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बंद तहखाने से निकली थीं 100 मूर्तियां...और आज बना नई संसद का मास्टरप्लान! खास है विदिशा के बीजामंडल की कहानी

Updated: Sun, 23 Aug 2026 04:38 PM (GMT+05:30)

भारत की नई संसद का डिजाइन बीजामंडल की देखा-देखी ही बना है।

बीजामंडल है नई संसद की प्रेरणा (Image Source: AI Generated)

बीजामंडल है नई संसद की प्रेरणा (Image Source: AI Generated)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आज जो आप नई संसद का डिजाइन देख रहे हैं, कभी सोचा है कि इसे किससे प्रेरणा लेकर बनाया गया है? अगर नहीं तो जान लीजिए कि नई संसद एक ऐतिहासिक धरोहर से प्रेरित है। वो नाम है विदिशा में स्थित ऐतिहासिक बीजामंडल, जिसे विजय मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। 

बीजामंडल है नई संसद की प्रेरणा 

मध्य प्रदेश के विदिशा में विजय मंदिर उर्फ बीजामंडल का मध्य भारत की हेरिटेज लिस्ट में खास स्थान है। आपको शायद पता न हो पर देश की नई संसद को इसी की तर्ज पर डिजाइन किया गया है। इतिहास पर नजर डालें तो चालुक्य राजा कृष्ण के प्रधानमंत्री वाचस्पति ने विदिशा में विजय की स्मृति को सहेजने के लिए इसका निर्माण करवाया था। 

इस स्थान पर सूर्य देवता यानी भेल्लिस्वामिन की प्रतिमा लगाई थी, यही वजह है कि नगर का नाम भी भेलसा पड़ा। फिर जैसे जैसे मंदिर के विस्तार का काम आगे बढ़ा, यह मंदिर देवी चर्चिका और भगवान शिव को भी समर्पित हो गया।

कोणार्क सूर्य के समकक्ष था विजय मंदिर 

11वीं सदी में अल-बरूनी ने इसकी ऊंचाई 300 फीट के आसपास बताई थी। तभी तो इसकी भव्यता की तुलना पुरी के कोणार्क सूर्य मंदिर से की जाती थी। कहते हैं यह मंदिर एक ऊंचे चबूतरे पर बनाया गया था जिसका परिसर आधा मील लंबा और इतना ही चौड़ा भी था। 

इसकी वास्तुकला की बात की जाए तो इसके स्तंभों पर पौराणिक कथाओं, बेल बूटों, यक्ष-यक्षिणियों की सुंदर नक्काशी की गई थी। इस मंदिर के परिसर के उत्तर दिशा में एक एल शेप की बावड़ी थी जिसपर मंदिर से भी 400 साल पुरानी भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं को बेहद खूबसूरती से उकेरा गया था। 

एक दीवार गिरने पर निकली थीं 100 से ज्यादा मूर्तियां 

यह बात साल 1991 की है जब भारी बारिश के चलते औरंगजेब के जमाने की बनी एक पुरानी जर्जर दीवार गिर गई। इसके गिरने से 300 साल से बंद तहखानों और गलियारों काअ रास्ता खुल गया। तब यहां से करीब 100 से ज्यादा मूर्तियां निकाली गई थीं। इनमें अष्टभुजी गणेश, सप्तमातृका पैनल, सूर्य देव, लक्ष्मी-विष्णु और महिषासुरमर्दिनी जैसी कई प्रतिमाएं शामिल थीं। हैरान करने वाली बात यह कि इनमें से कुछ मूर्तियां तो 8 फीट तक लंबी थीं। 

बार-बार टूटकर बनने से जुड़ा है इतिहास

महमूद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर को क्षति पहुंचाने के बाद विजय मंदिर को अपना निशाना बनाया था। जिसका जीर्णोद्धार परमार शासकों ने करवाया था। फिर जब खिलजी का हमला हुआ, तब भी यह मंदिर चपेट में आया। इसके बाद गुजरात के सुल्तान बहादुर शाह ने इस मंदिर को नुकसान पहुंचाया था। मुगलों के जमाने में औरंगजेब ने विजय मंदिर का शिखर तुड़वाया था। 

साल 1934 में इतनी बार क्षति झेलने के बाद मंदिर के अवशेष सामने आए। साल 1974 में एएसआई ने यहां खुदाई शुरू की, तब नक्काशीदार पत्थर, चबूतरा और सीढ़ियों के अवशेष यहां मिले थे। 

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