भारत में यहां पड़ती है सूरज की पहली किरण! खूबसूरत वादियों और जनजातीय संस्कृति के लिए मशहूर है अरुणाचल प्रदेश
अरुणाचल प्रदेश को भारत में 'उगते सूरज की धरती' कहा जाता है, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता और जनजातीय परंपराओं के लिए मशहूर है।

क्यों इतना खास है अरुणाचल प्रदेश? (AI Generated Image)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। क्या आप जानते हैं भारत के सबसे उत्तर-पूर्वी छोड़ पर स्थित अरुणाचल प्रदेश को उगते सूरज की धरती कहा जाता है? ये नाम इस राज्य को इसलिए मिला है, क्योंकि भारत में सूरज की सबसे पहली किरण इसी राज्य में पड़ती है।
इतना ही नहीं, हिमालय की गोद में बसा ये राज्य अपनी प्राकृतिक खूबसूरती, जनजातीय परंपराओं और शांत वातावरण के लिए भी जाना जाता है। अरुणाचल प्रदेश का खान-पान और हस्त शिल्प भी काफी खास है। आइए जानें इस राज्य की संस्कृति, कला और खूबसूरत जगहों के जुड़ी कुछ बातें।
अरुणाचल प्रदेश की खूबसूरत जगहें
लगभग 10 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित तवांग अपने बर्फ से ढके पहाड़ों और ऐतिहासिक तवांग मठ के लिए जाना जाता है। ये भारत के सबसे बड़े बौद्ध मठों में से एक है। इसके साथ ही, यहां जीरो वैली भी स्थित है, जो अपने हरे-भरे मैदानों और अपतानी जनजाती के लिए मशहूर है। ये जगह प्रकृति और संगीत प्रेमियों को काफी पसंद आती है, क्योंकि यहां जीरो म्यूजिक फेस्टिवल का आयोजन भी होता है।
अरुणाचल प्रदेश का नामदफा नेशनल पार्क चीता, तेंदुआ, स्नो लेपर्ड और क्लाउडेड लेपर्ड का घर है। यहां की संगेस्तर झील, जिसे माधुरी झील के नाम से भी जाना जाता है अपने क्रिस्टल जैसे साफ पानी के लिए मशहूर है। इस झील के बीच सूखे पेड़ खड़े हैं और कोयला फिल्म का एक गाना भी यहां शूट किया गया था, जिसके बाद ये झील काफी मशहूर हुई थी। इसके अलावा, सेला पास अपने बर्फीले दर्रों के लिए जाना जाता है।
अरुणाचल का खान-पान
अरुणाचल का खाना काफी सादा होता है। यहां के खाने में तेल और मसालों का काफी कम इस्तेमाल होता है। उबले हुए चावल, ताजी हरी सब्जियां, बांस के कोपलों से बनी डिशेज और उबला हुआ मांस यहां के मुख्य व्यंजन हैं। यहां का थुकपा और मोमोज भी काफी स्वादिष्ट होता है। चावल और बाजरे से बनाई जाने वाली अपांग और मारुआ यहां की पारंपरिक फर्मेंटेड बियर हैं।
कला और हस्तशिल्प
अरुणाचल प्रदेश के हस्तशिल्प में स्थानीय चीजों और जनजातीय कला की झलक देखने को मिलती है। यहां बांस और बैंत से कई चीजें हाथ से बनाई जाती हैं, जैसे बांस की टोकरियां, बर्तन, चटाई और सजावट का सामान। बांस से बनी ये चीजें पर्यटकों को खूब लुभाती हैं।
इसके अलावा, यहां की अलग-अलग जनजातियां अपने खास पैटर्न और रंगों वाले शॉल, जैकेट और बैग्स भी बुनती हैं। मोनपा जनजाति की बनाई लकड़ी की नक्काशीदार मूर्तियां, बर्तन और रंगीन मास्क यहां के हस्तशिल्प का बेहतरीन उदाहरण है।
अरुणाचल की संस्कृति
यहां 26 से ज्यादा प्रमुख जनजातियां रहती हैं, जिनमें मोनपा, अपतानी, मिश्मी आदि शामिल हैं। ये जनजातियां प्रकृति से गहरा लगाव रखती हैं और इसकी झलक यहां की संस्कृति में भी नजर आती है। यहां सोलुंग, लोसार और न्योकुम जैसे त्योहार मनाए जाते हैं, जो अच्छी फसल और शांति के लिए मनाए जाते हैं। त्योहारों के दौरान पारंपरिक छम नृत्य और लोकगीत स्थानीय लोगों के उत्साह और यहां की संस्कृति को दर्शाते हैं।
