खरगे के बयान पर भड़के शिवराज सिंह, बोले- पीएम मोदी, अमित शाह को अवैध कहना जनादेश का अपमान
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को अवैध कहे जाने पर पलटवार किया।

पीएम मोदी, अमित शाह को अवैध कहना जनादेश का अपमान : शिवराज (फाइल फोटो)
HighLights
खरगे के बयान को 140 करोड़ भारतीयों की लोकतांत्रिक समझ का अनादर बताया
नकारे जाने पर कांग्रेस लोकतंत्र, ईवीएम और चुनाव आयोग को बदनाम करती है
पीटीआई, नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को अवैध कहे जाने पर पलटवार किया।
कहा कि यह टिप्पणी संवैधानिक संस्थाओं और लोगों के जनादेश का अपमान है। नेता विपक्ष राहुल गांधी के कहने पर मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा दिया गया बयान उनकी हताशा, हार की मानसिकता और संवैधानिक संस्थाओं पर हमला करने की कांग्रेस की पुरानी आदत का एक और उदाहरण है।
वरिष्ठ भाजपा नेता ने एक बयान में इसे 140 करोड़ भारतीयों की "लोकतांत्रिक समझ" का अपमान बताया। उन्होंने कांग्रेस पर संविधान का अनादर करने का भी आरोप लगाया।
कहा कि जब भी देश की जनता चुनावों में कांग्रेस पार्टी को नकारती है, तो वह लोकतंत्र, चुनाव आयोग, ईवीएम और जनता के जनादेश को बदनाम करने की साजिशें रचने लगती है।
चौहान ने कहा कि देश की जनता द्वारा पूर्ण बहुमत और रिकार्ड जनादेश के साथ चुने गए प्रधानमंत्री को अवैध कहना कांग्रेस पार्टी के अहंकार और लोकतांत्रिक व्यवस्था में उसके अविश्वास को दर्शाता है। क्या कांग्रेस की नजर में लोकतंत्र तभी वैध होता है, जब गांधी परिवार या खुद वह सत्ता में हो?
भाजपा नेता ने जोर देकर कहा कि देश का लोकतंत्र बाबा साहेब आंबेडकर द्वारा दिए गए संविधान की मजबूत नींव पर टिका है। लोग ऐसे झूठे और बेबुनियाद बयानों का लोकतांत्रिक तरीके से बार-बार जवाब देते रहेंगे।
क्यों हमारी बेटियों को ऐसे नारे लगाने पड़ते हैं
एएनआई के अनुसार, शिवराज सिंह चौहान ने दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान लगाए गए नारों पर चिंता जताई। उन्होंने सवाल किया कि अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित बेटियों को ऐसे नारे लगाने के लिए क्यों मजबूर होना पड़ा?
विरोध प्रदर्शनों के प्रसारित वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए चौहान ने "एक कचौड़ी-दो समोसा, इन मर्दों का क्या भरोसा" जैसे नारों का जिक्र किया और कहा कि इस स्थिति पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।
