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135 वर्ष पुरानी सेंट्रल सेक्रेटेरिएट लाइब्रेरी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र से मांगा लेआउट प्लान, पूछा- कितनी जगह दे रहे हो?

Published: Mon, 05 Oct 2026 10:34 PM (IST)

सुप्रीम कोर्ट ने सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत शास्त्री भवन में स्थित 135 साल पुरानी सेंट्रल सेक्रेटेरिएट लाइब्रेरी के भविष्य पर केंद्र सरकार से विस्तृत लेआउट प्लान मांगा है।

135 वर्ष पुरानी सेंट्रल सेक्रेटेरिएट लाइब्रेरी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त।

135 वर्ष पुरानी सेंट्रल सेक्रेटेरिएट लाइब्रेरी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त।

HighLights

  1. सुप्रीम कोर्ट ने 135 साल पुरानी सेंट्रल सेक्रेटेरिएट लाइब्रेरी पर केंद्र से जवाब मांगा।

  2. कोर्ट ने लाइब्रेरी के लिए आवंटित जगह का विस्तृत लेआउट प्लान मांगा।

  3. केंद्र को आरके पुरम की किताबों के समायोजन पर हलफनामा दाखिल करना होगा।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। नई दिल्ली में सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत ध्वस्त होने वाली शास्त्री भवन में स्थित 135 साल पुरानी सेंट्रल सेक्रेटेरिएट लाइब्रेरी के भविष्य को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कड़ा रुख अपनाते हुए विस्तृत जवाब मांगा है।

यह ऐतिहासिक लाइब्रेरी, जो 1891 से अस्तित्व में है, अपने विशाल संग्रह और ऐतिहासिक महत्व के कारण चर्चा में है। जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की बेंच ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा लेआउट प्लान

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि आखिर इस लाइब्रेरी को नई योजना में कितनी जगह दी जा रही है। कोर्ट ने केंद्र से उस जगह का असल लेआउट प्लान और जानकारी मांगी जो सेंट्रल सेक्रेटेरिएट लाइब्रेरी के लिए अलॉट की जाएगी।

बेंच ने टिप्पणी की कि कागजों का इस्तेमाल कम करना ठीक है, लेकिन इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि जो मूल्यवान दस्तावेज और किताबें हमारे पास पहले से मौजूद हैं, उनकी देखभाल न की जाए। कोर्ट ने मौखिक बयानों के बजाय एक विधिवत शपथ पत्र दाखिल करने के निर्देश दिए।

एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने केंद्र की ओर से पक्ष रखते हुए कोर्ट को बताया कि वर्तमान में लाइब्रेरी के पास 4,144 वर्ग मीटर का क्षेत्र है, और अब इसे बढ़ाकर लगभग 5,200 वर्ग मीटर क्षेत्र आवंटित करने की योजना बनाई जा रही है। इसके साथ ही, दो मंजिलों पर एक बड़े स्पेस का प्रस्ताव भी रखा गया है।

हालांकि, कोर्ट ने इस बात पर भी चिंता जताई कि क्या यह प्रस्तावित जगह केवल शास्त्री भवन की किताबों के लिए ही नहीं, बल्कि आरके पुरम में गत्तों में बंद पड़ी दो लाख से अधिक किताबों के लिए भी पर्याप्त होगी या नहीं।

कोर्ट ने केंद्र सरकार को आदेश दिया है कि वह लाइब्रेरी के लिए आवंटित होने वाले क्षेत्र के पूर्ण विवरण और वास्तविक लेआउट प्लान के साथ एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करे।

कोर्ट यह भी सुनिश्चित करना चाहता है कि नई जगह आरके पुरम में 2011 से गत्तों में बंद पड़ी किताबों को भी समायोजित करने के लिए पूरी तरह सक्षम हो। इस महत्वपूर्ण मामले की अगली सुनवाई अब 16 नवंबर को तय की गई है, जिसमें सहायता के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता हरिप्रिया पद्मनाभन को नियुक्त किया गया है।

(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)