GST रजिस्ट्रेशन में बड़े बदलाव की तैयारी, एक फार्म से पूरे देश में कर सकेंगे कारोबार; पूरी डिटेल
जीएसटी काउंसिल 7 अक्टूबर को एक नए और आसान जीएसटी पंजीकरण फॉर्म पर विचार करेगी, जिससे कंपनियां एक ही रजिस्ट्रेशन से कई राज्यों में कारोबार कर सकेंगी।

एक रजिस्ट्रेशन से कई राज्यों में कारोबार संभव होगा

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। जल्द ही कंपनियां एक रजिस्ट्रेशन से कई राज्यों में कारोबार कर सकेंगी। कारोबार को आसान बनाने के मकसद से काउंसिल अपनी सात अक्टूबर की बैठक में बड़ी कंपनियों के लिए एक नई डिजाइन वाले और आसान जीएसटी पंजीकरण फार्म पर विचार-विमर्श कर सकती है। अभी जीएसटी के तहत 1.68 करोड़ से ज्यादा कंपनियां पंजीकृत हैं।
नया पंजीकरण फार्म भरना आसान होगा और सभी चरण पर गाइडेंस भी मिलेगा। इसके अलावा फार्म में उन दस्तावेजों की भी सूची होगी, जिन्हें अपलोड करना होगा। सूत्रों का कहना है कि एक बार नया डिजाइन किया गया रजिस्ट्रेशन सिस्टम शुरू हो जाने के बाद कंपनियों द्वारा दिया गया विवरण दूसरे राज्यों में रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन करते समय भी इस्तेमाल की जाएंगी।
अगर कंपनी कई राज्यों में रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन करती है तो आवेदन फार्म एक साथ भरा जा सकता है। सूत्रों का कहना है कि जीएसटी प्रणाली यह तय करेगी कि फार्म भरते समय दी गई लोकेशन के आधार पर किस आफिस का अधिकार क्षेत्र है।
जीएसटी काउंसिल ने अपनी सितंबर 2025 की बैठक में छोटे और कम जोखिम वाले बिजनेस के लिए एक आसान जीएसटी पंजीकरण स्कीम को मंजूरी दी थी और इसे 1 नवंबर, 2025 से शुरू किया गया था। इस स्कीम के तहत, ऐसे बिजनेस को तीन दिनों के अंदर रजिस्ट्रेशन दिया जाता है।
विदेश स्थित शाखाओं से प्रदत्त सेवाओं को निर्यात का दर्जा देने पर विचार
जीएसटी परिषद की सात अक्टूबर को होने वाली बैठक में भारतीय कंपनियों की विदेश स्थित शाखाओं के जरिये दी जाने वाली सेवाओं को भी निर्यात का दर्जा देने के प्रस्ताव पर चर्चा होने की संभावना है।
इस प्रस्ताव का मकसद निर्यात की परिभाषा को विदेशी मुद्रा अर्जित करने वाली कारोबारी गतिविधियों के अनुरूप करना और विदेश स्थित शाखाओं के जरिये दी जाने वाली सेवाओं के निर्यात दर्जे को लेकर अस्पष्ट स्थिति को दूर करना है।
कर अधिकारियों की समितियों का पुनर्गठन कर सकती है जीएसटी परिषद
जीएसटी लागू होने के नौ साल बाद जीएसटी परिषद अपने कर अधिकारियों की समितियों के पुनर्गठन पर विचार कर सकती है। इसका मकसद अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था के परिपक्व होने के साथ ही इन्हें अधिक सरल और प्रभावी बनाना है।
परिषद के कामकाज में सहयोग देने वाली समितियां के ढांचे को तीन समेकित निकायों-सचिवालय, कार्यान्वयन समिति और अधिकारियों की एक स्थायी समिति में पुनर्गठित करने का प्रस्ताव है।
इस समय जीएसटी कर अधिकारियों की व्यवस्था में सचिवालय, एक कार्यान्वयन समिति, फिटमेंट और कानून समिति सहित आठ स्थायी समितियां और 18 क्षेत्रीय समूह शामिल हैं।
(न्यूज एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
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