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'चुनावी हलफनामे में गलत जानकारी देने पर जनता कर सकती है शिकायत', सुप्रीम कोर्ट का फैसला; नेताओं को होगी परेशानी

Published: Sat, 17 Oct 2026 02:00 AM (IST)

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि चुनावी हलफनामे में गलत जानकारी देने या महत्वपूर्ण तथ्यों ...और पढ़ें

'चुनावी हलफनामे में गलत जानकारी देने पर जनता कर सकती है शिकायत', सुप्रीम कोर्ट (फोटो- एएनआई)

'चुनावी हलफनामे में गलत जानकारी देने पर जनता कर सकती है शिकायत', सुप्रीम कोर्ट (फोटो- एएनआई)

HighLights

  1. झूठी या निराधार शिकायत दर्ज कराने पर सक्षम मजिस्ट्रेट उचित कार्रवाई करने के लिए अधिकृत

  2. यह फैसला कर्नाटक निवासी राजकुमार माडकी की अपील पर सुनाया गया

पीटीआई, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि चुनावी हलफनामे में गलत जानकारी देने या महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाने वाले निर्वाचित उम्मीदवारों के खिलाफ आम नागरिक भी आपराधिक शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

शीर्ष न्यायालय ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 195 की पाबंदी शिकायत दर्ज कराने में बाधा नहीं बनेगी।

जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने कहा कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 125ए के तहत अपराध के आरोप में आम नागरिक की शिकायत को केवल इस आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता कि शिकायत चुनाव आयोग या किसी अधिकृत सरकारी अधिकारी ने दर्ज नहीं कराई है।

पीठ ने कहा कि यदि किसी निर्वाचित उम्मीदवार को परेशान करने के उद्देश्य से झूठी या निराधार शिकायत दर्ज कराई जाती है, तो सक्षम मजिस्ट्रेट तथ्यों और परिस्थितियों के अनुसार उचित कार्रवाई करने के लिए अधिकृत हैं।

यह फैसला कर्नाटक निवासी राजकुमार माडकी की अपील पर सुनाया गया। उन्होंने बीदर विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित विधायक शैलेंद्र बेलदाले पर वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव के नामांकन के साथ दाखिल हलफनामे में अपने आवासीय पते के संबंध में गलत जानकारी देने का आरोप लगाया था।

माडकी ने बेंगलुरु की अदालत में आपराधिक शिकायत दर्ज कराई थी। हालांकि, कर्नाटक हाईकोर्ट ने सात मार्च 2025 को यह कहते हुए शिकायत खारिज कर दी थी कि ऐसी कार्रवाई चुनाव आयोग की शिकायत पर ही शुरू की जा सकती है।

सुप्रीम कोर्ट ने कानूनी सवाल पर निजी शिकायतों को वैध माना, लेकिन बेलदाले के खिलाफ पहले से खारिज कार्यवाही को दोबारा शुरू करने का आदेश नहीं दिया।