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लद्दाख की संवैधानिक सुरक्षा पर गृह मंत्रालय का बड़ा कदम, LAB और KDA से मांगा ड्राफ्ट प्रस्ताव

Published: Mon, 14 Sep 2026 05:45 AM (IST)Updated: Mon, 14 Sep 2026 07:33 AM (IST)

केंद्र सरकार और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच केंद्र शासित प्रदेश की संवैधानिक सुरक्षा और शासन व्यवस्था पर बातचीत नए ...और पढ़ें

गृह मंत्रालय ने LAB और KDA से मांगा ड्राफ्ट प्रस्ताव

गृह मंत्रालय ने LAB और KDA से मांगा ड्राफ्ट प्रस्ताव

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। केंद्र सरकार और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच केंद्र शासित प्रदेश (UT) की संवैधानिक सुरक्षा और शासन व्यवस्था को लेकर चल रही बातचीत एक नए चरण में पहुंच गई है।

गृह मंत्रालय ने लद्दाख के प्रमुख संगठनों—लेह एपेक्स बॉडी (LAB), कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) और एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक से 7 प्रमुख बिंदुओं पर एक ड्राफ्ट प्रस्ताव जमा करने को कहा है।

इस प्रस्ताव के आधार पर अक्टूबर में होने वाली अगले दौर की बैठक के लिए खाका तैयार किया जाएगा।

हालिया बैठक के दौरान गृह मंत्रालय ने लद्दाख में तीन-स्तरीय प्रशासनिक व्यवस्था का खाका पेश किया, जिसमें केंद्र शासित प्रदेश स्तर की एक सर्वोच्च संस्था, स्वायत्त जिला परिषदें और पंचायतें शामिल होंगी।

7 प्रमुख सवालों पर मांगी गई राय

UT स्तर की संस्था का ढांचा: मंत्रालय ने लद्दाख के प्रतिनिधियों से प्रस्तावित सर्वोच्च संस्था और उसकी कार्यकारी इकाई का नाम तय करने पर सुझाव मांगे हैं।

चुनाव की प्रक्रिया: UT-स्तरीय संस्था के सदस्यों के चुनाव की पद्धति पर राय मांगी गई थी। लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच इस बात पर सहमति बनी है कि UT स्तर की संस्था के लिए प्रत्यक्ष चुनाव होने चाहिए।

शक्तियों का बंटवारा: UT-स्तरीय निकाय और जिला परिषदों के बीच अधिकारों और कार्यों के बंटवारे के सिद्धांतों पर स्पष्टता मांगी गई है, ताकि पूरे क्षेत्र में समन्वित विकास और बेहतर प्रशासन सुनिश्चित किया जा सके।

कानून बनाने का अधिकार: यह भी पूछा गया है कि प्रस्तावित UT-स्तरीय चुनी हुई संस्था के पास कानून बनाने के लिए कौन-कौन से विषय होने चाहिए।

मामले वापस लेने और मुआवजे पर आश्वासन

बैठक के बाद प्रशासन की ओर से बताया गया कि लद्दाख के प्रतिनिधियों को संवैधानिक सुरक्षा पर पूरी स्पष्टता दी गई है। साथ ही, 24 सितंबर 2025 की हिंसक घटनाओं से जुड़े मामलों को वापस लेने और प्रभावितों को मुआवजा देने की मांग को लद्दाख के उपराज्यपाल (LG) के समक्ष रखने का आश्वासन दिया गया है।

हालांकि बातचीत आगे बढ़ रही है, लेकिन सोनम वांगचुक का कहना है कि जब तक प्रस्तावित UT-स्तरीय संस्था पूरी तरह गठित नहीं हो जाती, तब तक उसके अधिकारों को लेकर कोई बड़ा फैसला जल्दबाजी में न लिया जाए।