सुलझ जाएगा भारत-चीन सीमा विवाद, बीजिंग में डोभाल की एंट्री; एजेंडे में और क्या?
भारत और चीन के बीच सीमा विवाद सुलझाने के लिए बीजिंग में एनएसए अजीत डोभाल और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बीच 25वें दौर की विशेष प्रतिनिधि वार्ता हो रही है।

बीजिंग में भारत-चीन सीमा विवाद पर 25वीं दौर की वार्ता

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद को सुलझाने की दिशा में मंगलवार को एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच विशेष प्रतिनिधि स्तर की 25वीं दौर की वार्ता बीजिंग में आयोजित होगी।
कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार यह बैठक दोनों देशों के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर विवाद सुलझाने की प्रक्रिया को नई गति दे सकती है।
भारत-चीन सीमा पर शांति बहाली की तैयारी
कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, पिछले साल दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधियों की बैठक में इस बात पर चर्चा हुई थी कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के उन हिस्सों को पहले मान्यता देने की तरफ बढ़ा जाए, जहां दोनों पक्षों के बीच कोई विवाद नहीं है।
यह एलएसी का मध्य क्षेत्र (हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड से सटे तिब्बत सीमावर्ती हिस्से) हो सकता है जिसे अपेक्षाकृत कम विवादास्पद माना जाता है। तकरीबन 545 किलोमीटर इस हिस्से पर स्थिति ज्यादातर शांतिपूर्ण रही है।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के पोलित ब्यूरो सदस्य और विदेश मंत्री श्री वांग यी के निमंत्रण पर भारत-चीन सीमा प्रश्न पर भारत के विशेष प्रतिनिधि एनएसए श्री अजीत डोवाल सोमवार दोपहर बीजिंग पहुंचे।
वे दो दिवसीय यात्रा पर हैं। 25 अगस्त को दोनों विशेष प्रतिनिधि भारत-चीन सीमा प्रश्न पर 25वें दौर की वार्ता करेंगे। यात्रा के दौरान एनएसए चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग से भी मुलाकात करेंगे।
बरसो पुराना है भारत-चीन बॉर्डर विवाद
भारत और चीन के बीच सीमा विवाद दशकों पुराना है। पूर्वी लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश से सटे क्षेत्रों में दोनों पक्षों के बीच गंभीर मतभेद हैं। इन इलाकों में सैनिक तैनाती, गश्त और बुनियादी ढांचे के विकास को लेकर समय-समय पर विवाद उभरते रहे हैं।
2020 में गलवान घाटी की घटना के बाद दोनों देशों के बीच संबंधों में काफी खटास आई थी और सैन्य कमांडर व कूटनीतिक स्तर पर कई स्तरों की बातचीत के बाद हालात को सामान्य बनाने की कोशिश चल ही रही है।
कूटनीतिक सूत्रों के मुताबिक पिछले वर्ष 2025 में दोनों देशों की 24वीं विशेष प्रतिनिधि वार्ता में एक विशेषज्ञ समूह बनाने पर सहमति बनी थी। यह समूह उन इलाकों में जल्दी समझौते (अर्ली हार्वेस्ट) की संभावना देखेगा जहां विवाद कम है।
भारत क्या चाहता है?
भारत चाहता था कि पूरे मध्य क्षेत्र (हिमाचल-उत्तराखंड) को सिक्किम के साथ शामिल किया जाए, क्योंकि यहां मतभेद बहुत कम हैं। इस लिहाज से पिछले साल की बैठक काफी सकारात्मक रही थी।
वार्ता का फोकस ही उन इलाकों को स्थायी सीमा घोषित करने पर था, जहां कोई विवाद नहीं है। एसआर स्तर की बातचीत वर्ष 2003 से ही चल रही है। कई स्तरों की वार्ता के बावजूद सीमा विवाद सुलझाने की दिशा में कोई खास प्रगति नहीं हुई थी।
उक्त सूत्रों का कहना है कि यदि अब विवादित क्षेत्रों में भी कुछ ठोस प्रगति होती है तो यह दोनों एशियाई दिग्गजों के संबंधों में नया अध्याय खोल सकता है।
भारत दौरे पर आने वाले हैं चिनफिंग ?
यह बैठक तब हो रही है जब कुछ ही दिनों बाद चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग भारत के दौरे पर आने वाले हैं। 12-13 सितंबर, 2026 को नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए चिनफिंग के आने की संभावना है।
उनकी पीएम नरेन्द्र मोदी के साथ भी द्विपक्षीय वार्ता होगी। मोदी और चिनफिंग के बीच अंतिम द्विपक्षीय वार्ता अगस्त, 2025 में चीन (तियांजिन) में हुई थी। तब पीएम मोदा ने भारत का यह पक्ष मजबूती से रखा था कि दोनों देशों की सीमा पर अमन व शांति स्थापित किये बगैर द्विपक्षीय संबंधों में सामान्य नहीं बनाया जा सकता।
