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पराली जलाने पर लगेगा जुर्माना, रेड कैटेगरी अलर्ट भी होगा... दिल्ली-हरियाणा समेत 5 राज्यों के लिए सरकार का प्रस्ताव

Published: Sat, 19 Sep 2026 01:17 PM (IST)

सरकार ने पराली जलाने की समस्या से निपटने के लिए नए नियम प्रस्तावित किए हैं, जिसके तहत पराली जलाने वाले ...और पढ़ें

पराली जलाने वाले खेत 15 महीने 'रेड कैटेगरी' में रहेंगे (प्रतीकात्मक फोटो)

पराली जलाने वाले खेत 15 महीने 'रेड कैटेगरी' में रहेंगे (प्रतीकात्मक फोटो)

HighLights

  1. पराली जलाने वाले खेत 15 महीने 'रेड कैटेगरी' में रहेंगे।

  2. जमीन के आकार के अनुसार 5,000 से 30,000 रुपये जुर्माना।

  3. जुर्माने की राशि फसल विविधीकरण और बायोमास में लगेगी।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सरकार ने पराली जलाने की समस्या का समाधान निकाला है। देश की राजधानी दिल्ली से पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में किसान पराली जलाते हैं, जिससे प्रदूषण काफी बढ़ सकता है।

पर्यावरण मंत्रालय ने इस पराली जलाने की समस्या को रोकने के लिए नए नियम बनाने का प्रस्ताव दिया है। नए नियमों के तहत पराली जलाए जाने वाले खेतों को रेड कैटेगरी में डाला जाएगा।

क्या होंगे पराली जलाने को लेकर नया नियम?

पर्यावरण मंत्रालय ने पराली जलाने को लेकर ड्राफ्ट नियम बुधवार को जारी किए। ड्राफ्ट नियमों के तहत, जिस खेत में पराली जलाई जाएगी, उसे घटना की तारीख से 15 महीने के लिए 'रेड कैटेगरी' में रखा जाएगा। हालांकि, इस कैटेगरी में डाले जाने के क्या नतीजे होंगे, यह अभी साफ नहीं है।

नियमों के तहत, 'अगर उसी जमीन पर बाद में फिर से पराली जलाने की घटना होती है या इन नियमों के तहत लगाया गया पर्यावरण जुर्माना (अगर कोई हो) तय समय में जमा नहीं किया जाता है, तो 'रेड एंट्री' अगले 15 महीनों के लिए भी लागू रहेगी।'

हालांकि, इन नियमों में पराली जलाने के लिए 2023 में तय किए गए पर्यावरण जुर्माने की दरों को ही बरकरार रखा गया है।

पराली जलाने पर लगेगा कितना जुर्माना?

पराली जलाने के दोषी पाए जाने वाले किसानों पर जमीन के आकार के हिसाब से जुर्माना लगाया जाएगा।

  • 2 एकड़ से कम जमीन के लिए 5,000 रुपये जुर्माना
  • 2 से 5 एकड़ जमीन के लिए 10,000 रुपये जुर्माना
  • 5 एकड़ से ज्यादा जमीन के लिए 30,000 जुर्माना।

ड्राफ्ट नियमों में पर्यावरण जुर्माने के इस्तेमाल से जुड़ा एक सेक्शन भी है। इस वसूली गई रकम का इस्तेमाल फसल विविधीकरण (crop-diversification) कार्यक्रमों को बढ़ावा देने, बायोमास के इस्तेमाल और स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास और संचालन में मदद करने और फसल अवशेष प्रबंधन के क्षेत्र में रिसर्च और डेवलपमेंट के लिए फंड देने आदि में किया जाएगा।

सरकार ने इन ड्राफ्ट नियमों को लेकर संबंधित लोगों से 60 दिनों के अंदर सुझाव मांगे हैं, जिससे इन्हें सदन में पेश करके कानून बनाया जा सके।

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