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'यह राजनीतिक नहीं, एक निजी किताब है'; संस्मरण रिलीज से पहले बोलीं सोनिया गांधी

Published: Sun, 08 Nov 2026 08:40 PM (IST)

सोनिया गांधी ने अपनी आत्मकथा 'बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव' को राजनीतिक नहीं, बल्कि एक निजी किताब बताया है।

सोनिया गांधी ने आत्मकथा को बताया निजी किताब

सोनिया गांधी ने आत्मकथा को बताया निजी किताब

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने अपनी आत्मकथा के भारत में रिलीज होने से महज दो दिन पहले कहा कि उनकी यह पुस्तक कोई राजनीतिक संस्मरण नहीं, बल्कि एक पूरी तरह से निजी किताब है।

उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य अपने परिवार को उन इंसानों के रूप में ईमानदारी से पेश करना है, जिन्हें वे करीब से जानती थीं और जिनसे वे प्रेम करती थीं.

'राजनीतिक किताब नहीं, निजी संस्मरण'

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपने विचार साझा करते हुए सोनिया गांधी ने कहा, यह कोई राजनीतिक किताब नहीं है, बल्कि एक निजी किताब है। मेरे परिवार के बारे में बहुत कुछ लिखा गया है, लेकिन शायद ही कभी उनके असली व्यक्तित्व, उनकी प्रेरणाओं, उनके संघर्षों और उनकी मानवीय कमियों को गहराई से समझा गया हो। मैं उन्हें ईमानदारी से पेश करना चाहती थी।

किताब के सफर के बारे में बताया

एक अखबार में लिखे गए लेख में उन्होंने अपनी आत्मकथा बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव के सफर के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने लिखा कि जीवन के अधिकांश समय तक उन्होंने अपनी निजी दुनिया को बेहद सीमित और सुरक्षित रखा।

राजनीति में दुखद परिस्थितियों के कारण प्रवेश करने के बावजूद उन्होंने अपनी निजता को बचाए रखा। सार्वजनिक जीवन की व्यस्तताओं से दूर होने के बाद ही उन्हें अपनी इस कहानी को नए सिरे से और स्पष्टता से देखने का अवसर मिला।

प्यार और वफादारी से जुड़ा जीवन

अपने अतीत को याद करते हुए सोनिया गांधी ने लिखा कि जब उन्होंने पीछ मुड़कर देखा, तो उन्हें अपनी पूरी जिंदगी में एक ही मुख्य सूत्र नजर आया। वह था प्यार और उससे उपजी वफादारी।

उन्होंने उस दौर को याद किया जब इटली के एक छोटे से शहर की 19 साल की युवती की मुलाकात कैम्ब्रिज में एक युवा भारतीय छात्र राजीव गांधी से हुई थी। इसी प्रेम और विश्वास ने उन्हें एक बिल्कुल नए देश और परिवार से जोड़ा, जहां उन्होंने अपनी सास इंदिरा गांधी के साथ एक गहरा मजबूत रिश्ता साझा किया और मिलकर बच्चों की परवरिश की।

उन्होंने यह भी जिक्र किया कि इसी प्रेम की ताकत ने उन्हें उस असहनीय दौर से उबारा, जब हिंसक घटनाओं के कारण उन्होंने पहले अपनी सास और फिर अपने जीवनसाथी राजीव गांधी को हमेशा के लिए खो दिया।

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