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सर्दी से पहले कोयला हो जाएगा महंगा? बढ़ती बिजली मांग के बीच बना मुख्य सहारा

Published: Mon, 05 Oct 2026 10:24 PM (IST)

बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने में कोयला आधारित ताप संयंत्रों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जबकि कमजोर मानसून और उच्च तापमान ने ग्रिड पर दबाव बढ़ाया है।

बिजली की मांग में रिकॉर्ड वृद्धि हुई तो कोयला बना सहारा

बिजली की मांग में रिकॉर्ड वृद्धि हुई तो कोयला बना सहारा

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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में देश की बिजली मांग तेज रही और उसकी पूर्ति मुख्य रूप से कोयला आधारित ताप संयंत्रों से हुई। सौर और पवन उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज हुई है, लेकिन बिजली की रिकार्ड मांग के दौर में ताप बिजली संयंत्रों की अहमियत बढ़ती जा रही है।

कमजोर मानसून और ऊंचे तापमान ने कूलिंग व सिंचाई की मांग बढ़ा दी, जिससे ग्रिड पर दबाव बना हुआ है। लगातार दो महीने अगस्त व सितंबर में बिजली की मांग में रिकार्ड वृद्धि हुई है।

कमजोर मानसून ने बिजली ग्रिड पर दबाव बढ़ाया

अप्रैल से अगस्त तक बिजली मांग पिछले साल की समान अवधि की तुलना में करीब 9.5 फीसद बढ़ी है। पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में वृद्धि महज 0.3 प्रतिशत रही थी।

अगस्त में मांग 12.8 प्रतिशत बढ़कर करीब 169 अरब यूनिट पहुंच गई, जो किसी भी अगस्त का अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। पीक डिमांड 258 गीगावाट रही। सितंबर में भी राहत नहीं मिली।

महीने की शुरुआत में खपत 20 फीसद तक बढ़ी और 10 सितंबर को पीक डिमांड 269 गीगावाट छू गई, जो सितंबर का रिकार्ड है।

पूरे महीने मांग में अनुमानित वृद्धि करीब 11 प्रतिशत रही। केंद्रीय बिजली आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक शाम के घंटों में कई दिन 2 गीगावाट से अधिक की कमी रही और अधिकतम दैनिक कमी 7.7 गीगावाट तक पहुंची है। सरकार का कहना है कि बिजली की मांग का महज 0.6 फीसद कमी दर्ज की गई है जो सामान्य है।

कोल इंडिया ने बिजली क्षेत्र को कोयले की आपूर्ति में वृद्धि की

ताप बिजली संयंत्रों ने इस बढ़ोतरी का बड़ा हिस्सा संभाला है। कोल इंडिया के अनुसार, अप्रैल-सितंबर में घरेलू कोयले पर आधारित बिजली उत्पादन 582.5 अरब यूनिट से बढ़कर 640.05 अरब यूनिट हो गया।

यह करीब 10 फीसद की वृद्धि है। अगस्त में कुल बिजली उत्पादन में ताप बिजली संयंत्रों की हिस्सेदारी करीब 63 फीसद रही है। इसी अवधि में कोल इंडिया की आपूर्ति भी मजबूत रही।

पहली छमाही में कुल आफटेक 38.42 करोड़ टन रहा, जो पिछले साल से 7.6 फसीद अधिक है। बिजली क्षेत्र को 30.28 करोड़ टन कोयला भेजा गया, 6.1 फीसद ज्यादा। यह कुल आफटेक का करीब 79 फीसद है।

बिजली की मांग के अनुमान के आधार पर सितंबर में बिजली संयंत्रों को आपूर्ति 10.6 फीसद ज्यादा कोयला दिया गया है। एक तरह से रोजाना 17 लाख टन कोयला की आपूर्ति की जा रही है।

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