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NOBEL PRIZE 2026: मेडिसिन में कार्ल डिसेरोथ, पीटर हेगमैन और जॉर्ज नागेल को मिला नोबेल, जानें किन कार्यों के लिए दिया गया सम्मान

Published: Mon, 05 Oct 2026 04:43 PM (IST)

वर्ष 2026 फिजियोलॉजी या मेडिसिन के लिए नोबेल प्राइज का एलान कर दिया गया है। संयुक्त रूप से तीन लोगों- ...और पढ़ें

Nobel Prize in Physiology or Medicine 2026

Nobel Prize in Physiology or Medicine 2026

HighLights

  1. मेडिसन में नोबेल प्राइज 2026 का एलान।

  2. संयुक्त रूप से कार्ल डिसेरोथ, पीटर हेगमैन और जॉर्ज नागेल को मिला पुरस्कार।

एजुकेशन डेस्क, नई दिल्ली। नोबेल पुरस्कार को दुनिया का सबसे प्रतिष्ठित सम्मान माना जाता है। विभिन्न क्षेत्रों में अतुलनीय योगदान के लिए यह पुरस्कार प्रतिवर्ष प्रदान किये जाते हैं। करोलिंस्का इंस्टीट्यूट की नोबेल असेंबली ने 5 अक्टूबर 2026 को फिजियोलॉजी या मेडिसिन (शरीर क्रिया विज्ञान या चिकित्सा) में 2026 के नोबेल पुरस्कार विजेताओं के नामों की घोषणा कर दी है।

मेडिसिन के क्षेत्र में संयुक्त रूप से तीन लोगों- कार्ल डिसेरोथ, पीटर हेगमैन और जॉर्ज नागेल को 'लाइट-गेटेड आयन चैनलों' और ऑप्टोजेनेटिक्स (optogenetics) से जुड़ी खोजों के लिए नोबेल प्रदान किया गया है।

क्या रही मुख्य खोज

तीनों वैज्ञानिकों के काम ने 'ऑप्टोजेनेटिक्स' की नींव रखी। यह एक ऐसी तकनीक है जिसके जरिए शोधकर्ता प्रकाश का उपयोग करके तंत्रिका कोशिकाओं (nerve cells) को नियंत्रित कर सकते हैं और यह अध्ययन कर सकते हैं कि न्यूरल सर्किट हमारी यादों, भावनाओं और व्यवहार को कैसे प्रभावित करते हैं।

नोबेल प्राइज में क्या है पुरस्कार राशि

नोबेल विजेताओं को इस बार 1.2 करोड़ (12 मिलियन) स्वीडिश क्रोनर की राशि दी जाएगी। इस धनराशि को तीनों विजेताओं के बीच बराबर-बराबर बांटा जाएगा। भारतीय रुपयों के हिसाब से यह राशि 11,51,77,824 रुपये होगी। 

मेडिसिन में नोबेल विजेताओं का संक्षिप्त विवरण और उनका योगदान

कार्ल डिसेरोथ (Karl Deisseroth)
कार्ल डिसेरोथ का जन्म वर्ष 1971 में हुआ था। वे अमेरिका की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी और हॉवर्ड ह्यूजेस मेडिकल इंस्टीट्यूट से जुड़े हैं। वे स्टैनफोर्ड में बायोइंजीनियरिंग, मनोरोग और व्यवहार विज्ञान के प्रोफेसर हैं।
कार्ल डिसेरोथ ने 1998 में पीएचडी और 2000 में स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से एमडी की पढ़ाई पूरी की। नोबेल पुरस्कार से सम्मानित कार्य में उनका योगदान तब आया जब उन्होंने चूहे की तंत्रिका कोशिकाओं में 'चैनलरोडोप्सिन' (channelrhodopsin) जीन को प्रवेश कराया। इन संशोधित कोशिकाओं पर नीली रोशनी डालकर उन्होंने साबित किया कि इससे तंत्रिका संकेतों (nerve signals) को ट्रिगर किया जा सकता है। 2007 में उन्होंने दिखाया कि प्रकाश से नियंत्रित होने वाले इस स्विच का उपयोग जीवित चूहों के दिमाग में भी किया जा सकता है।

पीटर हेगमैन (Peter Hegemann)
पीटर हेगमैन का जन्म वर्ष 1954 में हुआ था। वर्तमान में वे बर्लिन, जर्मनी की हम्बोल्ट यूनिवर्सिटी में न्यूरोसाइंस के हर्टी सीनियर प्रोफेसर हैं। उन्होंने 1984 में मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट फॉर बायोकेमिस्ट्री से पीएचडी प्राप्त की थी।
हेगमैन का शोध इस सवाल से शुरू हुआ था कि एककोशिकीय शैवाल (single-celled alga) Chlamydomonas प्रकाश की ओर कैसे बढ़ता है। उनके काम से "चैनलरोडोप्सिन" प्रोटीन की पहचान हुई, जो नीली रोशनी के संपर्क में आने पर एक चैनल खोलता है जिससे आवेशित आयन (charged ions) प्रवाहित हो सकते हैं।

जॉर्ज नागेल (Georg Nagel)
नोबेल प्राइज वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार जॉर्ज नागेल का जन्म 1953 में हुआ था। वर्तमान में वे जर्मनी की वुर्जबर्ग यूनिवर्सिटी में मॉलिक्यूलर प्लांट फिजियोलॉजी के प्रोफेसर हैं। उन्होंने 1988 में फ्रैंकफर्ट यूनिवर्सिटी से पीएचडी की थी।
नागेल ने हेगमैन के साथ मिलकर "Chlamydomonas" में पाए जाने वाले प्रकाश-संवेदनशील प्रोटीन 'चैनलरोडोप्सिन' पर काम किया। उनके शोध ने दिखाया कि यह प्रोटीन अन्य कोशिकाओं को भी प्रकाश के प्रति संवेदनशील बना सकता है।

कार्यों का किया गया उल्लेख

नोबेल प्राइज विजेताओं द्वारा दिए गए योगदान का वेबसाइट पर उल्लेख किया गया है। दी गई जानकारी के अनुसार "यह समझना कि दिमाग यादें, भावनाएं और व्यवहार कैसे बनाता है, लंबे समय से रिसर्च करने वालों का सपना रहा है। कार्ल डेइसेरोथ, पीटर हेगेमैन और जॉर्ज नागेल को फिजियोलॉजी या मेडिसिन में 2026 का नोबेल पुरस्कार दिया गया है। उन्हें यह पुरस्कार ऑप्टोजेनेटिक्स से जुड़ी खोजों के लिए मिला है, जिससे जीवित दिमाग में अलग-अलग नर्व सेल्स की एक्टिविटी को चालू या बंद करना मुमकिन हो गया है। इस तरीके का इस्तेमाल अब दुनिया भर की लैबोरेटरी में दिमाग के रहस्यों को जानने के लिए किया जा रहा है।"

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