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अमेरिका में कैसे दिया जाता है चुनावी चंदा, भारत से कितना अलग है सिस्टम? हर सवाल का जवाब

Updated: Mon, 24 Aug 2026 01:10 PM (IST)

अमेरिका में मिड टर्म चुनावों से पहले कॉर्पोरेट चंदा रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जिसमें क्रिप्टो, एआई और ऑनलाइन बेटिंग कंपनियां नए किंगमेकर बनकर उभरी हैं।

तस्वीर का इस्तेमाल प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (एआई द्वारा निर्मित फोटो।)

तस्वीर का इस्तेमाल प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (एआई द्वारा निर्मित फोटो।)

HighLights

  1. अमेरिका में कॉर्पोरेट चंदा रिकॉर्ड स्तर पर, नए किंगमेकर उभरे।

  2. क्रिप्टो, एआई, ऑनलाइन बेटिंग कंपनियों ने दिया भारी चंदा।

  3. अमेरिकी चुनावी चंदा प्रणाली भारत से काफी अलग है।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका में 3 नवंबर को मिड टर्म इलेक्शन होने हैं। उससे पहले ही कॉरपोरेट चंदे की लड़ाई चरम पर है और यह रिकॉर्ड तोड़ चुकी है। इस बार वॉल स्ट्रीट, तेल और फार्मा जैसे पुराने चुनावी फंडर नहीं बल्कि क्रिप्टो, एआई और ऑनलाइन बेटिंग कंपनियां नई किंगमेकर बनकर उभरी हैं।

जनवरी 2025 से लेकर मार्च 2026 तक इन सेक्टरों की कंपनियों ने 2800 करोड़ रुपये का चुनावी चंदा दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स की अगर मानें तो इसमें से 63 प्रतिशत यानी कि 1764 करोड़ रुपये अकेले ट्रंप की पार्टी रिपब्लिकन या उससे जुड़े नेताओं को मिला है।

क्रिप्टो ने बदली कहानी

2010 से 2024 तक मिली कॉरपोरेट फंडिंग की स्टडी में सामने आया है कि 69 प्रतिशत कॉरपोरेट का पैसा रिपब्लिकन सपोर्टर ग्रुप्स और 16 प्रतिशत डेमोक्रेट समर्थक समूहों की ओर गया था लेकिन इस बार क्रिप्टो ने पूरी कहानी बदल दी। क्रिप्टो ने इस परंपरा को बदलकर किसी एक पार्टी की जगह अपने समर्थक उम्मीदवार चुने। अब एआई और बेटिंग इंडस्ट्री भी यही मॉडल अपना रहे हैं।

अमेरिकी चुनावी चंदा सिस्टम कैसे करता है काम? समझें

क्या अमेरिका में कंपनियां सीधे उम्मीदवार को चंदा दे सकती हैं?

यूएस में कंपनियां सीधे उम्मीदवार या पार्टी को सीधे चुनावी चंदा नहीं दे सकतीं। सिर्फ तय सीमा तक ही उम्मीदवार को पैसा दिया जा सकता है। कंपनियां आम तौर पर पीएसी और सुपर पीएसी के जरिए राजनीति में पैसा लगाती हैं।

कितना चंदा दिया जा सकता है?

किसी संघीय उम्मीदवार को एक व्यक्ति 3500 डॉलर (335,000 रुपये) तक दे सकता है।

पीएसी क्या होता है?

पीएसी का मतलब पॉलिटिकल एक्शन कमेटी है। सामान्य कॉरपोरेट पीएसी कर्मचारियों और शेयरधारकों से पैसा जुटाकर तय सीमा में उम्मीदवारों को दे सकता है।

सुपर पीएसी क्या होता है?

यह कंपनियों, अरबपतियों और संगठनों से असीमित पैसा ले सकता है। यह किसी उम्मीदवार को सीधे पैसा नहीं देता लेकिन उसके समर्थन या विरोध में असीमित खर्चा कर सकता है।

डार्क मनी क्या है?

राजनीतिक गतिविधियों के लिए कुछ एनजीओ संगठनों के जरिए पैसा आता है लेकिन यह पैसा किसने दिया है उसे सार्वजनिक नहीं किया जाता है। इसलिए चंदे में दी जाने वाली रकम कहीं ज्यादा हो सकती है।

भारत में क्या सिस्टम है?

भारत में सुपर पीएसी जैसी कोई अलग संस्था नहीं है। कंपनियां राजनीतिक दलों को सीधे या इलेक्ट्रोरल ट्रस्ट के जरिए चंदा दे सकती हैं। भारत में ट्रस्ट पार्टियों को पैसा देता है, जबकि अमेरिका में सुपर पीएसी खुद उम्मीदवार के पक्ष या विपक्ष में प्रचार के लिए पैसा खर्च करता है।

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