अगर कोई मुख्यमंत्री विदेश जाना चाहे तो क्या केंद्र रोक सकता है? परमिशन से इनकार तक यह हैं सारे नियम
तेलंगाना के सीएम रेवंत रेड्डी का अमेरिकी दौरा रद होने के बाद यह सवाल उठा है कि मुख्यमंत्रियों को विदेश जाने से रोका जा सकता है?

तस्वीर का इस्तेमाल प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (एआई द्वारा निर्मित फोटो।)
HighLights
मुख्यमंत्री की विदेश यात्रा को लेकर क्या हैं नियम?
राजनीतिक मंजूरी क्यों है जरूरी?
सीएम को विदेश जाने के लिए किसकी लेनी होती है अनुमति?
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। तेलंगाना के सीएम रेवंत रेड्डी को केंद्र की अनुमति नहीं मिलने से अमेरिकी दौरा रद करना पड़ा। वह ब्रिटेन की तीन दिनों की यात्रा करके वापस भारत आ गए हैं। रेड्डी 20 अगस्त को ब्रिटेन रवाना हुए थे और वहीं से अमेरिका जाने का कार्यक्रम था। रेड्डी के मामले में विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका में प्रस्तावित कार्यक्रम सीएम के पद के अनुरूप नहीं था।
इस बारे में पूछने पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने आधिकारिक ब्रीफिंग में साफ कहा, 'मुख्यमंत्रियों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों के दौरे का आकलन मंत्रालय राजनीतिक मंजूरी देने के लिए करता है। ऐसे मामलों में प्रस्तावित कार्यक्रम पद और दौरे के उद्देश्य के अनुरूप होना चाहिए। इस खास मामले में अमेरिका के संबंध में ऐसा नहीं था, इसलिए मंजूरी नहीं दी गई। हालांकि उनका यूके दौरा मंजूर किया गया है।'
ऐसे में सवाल उठे हैं कि सीएम को विदेश जाने से क्यों रोका जा सकता है। जानते हैं क्या है प्रक्रिया...
सीएम के विदेश दौरे के लिए किसकी अनुमति चाहिए?
सीएम और राज्य मंत्री को सरकारी या निजी विदेश यात्रा की सूचना कैबिनेट सचिवालय को देनी होती है। विदेश मंत्रालय की राजनीतिक मंजूरी लेनी होती है। आवेदन ई-पॉलिटिकल क्लीयरेंस पोर्टल पर करना होता है।
राजनीतिक मंजूरी क्यों है जरूरी?
यह विदेश मंत्रालय की वह स्वीकृति है, जिससे तय किया जाता है कि किसी संवैधानिक पदाधिकारी की यात्रा भारत की विदेश नीति, सुरक्षा, कूटनीतिक प्रोटोकॉल और राष्ट्रीय हितों के खिलाफ न जाए। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के अनुसार, सीएम और अन्य मंत्रियों के कार्यक्रम का आकलन उनके पद तथा यात्रा के उद्देश्य के आधार पर किया जाता है।
केंद्र किन आधारों पर मंजूरी देता या रोक सकता है?
बुलाने वाली संस्था का रिकॉर्ड, बैठकों का स्तर, यात्रा का मकसद, प्रतिनिधिमंडल, मेजबान देश से भारत के संबंध और सुरक्षा-प्रोटोकॉल देखे जाते हैं।
केंद्रीय मंत्रियों, सांसदों के लिए क्या प्रक्रिया है?
केंद्रीय मंत्री को पहले विदेश मंत्रालय से राजनीतिक मंजूरी, फिर पीएम की अनुमति। सांसदों के मामले में विदेश मंत्रालय, गृह मंत्रालय से एफसीआरए की मंजूरी लेनी होती है। इसके लिए 15 दिन पहले आवेदन जरूरी।
क्या पहले भी सीएम के विदेश दौरे रोके गए?
अरविंद केजरीवालः 2019 में कोपेनहेगन क्लाइमेट समिट और 2022 में सिंगापुर वर्ल्ड सिटीज समिट में जाने की मंजूरी नहीं मिली।
ममता बनर्जीः 2018 में चीन, 2021 में रोम की शांति वार्ता के लिए रोका गया।
तरुण गोगोई (2012) व अर्जुन मुंडा (2011): अमेरिका व थाईलैंड दौरे की अनुमति खारिज की गई।
यह भी पढ़ें: अकेले नहीं हैं रेवंत रेड्डी... ममता से केजरीवाल तक, इन मुख्यमंत्रियों को भी नहीं मिली थी विदेश यात्रा की अनुमति
