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हत्या को गैर-इरादतन हत्या में बदलने पर भड़का सुप्रीम कोर्ट; छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट से कहा- यह दयनीय स्थिति

Published: Thu, 15 Oct 2026 02:00 AM (GMT+05:30)

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के उस फैसले पर नाराजगी जताई, जिसमें हत्या के मामले में एक ...और पढ़ें

हत्या को गैर-इरादतन हत्या में बदलने पर भड़का सुप्रीम कोर्ट

हत्या को गैर-इरादतन हत्या में बदलने पर भड़का सुप्रीम कोर्ट

HighLights

  1. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह बेहद दयनीय स्थिति है, जजों को कानून की समझ नहीं

  2. आइपीसी की धारा 304 का भाग एक ऐसी गैर-इरादतन हत्या से संबंधित है

पीटीआई, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के उस फैसले पर नाराजगी जताई, जिसमें हत्या के मामले में एक व्यक्ति की दोषसिद्धि को रद करते हुए उसे गैर-इरादतन हत्या का दोषी ठहराया गया और उसकी उम्रकैद की सजा घटाकर 10 साल की कैद में तब्दील कर दी गई। जस्टिस जेबी पार्डीवाला और के. विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा- " हाई कोर्ट की दयनीय स्थिति तो देखिए।"

पीठ ने राज्य सरकार और हत्या के आरोपित चिंतामणि उर्फ चिंटू पटेल को नोटिस जारी कर पूछा कि हाई कोर्ट के आदेश को क्यों न रद किया जाए और हत्या के मामले में चिंतामणि को दोषी ठहराने वाले निचली अदालत के फैसले को बहाल किया जाए।

जस्टिस पार्डीवाला ने कहा कि जरा हाई कोर्ट की दयनीय स्थिति तो देखिए। न्यायाधीशों को यह तक नहीं पता कि भारतीय दंड संहिता (आइपीसी) की धारा 304 के भाग एक और दो में क्या प्रविधान हैं।

आइपीसी की धारा 304 का भाग एक ऐसी गैर-इरादतन हत्या से संबंधित है, जिसमें मौत का वजह बनने या ऐसी चोट पहुंचाने का इरादा होता है, जिससे जान जाने की आशंका हो। वहीं, भाग दो उन मामलों से संबंधित है, जिनमें आरोपित को इस बात का ज्ञान होता है कि उसके कृत्य से मौत होने की आशंका है, लेकिन उसका जान लेने का कोई इरादा नहीं होता।

चिंतामणि के वकील ने दलील दी कि उनके मुवक्किल के खिलाफ कोई सुबूत नहीं था और हाई कोर्ट ने अपने फैसले में गलती की थी।

न्यायमूर्ति पार्डीवाला ने कहा कि यह इस तरह का पहला फैसला नहीं है, जो हमारे सामने आया है। ये सभी कानून के वे सिद्धांत हैं, जिन्हें विधि महाविद्यालयों में शैक्षणिक सत्र के पहले वर्ष में ही पढ़ाया जाता है।

शीर्ष अदालत ने कहा कि हाई कोर्ट ने घातक चोटों की प्रकृति और मृतक को ये चोटें किस तरह लगीं, इस बात पर विचार नहीं किया।

यह है मामला

यह मामला फरवरी 2021 में एक महिला की मौत से जुड़ा है। आरोप है कि चिंतामणि ने नशे की हालत में महिला को धक्का दे दिया था, जिससे वह ईंटों पर गिर गई और उसकी मौत हो गई थी। मौत से पहले महिला ने अपने पति को बताया था कि आरोपित ने उसके साथ मारपीट की थी।

निचली अदालत ने गवाहों के बयान पर विचार करने के बाद सितंबर 2022 में चिंतामणि को हत्या का दोषी ठहराते हुए उसे उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

हाई कोर्ट ने आरोपित की जमानत अर्जी पर सुनवाई करते समय मामले पर गुण-दोष के आधार पर विचार करने का फैसला किया और यह निष्कर्ष निकाला कि यह हत्या का मामला नहीं, बल्कि गैर-इरादतन हत्या का मामला है।

हाई कोर्ट ने नवंबर 2024 के अपने आदेश में कहा था कि घटना के समय याचिकाकर्ता (चिंतामणि) नशे में था। उसने कहा था कि अभियोजन पक्ष न तो हत्या का कोई मकसद साबित कर पाया और न ही यह साबित हुआ कि याचिकाकर्ता ने मृतका रायमोती पटेल की हत्या की पूर्व साजिश की थी।

" जरा हाई कोर्ट की दयनीय स्थिति तो देखिए। न्यायाधीशों को यह तक नहीं पता कि भारतीय दंड संहिता (आइपीसी) की धारा 304 के भाग एक और दो में क्या प्रविधान हैं।" - जस्टिस जेबी पार्डीवाला।