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कैंसर रिसर्च में फर्जीवाड़ा: 4 हजार से ज्यादा मेडिकल रिसर्च पेपर्स निकले फर्जी, खतरे में लाखों जानें

Published: Sat, 17 Oct 2026 02:00 AM (IST)

कैंसर से संबंधित शोध पत्रों के विश्लेषण से एक चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। एक अध्ययन में 33,159 शोध ...और पढ़ें

कैंसर शोध के चार हजार से ज्यादा लेखों में फर्जीवाड़ा का खेल उजागर

कैंसर शोध के चार हजार से ज्यादा लेखों में फर्जीवाड़ा का खेल उजागर

HighLights

  1. विश्लेषण में फर्जी उद्धरण दिए जाने के मिले हैं संकेत

  2. अध्ययन में 33,159 शोध पत्रों का किया गया विश्लेषण

पीटीआई, नई दिल्ली। कैंसर से संबंधित शोध पत्रों के विश्लेषण से एक चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। एक अध्ययन में 33,159 शोध पत्रों के विश्लेषण में चार हजार से ज्यादा लेखों में फर्जी उद्धरण के स्पष्ट संकेत मिले हैं।

इन लेखों के पीछे 'पेपर मिल' यानी फर्जी शोध संगठनों के होने का अंदेशा है। प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी आफ साइंसेज पत्रिका में अध्ययन के नतीजों को प्रकाशित किया गया है।

इसके अनुसार, संदिग्ध शोध पत्रों को प्रकाशित होने के एक से तीन साल के भीतर अन्य लेखों की तुलना में 50 से 100 प्रतिशत अधिक उद्धरण मिले। जबकि इन्हें पढ़ने वालों की संख्या कम थी और इन्हें ऑनलाइन भी कम बार देखा गया।

शोधकर्ताओं ने कहा कि संदिग्ध शोध पत्र कुछ चुनिंदा पत्रिकाओं में अधिक संख्या में पाए गए। इनमें जर्नल आफ एक्सपेरिमेंटल एंड क्लिनिकल कैंसर रिसर्च और मालिक्युलर कैंसर शामिल हैं, जबकि अन्य पत्रिकाओं पर इसका असर बहुत कम था।

उन्होंने कहा कि फर्जी शोध पत्र तैयार करने वाले संगठन फर्जी शोध पत्रों में लोगों के नाम शामिल करने के बदले पैसे वसूलते हैं। ये संगठन उद्धरणों की संख्या में भी हेरफेर कर सकते हैं, जो अकादमिक प्रदर्शन को मापने का एक प्रमुख पैमाना है।

ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलाजी के ऑस्ट्रेलियन सेंटर फार हेल्थ सर्विसेज इनोवेशन के लेखक एड्रियन बार्नेट ने कहा कि शोधकर्ताओं ने ऐसे पैटर्न का पता लगाया है, जो फर्जी शोध पत्र तैयार करने वाले संगठनों द्वारा उद्धरणों की संख्या में व्यापक हेरफेर की ओर संकेत करते हैं।