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NEET विरोध प्रदर्शन: महिला प्रदर्शनकारियों से यौन उत्पीड़न की शिकायतों को प्राथमिकता देगी सुप्रीम कोर्ट की जांच समिति 

Updated: Mon, 24 Aug 2026 07:20 PM (GMT+05:30)

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नीट विरोध प्रदर्शनों के दौरान महिला प्रदर्शनकारियों के यौन उत्पीड़न की शिकायतों पर उच्चाधिकार प्राप्त जांच समिति प्राथमिकता से ध्यान देगी।

महिला प्रदर्शनकारियों से यौन दुर्व्यवहार के मामलों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त (फाइल फोटो)

महिला प्रदर्शनकारियों से यौन दुर्व्यवहार के मामलों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त (फाइल फोटो)

HighLights

  1. जांच समिति यौन उत्पीड़न शिकायतों पर प्राथमिकता से ध्यान देगी।

  2. जंतर-मंतर पर महिला प्रदर्शनकारियों के यौन उत्पीड़न के आरोप।

  3. उच्चाधिकार प्राप्त समिति पूर्व न्यायाधीश आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता में।

पीटीआई, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि मेडिकल की प्रवेश परीक्षा नीट को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस हिंसा के आरोपों की जांच के लिए गठित उच्चाधिकार प्राप्त जांच समिति (एचपीईसी) को महिला प्रदर्शनकारियों के यौन उत्पीड़न की शिकायतों पर प्राथमिकता से ध्यान देने को कहा गया है।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने यह स्पष्टीकरण तब दिया, जब एक याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा गुप्ता ने उनसे जंतर-मंतर पर 20 जुलाई के विरोध प्रदर्शन के दौरान महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न व छेड़छाड़ के आरोपों पर स्वतः संज्ञान लेने का आग्रह किया।

शोभा गुप्ता ने पीठ से एक ऐसी व्यवस्था बनाने का भी आग्रह किया जिसके जरिये कथित पीड़िताएं जांच के लिए अपनी शिकायतें सीधे दाखिल कर सकें। प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि उच्चाधिकार प्राप्त जांच समिति प्रदर्शनकारियों के यौन उत्पीड़न की शिकायतों पर प्राथमिकता से ध्यान देगी।

उन्होंने कहा कि पिछले हफ्ते जारी आदेश के अनुसार, समिति से इसकी जांच प्राथमिकता के आधार पर करने और तुरंत एक अंतरिम रिपोर्ट सौंपने का अनुरोध किया गया है। जस्टिस बागची ने बताया कि इसी मामले पर एक स्वतंत्र रिट याचिका दायर की गई थी और उच्चाधिकार प्राप्त जांच समिति से इस मुद्दे की जांच करने के लिए कहा गया है।

गौरतलब है कि 20 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में छात्र प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध पुलिस की ज्यादतियों और पुलिसकर्मियों के विरुद्ध हिंसा के आरोपों की जांच के लिए पांच सदस्यीय उच्चाधिकार प्राप्त जांच समिति गठित की थी। इसके प्रमुख सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी हैं।