मानवाधिकार आयोगों में खाली पदों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र और राज्यों से मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने मानवाधिकार आयोगों में रिक्तियों और कामकाज को लेकर केंद्र, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और सभी राज्यों से जवाब मांगा है।
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सुप्रीम कोर्ट ने मानवाधिकार आयोगों की रिक्तियों पर जवाब मांगा

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में मानवाधिकार आयोगों में रिक्तियों और कामकाज को लेकर एक जनहित याचिका दाखिल की गई है। शीर्ष अदालत ने इस याचिका पर सोमवार को केंद्र, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) और सभी राज्यों से जवाब मांगा।
इसमें आरोप लगाया गया है कि कई राज्य मानवाधिकार आयोग (एसएचआरसी) में स्टाफ की कमी है, वे निष्क्रिय हैं या उनके शीर्ष पद रिक्त हैं।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने याचिका का संज्ञान लेते हुए नोटिस जारी किए। यह याचिका वकील सृष्टि अग्निहोत्री के जरिये सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के सेवानिवृत्त जजों के एसोसिएशन की ओर से दाखिल की गई है।
21 सितंबर को दाखिल याचिका में सभी राज्यों को एसएचआरसी के अध्यक्ष और सदस्य के खाली पदों को एक निश्चित समय सीमा के भीतर भरने का आदेश दिए जाने की मांग की गई है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश और झारंखड में एसएचआरसी पूरी तरह निष्क्रिय हैं। जबकि छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और मेघालय में एसएचआरसी लंबे समय से कार्यरत अध्यक्षों के तहत काम कर रहे हैं। एसोसिएशन ने इन रिक्त पदों पर एक तय समयसीमा के भीतर स्थायी नियुक्तियां करने की मांग की है।
(न्यूज एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
