'चलो मुरथल चलते हैं...' आपने भी कभी दोस्तों की स्टोरी देखकर बनाया है ऐसा प्लान? हाईवे FOMO का हो सकता है असर
सोशल मीडिया पर दोस्तों की मुरथल ट्रिप देखकर 'हाईवे FOMO' के कारण लोग अचानक प्लान बना लेते हैं।

खाना नहीं, बल्कि इंस्टाग्राम का 'दिखावा' बन जाता है रोड ट्रिप की वजह (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। सुबह उठते ही इंस्टाग्राम खोला और दोस्तों की स्टोरी में हाईवे, कार की ड्राइविंग सीट, लाउड म्यूजिक और गरमा-गरम पराठों की तस्वीर दिख गई। मन में तुरंत ख्याल आया- "यार, हम यहां क्या कर रहे हैं?" बस फिर क्या था, देर रात प्लान बना और आप भी मुरथल के लिए निकल पड़े। खास बात ये है कि भूख से ज्यादा आपको इस बात की बेचैनी थी कि कहीं आप कुछ मिस तो नहीं कर रहे।
इसे सिर्फ दोस्तों के साथ घूमने का शौक समझना आसान है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसके पीछे एक दिलचस्प मनोवैज्ञानिक वजह भी हो सकती है? सोशल मीडिया पर दूसरों को किसी एक्सपीरिएंस का मजा लेते देखकर खुद उस एहसास से दूर रह जाने का डर FOMO यानी 'फियर ऑफ मिसिंग आउट' कहलाता है। आइए, डिटेल में समझते हैं इस बारे में।

(Image Source: AI-Generated)
जब घूमना जरूरत नहीं, 'जरूरी' लगने लगे
मुरथल दिल्ली से करीब 45-50 किलोमीटर दूर हरियाणा के सोनीपत जिले में NH-44 पर स्थित है। यहां के ढाबे और खासकर भरवां पराठे लंबे समय से लोगों को आकर्षित करते रहे हैं। आज मुरथल सिर्फ रास्ते में खाना खाने की जगह नहीं रह गया है, बल्कि दोस्तों और परिवार के साथ वीकेंड पर जाने का एक पॉपुलर डेस्टिनेशन बन चुका है।
यही वजह है कि जब आपकी सोशल मीडिया फीड पर लगातार मुरथल की तस्वीरें आती हैं, तो दिमाग इसे सिर्फ एक जगह नहीं, बल्कि एक एक्सपीरिएंस की तरह देखने लगता है। दोस्तों का ग्रुप वहां बैठा है, टेबल पर मक्खन वाला पराठा है और पीछे हाईवे की चहल-पहल। आपको लगता है कि अगर आप इस समय वहां नहीं हैं, तो शायद आप किसी खास चीज से पीछे रह रहे हैं।
असली भूख पर भारी पड़ सकता है सोशल मीडिया का असर
FOMO में सबसे दिलचस्प बात यह है कि आपको हमेशा उस चीज की वास्तव में जरूरत नहीं होती। कई बार सिर्फ इसलिए जाने का मन करता है क्योंकि बाकी लोग जा रहे हैं।
मान लीजिए आपने पूरे हफ्ते काम किया है और रविवार को घर पर आराम करने का मन था। तभी किसी दोस्त की मुरथल वाली स्टोरी आ जाती है। कुछ मिनट तक स्टोरी देखने के बाद अचानक घर पर बैठना बोरिंग लगने लगता है। आपको लग सकता है कि बाकी सब लोग जिंदगी का मजा ले रहे हैं और आप कुछ मिस कर रहे हैं।
यही तुलना आपको अपना प्लान बदलने के लिए मोटिवेट कर सकती है। यानी शुरुआत में मुरथल जाने की इच्छा नहीं थी, लेकिन दूसरों को वहां देखकर इच्छा पैदा हो गई।
सिर्फ पराठों की वजह से वायरल नहीं है मुरथल
मुरथल की लोकप्रियता का रिश्ता सिर्फ खाने से नहीं है। यहां जाना अपने आप में एक छोटी-सी रोड ट्रिप जैसा अनुभव बन गया है। दिल्ली-NCR से लोग दोस्तों और परिवार के साथ ड्राइव करते हुए यहां पहुंचते हैं, खाना खाते हैं और फिर वापस लौट आते हैं। सोशल मीडिया ने इस पूरे एक्सपीरिएंस को और ज्यादा विजुअल बना दिया है।
मुरथल के पुराने ढाबों की शुरुआत हाईवे पर सफर करने वाले यात्रियों और ट्रक ड्राइवरों के लिए साधारण खाना उपलब्ध कराने से हुई थी। समय के साथ यह इलाका बड़े फूड डेस्टिनेशन में बदल गया।
आज किसी की स्टोरी में सिर्फ एक प्लेट पराठा नहीं दिखता। उसके साथ कार की ड्राइव, दोस्तों की हंसी, हाईवे, ढाबे का माहौल और पूरी आउटिंग की कहानी दिखाई देती है। यही चीज फोमो को बढ़ाने का काम करती है।

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हाईवे FOMO आखिर है क्या?
'हाईवे FOMO' कोई मेडिकल टर्म नहीं है। असल में आपको भूख नहीं लगी होती है, और न ही आपको आधी रात को पराठे खाने का कोई खास शौक होता है। आपको बस उस लॉन्ग ड्राइव और सोशल मीडिया वाली चमक-दमक का हिस्सा बनना होता है। आप अपने दो-चार दोस्तों को कॉल लगाते हैं, जबरदस्ती प्लान बनाते हैं और अपनी प्यारी नींद खराब करके हाईवे पर निकल पड़ते हैं।
यानी इसमें जगह से ज्यादा मायने उस अनुभव का होता है जो सोशल मीडिया पर दिखाई दे रहा है। आपको शायद मुरथल के पराठे की उतनी जरूरत न हो, लेकिन दोस्तों के साथ बैठने, ड्राइव करने और उस पल का हिस्सा बनने की इच्छा जरूर हो सकती है। इसलिए कई बार असली अट्रैक्शन खाना नहीं, बल्कि 'मैं भी वहां था' वाली फीलिंग होती है।
हर वायरल जगह जा नहीं है जरूरी
सोशल मीडिया की सबसे बड़ी चाल यही है कि वहां आपको लोगों की जिंदगी के चुनिंदा और मजेदार हिस्से दिखाई देते हैं। कोई यह स्टोरी नहीं लगाता कि हाईवे पर ट्रैफिक में कितना समय लगा, पार्किंग के लिए कितनी परेशानी हुई या खाने के लिए कितना इंतजार करना पड़ा।
मुरथल को लेकर ऑनलाइन चर्चाओं में भी लोगों की राय एक जैसी नहीं है। कुछ लोग इसे शानदार रोड ट्रिप और डाइनिंग का बेस्ट एक्सपीरिएंस मानते हैं, जबकि कुछ का कहना है कि आज वहां जाने की असली वजह खाना कम और आउटिंग का एक्सपीरिएंस ज्यादा है।
