ShakthiSAT मिशन के लिए 108 देशों की लड़कियों को पछाड़कर कारपेंटर की बेटी ने रचा इतिहास, चंद्र मिशन में लेंगी हिस्सा
आंध्र प्रदेश के सरकारी स्कूल कक्षा 10वीं में पढ़ने वाली कंडुला जेसी का चयन दुनिया के पहले ऑल-गर्ल्स लूनर क्यूबसैट मिशन के लिए किया गया है। उन्होंने 10 ...और पढ़ें

Kandula Jessie ने रचा इतिहास।
HighLights
कंडुला जेसी ने रचा इतिहास।
जल्द ही मून मिशन में देंगी अपना योगदान।
करियर डेस्क, नई दिल्ली। कक्षा 10वीं में जब तमाम छात्र बोर्ड परीक्षा में अच्छे अंक लाने के लिए दिन-रात कड़ी मेहनत कर रहे थे। तब आंध्र प्रदेश की रहने वाली 14 वर्षीय कंडुला जेसी (Kandula Jessie) बोर्ड परीक्षा के साथ-साथ दुनिया के पहले ऑल-गर्ल्स लूनर क्यूबसैट मिशन यानी 'शक्तिसैट' में शामिल होने के लिए बड़ी ही शिद्दत से तैयारी कर रही थी।
एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाली कारपेंटर की बेटी कंडुला जेसी अब चंद्र मिशन में हिस्सा लेंगी। बता दें, इस मिशन के लिए दुनियाभर के करीब 108 देशों के 1200 से ज्यादा छात्राओं ने रजिस्ट्रेशन करवाया था। लेकिन इस मिशन के लिए भारत से महज 20 छात्राओं का चयन किया गया, जिसमें आंध्र प्रदेश की कंडुला जेसी भी शामिल हैं।
गरीब परिवार में जन्म
कंडुला जेसी का जन्म आंध्र प्रदेश के एक बेहद ही गरीब परिवार में हुआ है। जेसी के पिता एक कारपेंटर है। घर के माली हालत ठीक न होने के कारण जेसी के पिता ने उन्हें प्राइवेट स्कूल से निकालकर आंध्र प्रदेश के धवलेश्वरम में स्थित जिला परिषद गर्ल्स हाई सरकारी स्कूल (ZPGHS) में दाखिला दिलाया।
शिक्षक ने बदली किस्मत
आर्थिक तंगी के कारण जेसी को जिस सरकारी स्कूल में दाखिला दिलाया गया। आगे चलकर उसी सरकारी स्कूल ने जेसी को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। जेसी शुरूआत से ही पढ़ाई में एक होनहार छात्र रही है। उन्हें विज्ञान विषय में सबसे ज्यादा रुचि है। उनकी इस रुचि को जेसी की फिजिकल साइंस टीचर और अटल टिंकरिंग लैब की प्रभारी मणिमाला ने पहचाना। उन्होंने इस मिशन के लिए जेसी का पंजीकरण करवाया। लेकिन बाद में पता चला कि कोर्स पहले ही शुरू हो गया। हालांकि शिक्षक के प्रयास से जेसी को दोबारा मौका मिला और उन्होंने इस मिशन में चयन पाने के लिए दिन रात कड़ी मेहनत की।
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बोर्ड परीक्षा के साथ ऑनलाइन कोर्स
जेसी के लिए यह सफर बिल्कुल भी आसान नहीं था। उन्होंने कक्षा 10वीं बोर्ड परीक्षा की तैयारी के साथ-साथ रोजाना पूरे अनुशासन के साथ ऑनलाइन क्लास में भाग लिया। इस प्रोग्राम में लगभग 550 सेशन और 21 मॉड्यूल शामिल थे, जिसमें सेटेलाइट सिस्टम और स्पेस टेक्नोलॉजी जैसे विषयों के बारे में पढ़ाया गया था। जेसी के मुताबिक ये सभी विषय शुरुआत में उनके लिए बेहद ही कठीन साबित हुए। क्योंकि ये सभी विषय उनके स्कूल के सिलेबस से काफी ज्यादा एडवांस थे। लेकिन जेसी ने इन विषयों को समझने के लिए रोजाना क्लास में भाग लिया और निरंतर सीखने पर ध्यान दिया।
मिशन में शामिल होने के लिए सीखी इंग्लिश
छात्राओं का चयन तीन चरणों ऑनलाइन एग्जाम, साइंटिस्ट के साथ इंटरव्यू और वीडियो प्रेजेंटेशन के जरिये होना था। जेसी ने इंटरव्यू और वीडियो प्रेजेंटेशन में अच्छा प्रदर्शन करने के लिए अपने टीचर्स और ऑनलाइन वीडियो की मदद से अंग्रेजी में बात करने के लिए नियमित रूप से अभ्यास किया। बता दें, जेसी का सपना इसरो में साइंटिस्ट बनकर देश के अंतरिक्ष प्रोग्राम में हिस्सा लेना है।