विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

'SIR से 10 करोड़ नागरिक वोटिंग अधिकार से होंगे वंचित', पूर्व राजनयिक नवदीप सूरी के पोस्ट पर चिदंबरम का दावा

Updated: Mon, 24 Aug 2026 02:54 PM (IST)

पी. चिदंबरम ने दावा किया है कि चुनाव आयोग के विशेष गहन संशोधन (SIR) अभियान से देश के लगभग 10 करोड़ लोग मतदान के अधिकार से वंचित हो सकते हैं।

SIR प्रक्रिया को लेकर पी. चिदंबरम का बड़ा दावा (फाइल फोटो-  PTI)

SIR प्रक्रिया को लेकर पी. चिदंबरम का बड़ा दावा (फाइल फोटो- PTI)

HighLights

  1. चिदंबरम ने SIR से 10 करोड़ लोगों के वंचित होने का दावा किया

  2. पूर्व राजदूत नवदीप सूरी ने नागरिकता साबित करने में दिक्कतें बताईं

  3. चुनाव आयोग पर 'गैर-मतदाता नागरिकों' की नई श्रेणी बनाने का आरोप

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय निर्वाचन आयोग द्वारा चलाए जा रहे विशेष गहन संशोधन (SIR) अभियान को कांग्रेस के सीनियर नेता पी. चिदंबरम का विवादित बयान सामने आया है। पी. चिदंबरम ने दावा किया है कि SIR प्रक्रिया के चलते देश की लगभग 10% आबादी- यानी करीब 10 करोड़ लोग वोट देने के अधिकार से वंचित हो सकते हैं।

दरअसल, कांग्रेस नेता का यह बयान ऐसे समय में आजा है जब मिस्र और यूएई में भारत के पूर्व राजदूत नवदीप सूरी ने पंजाब में इस प्रक्रिया के दौरान नागरिकता साबित करने में आ रही व्यावहारिक दिक्कतों को उजागर किया।

क्या कहा था पूर्व राजनयिक ने?

पूर्व राजनयिक सूरी के अनुसार, "अधिकारियों ने बाद में उनसे नागरिकता के प्रमाण के रूप में अपना पासपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा। मैंने बीएलओ से बात की, मुझे बताया गया कि मुझे आकर नोटिस लेना होगा। और फिर कुछ ऐसे दस्तावेज लेकर आना होगा जो यह साबित करते हों कि मैं भारतीय नागरिक हूं। मेरे पास वोटर आईडी और आधार कार्ड के अलावा अन्य दस्तावेज भी हैं।

लेकिन मैं यह पूछे बिना नहीं रह सकता- अगर तीन देशों में भारत का प्रतिनिधित्व करने के बाद भी मुझे अपनी नागरिकता साबित करने में परेशानी हो रही है, तो आम नागरिक का क्या हाल होगा? शायद जीवन की सुगमता ही खतरे में होगी।"

10% नागरिकों के पास नहीं होगा मतदान का अधिकार- पी. चिंदबरम

वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी. चिंदबरम ने सूरी की पोस्ट का जिक्र करते हुए कहा, "अब तक के परिणामों के आधार पर, SIR प्रक्रिया के अंत में भारत की 10% वयस्क आबादी 'नागरिक' तो रहेगी, लेकिन चुनाव आयोग की इस व्यवस्था के कारण उनके पास मतदान का अधिकार नहीं होगा।

यह संख्या लगभग 10 करोड़ लोगों की है। चुनाव आयोग ने एक तरह से 'गैर-मतदाता नागरिकों' की एक नई श्रेणी ही तैयार कर दी है।"