बच्चे के लिए क्यों जरूरी है माता-पिता का प्यार? 2500 साल पुराने प्रयोगों से समझें पेरेंटिंग का असली मतलब
बच्चों के सही विकास के लिए माता-पिता का भावनात्मक जुड़ाव जरूरी है। इतिहास के प्रयोगों ने साबित किया है कि बच्चों के पालन-पोषण में माता-पिता की जगह कोई और नहीं ले सकता।

क्यों जरूरी है बच्चों के लिए माता-पिता का साथ? (AI Generated Image)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। पहली बार माता-पिता बने कपल के मन में यह सवाल जरूर आता है कि क्या वे अपने बच्चे की सही देखभाल कर पाएंगे या क्या वे उसकी सभी जरूरतों को पूरा कर पाएंगे? बच्चों को पालने का सही तरीका क्या है? किस तरह की पेरेंटिंग बच्चों के लिए सही है? ऐसे कई सवाल अक्सर माता-पिता के मन में आते रहते हैं।
पेरेंट्स के मन में ऐसे सवाल आना सिर्फ आज के दौर की बात नहीं है, बल्कि हमेशा से ऐसा रहा है। बच्चों की सही देखभाल के लिए इतिहास में कई प्रयोग भी हुए हैं। इनमें से कुछ में माता-पिता की भूमिका को बिल्कुल सीमित या खत्म करने की कोशिश भी की गई, कहीं पूरे समुदाय ने साथ मिलकर बच्चों के परवरिश की कोशिश की, तो कहीं सरकार ने बच्चों की परवरिश की जिम्मेदारी उठाई।
हालांकि, इस सभी प्रयोगों के बाद एक ही बात सामने आई कि बच्चों के पालन-पोषण के लिए सबसे सुरक्षित और बेहतर माहौल उसके माता-पिता ही दे सकते हैं।
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(Picture Courtesy: Freepik
बुरी तरह फेल हुए पेरेंटिंग के ये दो तरीके
बच्चों को पालने के लिए एक काफी दिलचस्प प्रयोग आज से लगभग 2500 साल पहले किया गया था। यूनान के एक फिलॉसोफर ने अपनी किताब द रिपब्लिक में लिखा था कि अगर बच्चों का पालन-पोषण सरकार करे या माता-पिता अपनी संतान को पहचान ही न सके, तो इससे समाज ज्यादा निष्पक्ष बनेगा। हालांकि, यह प्रयोग असफल रहा, क्योंकि माता-पिता और बच्चों के बीच के भावनात्मक लगाव को खत्म करना मुमकिन नहीं था।
एक दूसरा प्रयोग 19वीं सदी में अमेरिका की वनाइडा कम्युनिटी में किया गया। वहां के संस्थापक जॉन हम्फ्री नोयस ने बच्चों को बच्चों को पालने के लिए सामूहिक रूप से एक खास व्यवस्था बनाई। इस व्यवस्था में बच्चों का पालन माता-पिता नहीं, पूरा समुदाय करता था। हालांकि, ये व्यवस्था बहुत लंबे समय तक नहीं चल सकी और कुछ ही सालों में पूरी तरह बिखर गई।
बच्चों के विकास के लिए भावनात्मक जुड़ाव जरूरी
बच्चों के बेहतर विकास में परिवार की अहम भूमिका होती है। बच्चे के स्वस्थ मानसिक विकास के लिए कम से कम एक स्थिर, संवेदनशील और भरोसमंद वयस्क होना जरूरी है और ये जिम्मेदारी सबसे बेहतर तरीके से माता-पिता ही पूरी करते हैं। साथ ही, बच्चों के शुरुआती सालों में मिलने वाला इमोशनल कनेक्शन ही उनकी मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक विकास की नींव रखता है। इसलिए बच्चों के पालन-पोषण के लिए माता-पिता की जगह कोई और नहीं ले सकता।
