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केरल और कर्नाटक के बीच रेलवे को लेकर लड़ाई शुरू, एक फैसले ने दोनों राज्यों को कैसे कर दिया आमने-सामने?

Updated: Mon, 24 Aug 2026 05:48 PM (IST)

रेलवे बोर्ड के आदेश से मंगलुरु क्षेत्र को पलक्कड़ डिवीजन से मैसूरु डिवीजन में स्थानांतरित करने पर केरल और कर्नाटक के बीच विवाद छिड़ गया है।

रेलवे के एक फैसले से केरल और कर्नाटक आमने-सामने

रेलवे के एक फैसले से केरल और कर्नाटक आमने-सामने

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डिजिटल डेस्क, बेंगलुरु। रेलवे बोर्ड द्वारा 21 अगस्त को जारी एक आदेश ने केरल और कर्नाटक के बीच एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। इस आदेश के तहत 1 अक्टूबर से मंगलुरु क्षेत्र (उल्लाल तक) को दक्षिण रेलवे के पलक्कड़ डिवीजन से हटाकर दक्षिण पश्चिम रेलवे के मैसूरु डिवीजन में शामिल किया जाएगा।

इस फैसले के लागू होते ही दोनों रेलवे जोन के बीच का इंटरचेंज पॉइंट पैडिल से बदलकर उल्लाल हो जाएगा। इसके अलावा, थोकुर स्टेशन कोंकण रेलवे के नियंत्रण में ही रहेगा और यह कोंकण रेलवे और दक्षिण पश्चिम रेलवे के बीच नए इंटरचेंज पॉइंट के रूप में काम करेगा।

इस भौगोलिक और प्रशासनिक बदलाव ने केरल में व्यापक विरोध और कर्नाटक में संतोष की स्थिति पैदा कर दी है।

केरल का विरोध और वित्तीय चिंताएं

केरल के विपक्षी UDF के सांसदों, एम.के. राघवन, ई.टी. मोहम्मद बशीर और शफी परमबिल, ने एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस स्थानांतरण को अनुचित, एकतरफा और अस्वीकार्य करार दिया।

उन्होंने घोषणा की है कि वे इस फैसले के विरोध में तिरुवोणम के दिन पलक्कड़ डिवीजनल रेलवे मैनेजर के कार्यालय के सामने धरना और सत्याग्रह करेंगे।

केरल में भारी गुस्सा

केरल के सांसदों का कहना है कि मंगलुरु पोर्ट और उसके आसपास स्थित गुड्स यार्ड्स से होने वाली लगभग 1,000 करोड़ से 1,100 करोड़ रुपये की सालाना कमाई अब पलक्कड़ डिवीजन के हाथ से निकल जाएगी।

पलक्कड़ डिवीजन के कुल माल ढुलाई राजस्व का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा मंगलुरु क्षेत्र से ही आता है। न्यू मैंगलोर पोर्ट को सेवा देने वाले पनाम्बुर गुड्स यार्ड ने पिछले वित्तीय वर्ष में अकेले 625 करोड़ रुपये से अधिक का माल संभाला था।

इस क्षेत्र के जाने से पलक्कड़ डिवीजन की दैनिक कमाई, लगभग 2.75 करोड़ रुपये, और कुल राजस्व में 60 प्रतिशत तक की गिरावट आने का अनुमान है। ऐसे में बड़े राजस्व घाटे का अनुमान है।

विकास परियोजनाओं पर असर

भारतीय रेलवे डिवीजन का आकार, उसकी कुल आय और यात्री संख्या नए फंड के आवंटन, नई ट्रेनों की मंजूरी और नई रेल लाइनों के निर्माण के प्रमुख मानदंड होते हैं। आय घटने से मालाबार क्षेत्र और पूरे केरल के रेल विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका है।

सांसद शशि थरूर ने एक ऑनलाइन बैठक के बाद बताया कि यह निर्णय प्रभावित राज्य सरकार या स्थानीय जनप्रतिनिधियों से किसी भी प्रकार की औपचारिक बातचीत के बिना लिया गया है।

वहीं मुख्यमंत्री कार्यालय ने कहा है कि इस फैसले पर पुनर्विचार के लिए प्रधानमंत्री और रेल मंत्री को पत्र भेजे जाएंगे।

1 अक्टूबर के बाद पलक्कड़ डिवीजन केवल उल्लाल तक सिमट कर रह जाएगा, जिससे केरल में तिरुवनंतपुरम ही एकमात्र बड़ा डिवीजन बचेगा।

विवाद पर कर्नाटक का पक्ष

कर्नाटक के राजनीतिक और व्यापारिक प्रतिनिधियों ने रेलवे के इस कदम का स्वागत किया है। तटीक कर्नाटक की लंबे समय से यह शिकायत रही है कि उसकी रेल व्यवस्था सदर्न रेलवे, साउथ वेस्टर्न रेलवे और कोंकण रेलवे के बीच बंटी हुई थी।

मंगलुरु के सांसद बृजेश चौटा ने कहा कि मंगलुरु के रेलवे नेटवर्क को एक ही डिवीजन के तहत लाने के प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगा और विकास के कार्यों में भी तेजी आएगी।

दक्षिण कन्नड़ के पूर्व सांसद नलिन कुमार कतील और स्थानीय व्यापारिक संगठनों का तर्क रहा है कि मंगलुरु से भारी रेवेन्यू मिलने के बावजूद सदर्न रेलवे द्वारा तटीय कर्नाटक के स्थानीय इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ हमेशा उपेक्षा की गई।

राजनीतिक प्रतिक्रिया और कर्मचारियों की स्थिति

केरल बीजेपी के वरिष्ठ नेता पी.के. कृष्णदास ने कांग्रेस और वामपंथी दलों के विरोध को राजनीतिक से प्रेरित बताया। उन्होंने याद दिलाया कि 2007 में UPA सरकार के दौरान कोयंबटूर सेक्शन को पलक्कड़ से अलग करके सलेम डिवीजन बनाया गया था, तब वर्तमान विरोध करने वाले नेता मौन थे।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने कोझिकोड स्टेशन के आधुनिकीकरण सहित केरल के रेल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए रिकॉर्ड बजट स्वीकृत किया है और इस प्रशासनिक फेरबदल से यात्रियों की सेवाओं पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।

इस परिवर्तन के तहत, प्रभावित रेलवे कर्मचारियों को सदर्न रेलवे में बने रहने या साउथ वेस्टर्न रेलवे में शामिल होने का विकल्प दिया जाएगा, जहां उनकी वरिष्ठता सेवा अवधि के आधार पर तय की जाएगी।