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कनाडा में प्रस्तावित खालिस्तानी जनमत संग्रह पर भारत सख्त, विदेश मंत्रालय ने जताई कड़ी आपत्ति

Published: Sat, 10 Oct 2026 05:34 AM (GMT+05:30)Updated: Sat, 10 Oct 2026 07:09 AM (GMT+05:30)

कनाडा में प्रस्तावित तथाकथित खालिस्तान जनमत संग्रह को लेकर भारत ने कड़ा रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर ...और पढ़ें

कनाडा में प्रस्तावित खालिस्तानी जनमत संग्रह पर विदेश मंत्रालय ने जताई कड़ी आपत्ति

कनाडा में प्रस्तावित खालिस्तानी जनमत संग्रह पर विदेश मंत्रालय ने जताई कड़ी आपत्ति

HighLights

  1. विदेश मंत्रालय ने भारत विरोधी गतिविधियों की निंदा की

  2. रूसी सेना में फंसे भारतीयों की वापसी पर बातचीत जारी

पीटीआई, नई दिल्ली। कनाडा में प्रस्तावित तथाकथित खालिस्तान जनमत संग्रह को लेकर भारत ने कड़ा रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को कहा कि देश सभी भारत-विरोधी गतिविधियों की कड़ी निंदा करता है।

उनकी यह प्रतिक्रिया कनाडा के अल्बर्टा में 18 अक्टूबर को प्रतिबंधित संगठन सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) द्वारा कथित जनमत संग्रह आयोजित करने की योजना से जुड़ी खबरों के बीच आई है।

नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय की नियमित प्रेस वार्ता के दौरान जायसवाल ने भारत का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि देश ऐसी गतिविधियों की कड़ी निंदा करता है। हालांकि, उन्होंने प्रस्तावित कार्यक्रम के संबंध में विस्तृत जानकारी नहीं दी।

रिपोर्टों के अनुसार, एसएफजे के संस्थापक गुरपतवंत सिंह पन्नू ने खालिस्तान आर्मी और सिख होमलैंड सिक्योरिटी बल बनाने का विचार भी सामने रखा है। इससे संबंधित वीडियो में कनाडा में सिख युवकों को हथियारों के साथ प्रशिक्षण लेते दिखाए जाने के दावे किए गए हैं।

इन घटनाक्रमों को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंताएं जताई गई हैं। प्रेस वार्ता के दौरान रणधीर जायसवाल ने बताया कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार, करीब 259 भारतीय नागरिक रूसी सेना में भर्ती किए गए थे। इनमें से 139 लोगों की वापसी सुनिश्चित की जा चुकी है।

भारत रूसी अधिकारियों के साथ उन 69 भारतीयों के संबंध में बातचीत कर रहा है, जिनके रूसी सेना में होने की आशंका है। उनके ठिकाने और सुरक्षित वापसी के उपायों का पता लगाया जा रहा है।

जहाजों और नाविकों की सुरक्षा महत्वपूर्णः विदेश मंत्रालय

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि जहाजों और नाविकों की सुरक्षा के लिए गठित ‘ग्रुप आफ फ्रेंड्स आन सेफ्टी एंड सिक्योरिटी आफ शिपिंग एंड सीफेरर्स’ का उद्देश्य समुद्री हितधारकों के बीच सहयोग बढ़ाना है।

खाड़ी क्षेत्र और काला सागर में कमर्शियल जहाजों पर हमलों के बीच यह पहल महत्वपूर्ण है। संयुक्त राष्ट्र सैन्य पर्यवेक्षक समूह (यूएनएमओजीआईपी) पर उन्होंने कहा कि 1972 के शिमला समझौते के बाद यह समूह अपनी प्रासंगिकता खो चुका है।

भारत लंबे समय से यही रुख रखता आया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने सऊदी अरब में आम नागरिकों की सुविधाओं पर हुए हमलों की निंदा की। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं से कुछ व्यवधान पैदा हुए हैं, हालांकि पश्चिम एशिया के हवाई अड्डों पर हवाई यातायात जारी है।

भारत-बांग्लादेश व्यापार पर चर्चा

रणधीर जायसवाल ने बताया कि भारत और बांग्लादेश के बीच व्यापार से जुड़े मुद्दों पर संयुक्त कार्य समूह की बैठक नई दिल्ली में हुई। दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय व्यापार से संबंधित विषयों पर चर्चा की।

वहीं, भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (आइएमईसी) को लेकर भी बातचीत जारी है। बांग्लादेश के साथ गंगा जल बंटवारे पर जायसवाल ने कहा कि नदी और जल संबंधी सभी मुद्दों पर चर्चा संयुक्त नदी आयोग के दायरे में होती है। बांग्लादेश दिसंबर 2026 में मौजूदा समझौते की अवधि समाप्त होने से पहले नया समझौता या उसमें संशोधन चाहता है।