22 सितंबर से फिर थमेंगे पंजाब रोडवेज के पहिए, कर्मियों ने दी अनिश्चितकालीन हड़ताल और घेराव की चेतावनी
पंजाब रोडवेज, पनबस और पीआरटीसी के संविदा कर्मचारियों ने मांगों के पूरा न होने पर 22 सितंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल और चक्का जाम का एलान कर दिया है।

जानकारी देते हुए पंजाब रोडवेज, पनबस और पीआरटीसी कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन के पदाधिकारी।
HighLights
यूनियन ने 22 सितंबर 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान किया।
कर्मचारी नियमितीकरण और ठेका प्रथा समाप्त करने की मांग कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री के आवास के बाहर धरना दिया जाएगा।
डाॅ. सुमित सिंह श्योराण, चंडीगढ़। पंजाब रोडवेज, पनबस और पीआरटीसी कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन (पंजाब 25/11) ने अपनी मांगों को लेकर 22 सितंबर 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का एलान किया है। शुक्रवार को चंडीगढ़ में आयोजित प्रेस कान्फ्रेंस में यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष रेशम सिंह गिल ने कहा कि सरकार पिछले साढ़े चार साल से कर्मचारियों को नियमित करने और ठेकेदारी व्यवस्था खत्म करने के नाम पर केवल बैठकें कर रही है।
अब तक करीब 60 से 65 बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। गिल ने कहा कि सरकार ने सत्ता में आने से पहले ठेका कर्मचारियों को नियमित करने और उन्हें पूरी वेतन सुविधाएं देने का वादा किया था। इसके बावजूद परिवहन विभाग में अब तक एक भी कर्मचारी को नियमित नहीं किया गया।
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कर्मचारियों का हो रहा शोषण
उन्होंने आरोप लगाया कि ठेकेदारों के माध्यम से भविष्य निधि और कर्मचारी राज्य बीमा के अंशदान के नाम पर कर्मचारियों का शोषण किया जा रहा है। यूनियन के महासचिव शमशेर सिंह ढिल्लों ने आरोप लगाया कि सरकार सरकारी बसों का बेड़ा बढ़ाने के बजाय किलोमीटर योजना को बढ़ावा दे रही है। उनके अनुसार, मौजूदा सरकार के कार्यकाल में करीब 800 बसें कंडम घोषित हो चुकी हैं, जबकि नई बसों की खरीद नहीं की गई।
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सरकारी रूट हो रहे प्रभावित
बसें न खरीदे जाने से सरकारी रूट प्रभावित हो रहे हैं और निजी बस संचालकों को फायदा पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि किलोमीटर योजना पंजाब के युवाओं के रोजगार के अवसरों को भी सीमित कर रही है। वरिष्ठ उपाध्यक्ष हरकेश कुमार विक्की ने कहा कि आंदोलन के दौरान दर्ज किए गए मामलों को वापस लेने और जेल में बंद कर्मचारियों की रिहाई की मांग भी प्रमुख है।
उन्होंने चेतावनी दी कि मांगें नहीं मानी गईं तो सरकार की राजनीतिक रैलियों का बहिष्कार और व्यापक विरोध-प्रदर्शन किया जाएगा। यूनियन नेताओं ने कहा कि 22 सितंबर से बसों का चक्का जाम रहेगा। साथ ही मुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री के आवास के बाहर धरना दिया जाएगा। इसकी जिम्मेदारी सरकार और प्रबंधन की होगी।
