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पंजाब विधानसभा में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्ताव, AAP ने भाजपा और NDA सहयोगियों को घेरा

Published: Fri, 23 Oct 2026 12:43 PM (GMT+05:30)

पंजाब विधानसभा में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया गया। आम आदमी पार्टी ने मतदाता सूचियों में धांधली ...और पढ़ें

पंजाब विधानसभा में स्पीकर कुलतार सिंह संधवां और सदन में पहुंचे मुख्यमंत्री मान।

पंजाब विधानसभा में स्पीकर कुलतार सिंह संधवां और सदन में पहुंचे मुख्यमंत्री मान।

HighLights

  1. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ पंजाब विधानसभा में प्रस्ताव।

  2. मतदाता सूचियों से नाम हटाने की निष्पक्ष जांच की मांग।

  3. AAP ने भाजपा और NDA सहयोगी दलों पर सवाल उठाए।

रोहित कुमार, चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्ताव पेश कर आम आदमी पार्टी ने भाजपा के साथ-साथ केंद्र की एनडीए सरकार को समर्थन दे रहे घटक दलों को भी निशाने पर लिया। सदन में विधायक इंद्रजीत कौर और मनुके ने कहा कि इस मामले में सबसे बड़े दोषी एनडीए के वे घटक दल भी हैं, जिन्होंने भाजपा को सत्ता में बैठा रखा है।

उन्होंने चंद्रबाबू नायडू और नीतीश कुमार का नाम लेते हुए सवाल उठाए कि जब मतदाता सूचियों के गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) के दौरान कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं, तो भाजपा को समर्थन देने वाले सहयोगी दलों की जिम्मेदारी भी बनती है।

इससे पहले वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने सदन में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्ताव पेश कर मतदाता सूचियों से नाम हटाए जाने की शिकायतों की निष्पक्ष जांच और चुनाव आयोग की जवाबदेही तय करने की मांग की।

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बाबा साहेब के दिए मतदान के अधिकार का उठाया मुद्दा

हरपाल सिंह चीमा ने प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि भारतीय लोकतंत्र संविधान में निहित समानता, न्याय और जनता की सर्वोच्चता के सिद्धांतों पर आधारित है। मतदान का अधिकार लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियाद है।

देशभर में बड़ी संख्या में नागरिकों के नाम मतदाता सूचियों से हटाए जाने और पात्र मतदाताओं को मतदान के अधिकार से वंचित किए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। इससे चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता, निष्पक्षता और चुनाव आयोग की जवाबदेही पर सवाल उठ रहे हैं।

कमजोर वर्ग के मतदान के अधिकार पर सवाल

चीमा ने बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि आजादी से पहले मतदान का अधिकार समाज के चुनिंदा वर्गों तक सीमित था। वकीलों, डॉक्टरों, न्यायाधीशों, राजाओं-महाराजाओं और संपन्न लोगों को ही यह अधिकार हासिल था। बाबा साहेब ने गरीबों, दलितों, अनुसूचित जातियों और समाज के दूसरे वर्गों को मतदान के अधिकार से जोड़ने में अहम भूमिका निभाई।

चीमा ने आरोप लगाया कि आज गरीबों और कमजोर वर्गों के मतदान के अधिकार पर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने अल्पसंख्यकों और दलितों को निशाना बनाए जाने का आरोप लगाते हुए कहा कि मतदाता सूचियों से पात्र लोगों के नाम हटाए जाने की शिकायतों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

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फर्जी दस्तावेजों के जरिये वोट काटने का आरोप

वित्त मंत्री ने कर्नाटक के राजस्व मंत्री के साथ हुई बातचीत का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर बूथ लेवल अधिकारियों के सामने गलत दावे पेश किए जाते हैं, ताकि गरीब लोगों और भाजपा विरोधी दलों के समर्थकों के वोट काटे जा सकें। उन्होंने दिल्ली में करीब 40 हजार वोट कम होने का उल्लेख करते हुए आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल का भी संदर्भ दिया।

चीमा ने कहा कि मतदान का अधिकार लोकतंत्र की बुनियाद है और किसी भी पात्र नागरिक को गैरकानूनी तरीके से इससे वंचित करना संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ है।

राष्ट्रपति को भेजी जाएगी प्रस्ताव की प्रति

प्रस्ताव में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूचियों से संबंधित फैसलों में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए स्वतंत्र, निष्पक्ष और विश्वसनीय तंत्र स्थापित करने की मांग की गई। इसमें कहा गया कि यदि जांच के दौरान किसी व्यक्ति के खिलाफ अपराध के पर्याप्त सबूत सामने आते हैं तो उसके विरुद्ध कानून के अनुसार आपराधिक कार्रवाई शुरू की जाए।

प्रस्ताव में केंद्र सरकार और संबंधित संवैधानिक संस्थाओं से चुनाव प्रक्रिया की स्वतंत्रता, निष्पक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया। साथ ही प्रस्ताव की प्रति राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्य चुनाव आयुक्त को आगे की कार्रवाई के लिए भेजने की मांग रखी गई।

इंद्रजीत कौर और मनुके ने भाजपा को समर्थन दे रहे एनडीए के सहयोगी दलों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें भी इस मुद्दे पर अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। उन्होंने चंद्रबाबू नायडू और नीतीश कुमार का नाम लेकर भाजपा को सत्ता में बनाए रखने वाले घटक दलों को भी घेरा।

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