सिकंदराबाद मिलिट्री हथियार चोरी: पूर्व हवलदार ने कैसे उड़ाए थे सेना के हथियार, पुलिस ने किया खुलासा
बोलारम में मद्रास रेजिमेंट की आर्मरी से पूर्व हवलदार यू. मल्लेश ने मोबाइल फोन की टॉर्च की रोशनी में चोरी की थी।

तस्वीर का इस्तेमाल प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (एआई द्वारा निर्मित फोटो।)
डिजिटल डेस्क, हैदराबाद। बोलारम में मद्रास रेजिमेंट की बेहद सुरक्षित आर्मरी में चोरी के मामले में नया खुलासा हुआ है। पुलिस का कहना है कि मामले में गिरफ्तार किए गए पूर्व हवलदार यू. मल्लेश ने मोबाइल फोन की टॉर्च की रोशनी में ये चोरी की।
मोबाइल फोन की टॉर्च की मदद से 37 साल के इस पूर्व फौजी ने अंधेरे में आर्मरी के आस-पास झाड़ियों के बीच रास्ता बनाया और खास हथियार व गोला-बारूद की पहचान की। रात के समय मद्रास रेजिमेंट का निचला स्टाफ आम तौर पर मेन पावर सप्लाई बंद कर देता था, जिससे सीसीटीवी और दूसरी सेवाएं बंद हो जाती थीं और पूरा इलाका अंधेरे में डूब जाता था।
'शराब के नशे में दिया वारदात को अंजाम'
एक जांच अधिकारी ने बताया, “वहां रात में अक्सर बहुत अंधेरा होता है। इस बात की पूरी जानकारी होने के कारण वह अपने साथ मोबाइल फोन ले गया था ताकि उसका इस्तेमाल रोशनी के लिए कर सके। पूछताछ के दौरान जब मल्लेश से पूछा गया कि क्या उसे अपराध करते समय डर नहीं लगा तो आरोपी ने कथित तौर पर कहा कि शराब के नशे में होने के कारण उसमें हथियार चुराने की हिम्मत आ गई थी।”
बता दें कि किसी भी समय दो गार्ड पहरेदारी की ड्यूटी पर होते थे। एक गार्ड एक ही जगह पर तैनात रहता था, जबकि दूसरा शस्त्रागार के चारों ओर चक्कर लगाता था। पुलिस का दावा है कि गोला-बारूद वाले कमरे में चोरी करने में लगभग डेढ़ घंटे का समय लगा। गश्त कर रहे गार्ड की नजर से बचने के लिए मल्लेश झाड़ियों में छिपकर आगे बढ़ा।
पुलिस मल्लेश तक कैसे पहुंची?
आर्मरी (हथियार रखने की जगह) तक पहुंच रखने वाले लोगों (चाहे वे अभी काम कर रहे हों या रिटायर हो चुके हों) की पहचान करते हुए अधिकारी नागरकुर्नूल में मल्लेश तक भी पहुंचे। उससे पूछताछ की गई और उसके फोन की भी जांच की गई। मल्लेश से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस को कोई शक नहीं हुआ और वे यह कहकर लौट आए कि जरूरत पड़ने पर उसे उपलब्ध रहना होगा।
एक संयुक्त ऑपरेशन में तेलंगाना पुलिस और मिलिट्री इंटेलिजेंस (MI) की सदर्न कमांड लाइजन यूनिट के अधिकारियों की टीम ने दो हफ्ते से भी कम समय में इस हाई-प्रोफाइल मामले को सुलझा लिया।
अलग-अलग जगहों से आए एमआई अधिकारियों ने तेलंगाना पुलिस के साथ मिलकर काम किया और जांचकर्ताओं को अहम सुराग जोड़ने और आखिरकार केस सुलझाने में मदद की। दूसरी ओर, टास्क फोर्स के अधिकारियों को मल्लेश की भूमिका पर शक होने लगा था।
पता चला है कि हैदराबाद पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने नागरकुर्नूल में अपने समकक्षों के साथ मिलकर एक टीम बनाई और मल्लेश पर नजर रखी। उसकी गतिविधियों को संदिग्ध पाए जाने के बाद टास्क फोर्स पुलिस उससे पूछताछ करना चाहती थी।
हालांकि, वह उनसे बचने लगा और जांचकर्ताओं से मिलने के लिए हैदराबाद आना बंद कर दिया। उसके सहयोग न करने पर पुलिस ने उसके परिवार के सदस्यों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। उन्हें बुलाकर पूछताछ की गई। आखिरकार, परिवार वालों के आमना-सामना करने पर मल्लेष मान गया और उसने कथित तौर पर हथियार चुराने की बात कबूल कर ली।
अपने घर के पास छिपाए थे हथियार
बाद में उसे पुलिस के सामने लाया गया। उसने बताया कि अपराध कैसे किया गया और वह जगह भी दिखाई जहां उसने नागरकुरनूल जिले के जंगमरेड्डी पल्ली में अपने घर के पास हथियार छिपाए थे।
शुक्रवार को मल्लेष को न्यायिक हिरासत में भेजते समय बोलारम पुलिस ने मामले में बदलाव किया। उन्होंने एफआईआर दर्ज करते समय लगे चोरी के आरोप के साथ-साथ आर्म्स एक्ट की धाराएं भी जोड़ दीं।
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