहकर भी रूममेट्स बन जाते हैं पार्टनर! बड़ी नहीं, ये छोटी-छोटी आदतें बनती हैं रिश्ता टूटने की वजह

    By Dr. Leena ParannjpeEdited By: Harshita Saxena
    Updated: Fri, 31 Jul 2026 07:44 PM (IST)

    रिश्ते अक्सर बड़े झगड़ों से नहीं, बल्कि छोटी-छोटी आदतों और रोजमर्रा के बदलावों से टूटते हैं, जिससे पार्टनर एक ही घर में रूममेट्स बन जाते हैं। प्रभावी ...और पढ़ें

    पार्टनर क्यों बन जाते हैं रूममेट्स: छोटी आदतें जो रिश्तों में लाती हैं दूरियां (Picture Credit- AI Generated)

    पार्टनर क्यों बन जाते हैं रूममेट्स: छोटी आदतें जो रिश्तों में लाती हैं दूरियां (Picture Credit- AI Generated)

    HighLights

    1. छोटी आदतें रिश्तों में दरार का कारण बनती हैं

    2. अक्सर पार्टनर एक ही घर में रूममेट्स बन जाते हैं

    3. प्रभावी बातचीत और सम्मान रिश्ते को मजबूत बनाता है

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। रिश्ते बनाना जितना आसान होता है, उतना ही मुश्किल उस रिश्ते को निभाना होता है। आपने अक्सर कई लोगों को कहते सुना होगा कि रिश्ते कांच से नाजुक होते हैं, क्योंकि कई बार छोटी-छोटी वजहों से भी रिश्तों में गहरी दरार आ जाती है। 

    लोगों को अक्सर लगता है कि रिश्ते बड़े झगड़ों, बड़ी गलतफहमियों या फिर जीवन में आए किसी बड़े बदलाव की वजह से टूटते हैं। लेकिन अगर गौर से देखा जाए, तो पता चलता है कि रिश्ते छोटे-छोटे, रोजमर्रा के बदलावों की वजह से टूटते हैं। एक समय ऐसा आता है जब दोनों पार्टनर एक-दूसरे से अपने मन की बात कहने से हिचकिचाने लगते हैं और एक ही घर में रहते हुए भी जीवनसाथी की तरह नहीं, बल्कि रूममेट्स की तरह रहना शुरू कर देते हैं।

    आखिर क्यों होता है ऐसा?

    अक्सर रिश्तों में आती दरार को देखकर परिवार के बड़े-बुजुर्ग एक आम सलाह देते हैं कि "एक बच्चा कर लो, सब ठीक हो जाएगा।" इस सलाह के पीछे का इरादा भले ही नेक हो, लेकिन जब पति-पत्नी के बीच पहले से ही इमोशनली डिस्टेंस आ जाए, तो यह पुराना नुस्खा काम नहीं आता। इसके विपरीत, जो कपल आपस में ही तालमेल नहीं बिठा पा रहे हैं, उन पर एक नन्हे बच्चे की भारी जिम्मेदारी उनके कमजोर रिश्ते को और भी ज्यादा बोझिल बना देती है।

    क्यों आती हैं रिश्तों में दूरियां?

    असल में, रिश्तों में यह फासले अचानक किसी एक बड़े झगड़े से नहीं आते। यह हर दिन की छोटी-छोटी बातों, ऑफिस और काम के तनाव, बिजी रूटीन और बेवजह की उम्मीदों का नतीजा होते हैं। लोग अक्सर यह सोचकर चुप हो जाते हैं कि "मेरा पार्टनर बिना मेरे कुछ कहे ही मेरी हर बात समझ लेगा।" लेकिन हकीकत में ऐसा कभी नहीं होता। 

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    यहीं से बातचीत कम होने लगती है और दिल की दूरियां बढ़ने लगती हैं। आज के समय में रिश्तों में प्यार से ज्यादा कई उम्मीदें जुड़ गई हैं। जब हम इन उम्मीदों को खुलकर बयां नहीं करते, तो वे निराशा में बदल जाती हैं। इसके अलावा, आजकल लोग अपने 'पर्सनल स्पेस' और फ्रीडम को इतनी अहमियत देने लगे हैं कि वे अनजाने में ही अकेलेपन का शिकार हो जाते हैं।

    सही तरीके से बोले सच 

    रिश्ते में ईमानदारी होना बहुत अच्छी बात है, लेकिन यह इतनी चुभने वाली नहीं होनी चाहिए कि सामने वाले को गहरी चोट पहुंचे। सच जरूर बोलें, पर ऐसे लहजे में कि आपकी बात भी पूरी हो जाए और आपका रिश्ता भी सुरक्षित रहे। खामोशी को हमेशा सुकून नहीं समझना चाहिए, कई बार यह किसी बड़े तूफान के आने की आहट होती है। इसलिए कपल्स के बीच एक ऐसा सुरक्षित और भरोसेमंद माहौल होना चाहिए, जहां बिना किसी डर या जजमेंट के वे अपनी बात एक-दूसरे के सामने रख सकें।

    इन बातों का रखें ध्यान

    हर इंसान का स्वभाव अलग होता है; कोई बहुत ज्यादा भावुक होता है, तो कोई बहुत ही प्रैक्टिकल। ऐसे में एक-दूसरे के नजरिए को समझना बेहद जरूरी हो जाता है। रिश्ते की समस्याओं का असली हल सौ प्रतिशत 'पारदर्शी बातचीत' में नहीं, बल्कि 'प्रभावी बातचीत' में छिपा होता है। आपको यह हुनर सीखना चाहिए कि कब, क्या और कैसे बोलना है।

    रिश्ते को बचाने का सबसे मूल मंत्र यह है कि आपस में इस बात पर न लड़ें कि "कौन सही है", बल्कि हमेशा यह देखें कि "रिश्ते के लिए क्या सही है।" एक मजबूत रिश्ते का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आप हर बात पर सहमत हों, बल्कि असहमति होने के बावजूद एक-दूसरे का सम्मान करना ही असली प्यार है। ध्यान रखें कि सच्चा प्यार सिर्फ सही इंसान ढूंढना नहीं है, बल्कि अपने मौजूदा रिश्ते को हर दिन थोड़ा और खूबसूरत बनाने का प्रयास करना है।

    (डॉ. लीना परांजपे, रिलेशनशिप एवं मैरिज एक्सपर्ट एवं मैरिज ट्रांसफॉर्मेशन कोच हैं।)

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