रक्षाबंधन पर बदला 'रक्षा' का संकल्प, राजस्थान में 31 बहनों ने अंगदान कर दी भाइयों को नई जिंदगी
रामस्वरूप गुर्जर को उनकी बहन सुगना ने किडनी दान कर नया जीवन दिया, जो दर्द निवारक दवाओं के कारण किडनी फेलियर से जूझ रहे थे।

बहनों ने भाइयों को किडनी देकर दी नई जिंदगी(यह तस्वीर AI द्वारा बनाई गई है)

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डिजिटल डेस्क, जयपुर। रक्षाबंधन के अवसर पर 37 वर्षीय रामस्वरूप गुर्जर अपनी कलाई पर बंधे रक्षासूत्र को देखते हैं, तो उन्हें एक और ऐसे बंधन का अहसास होता है जो दिखाई नहीं देता, लेकिन जिसकी वजह से वह आज जिंदा हैं।
सालों तक रामस्वरूप पीठ के गंभीर दर्द से राहत पाने के लिए पेनकिलर लेते रहे। इन दवाओं ने उनका दर्द तो कम किया, लेकिन धीरे-धीरे इनकी वजह से उनकी किडनियां खराब हो गईं। जब तक उन्होंने डॉक्टरी सलाह ली, तब तक उनकी दोनों किडनियां काम करना बंद कर चुकी थीं।
इस बीमारी का पता चलने पर रामस्वरूप और उनका परिवार पूरी तरह टूट गया था। जीवित रहने के लिए उन्हें किडनी ट्रांसप्लांट की सख्त जरूरत थी।
बहन ने बिना हिचकिचाहट के बढ़ाया कदम
छह भाई-बहनों वाले इस परिवार में रामस्वरूप की सबसे बड़ी बहन, 60 वर्षीय सुगना गुर्जर आगे आईं। उन्होंने जरा भी हिचकिचाहट नहीं दिखाई। उनका छोटा भाई गंभीर रूप से बीमार था और उनके पास उसकी जान बचाने का मौका था।
25 अगस्त 2023 को जयपुर के एक निजी अस्पताल में सुगना ने अपनी एक किडनी रामस्वरूप को दान कर दी। सुगना अपने इस कदम को कोई त्याग या बलिदान नहीं मानतीं। उनके लिए यह बस एक ऐसा काम था जो एक बहन को करना ही चाहिए। सुगना ने कहा कि एक बहन हमेशा अपने भाइयों को खुश और स्वस्थ देखना चाहती है।
इस ट्रांसप्लांट ने रामस्वरूप को उनका जीवन वापस लौटा दिया। वह ठीक होकर अपने गांव लौट आए हैं और अब इतने स्वस्थ हैं कि फिर से खेतों में काम कर रहे हैं। किडनी दान करने के बाद सुगना भी पूरी तरह से स्वस्थ जीवन जी रही हैं।
रामस्वरूप के लिए अब रक्षाबंधन के बहुत गहरे मायने हैं। यह अब केवल बहन के राखी बांधने और भाई की भलाई की प्रार्थना करने तक सीमित नहीं रह गया है। उनके मामले में, उनकी बहन ही उनके जीवित रहने की सबसे बड़ी वजह बन गई है।
रामस्वरूप ने कहा कि अगर मैं अपनी जिंदगी के लिए किसी का कर्जदार हूं, तो वह मेरी बहन है। मैं एक किसान हूं और नियमित रूप से खेती करता हूं। मैं सिर्फ अपनी बहन की वजह से ही एक स्वस्थ जीवन जी पा रहा हूं।
31 बहनों ने दी किडनी, भाई सिर्फ एक
इन भाई-बहनों की यह कहानी सरकारी सवाई मान सिंह (एसएमएस) अस्पताल में एक चौंकाने वाले पैटर्न की झलक दिखाती है, जहां भाई द्वारा बहन की रक्षा करने का पारंपरिक वादा अक्सर उल्टे रूप में सामने आता है।
जब से एसएमएस अस्पताल ने अपना किडनी ट्रांसप्लांट कार्यक्रम शुरू किया है, तब से यहां 882 प्रत्यारोपण किए जा चुके हैं। इनमें से 31 मामलों में बहनों ने अपने भाइयों को किडनी दान की है, जबकि केवल एक बार किसी भाई ने अपनी बहन को किडनी दी है।
डॉक्टरों के अनुसार, भाई-बहनों का डोनर होना मेडिकल दृष्टिकोण से काफी फायदेमंद होता है। एसएमएस अस्पताल में नेफ्रोलॉजी विभाग के सीनियर प्रोफेसर और यूनिट हेड, धनंजय अग्रवाल ने बताया कि ह्यूमन ल्यूकोसाइट एंटीजन (HLA) मैचिंग के कारण भाई-बहन अक्सर उपयुक्त डोनर साबित होते हैं, जिससे शरीर द्वारा नई किडनी को अस्वीकार करने का जोखिम कम हो जाता है।
डॉ. अग्रवाल ने कहा कि जब कोई भाई या बहन दूसरे को किडनी दान करता है, तो ट्रांसप्लांट की सफलता की संभावना बहुत अधिक होती है। 25% मामलों में भाई-बहनों के बीच एचएलए मैचिंग की 100% संभावना होती है, और 50% मामलों में एचएलए मैचिंग की 50% संभावना होती है।
हालांकि, अक्सर मेडिकल फायदों के आड़े सामाजिक डर आ जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि कई पुरुष यह सोचकर किडनी दान करने से कतराते हैं कि एक किडनी के सहारे जीने से वे कमजोर हो जाएंगे या उनके काम और भविष्य के स्वास्थ्य पर असर पड़ेगा। वहीं, महिलाएं अक्सर चुपचाप आगे आ जाती हैं और प्यार व परिवार की जरूरत को अपना कर्तव्य मानकर यह बड़ा फैसला ले लेती हैं।
एक और बहन भाई को जीवन देने के लिए तैयार
इस रक्षाबंधन पर एसएमएस अस्पताल में एक और भाई-बहन की जोड़ी अपनी बारी का इंतजार कर रही है। नैनीताल से लगभग 35 किलोमीटर दूर एक गांव के रहने वाले 28 वर्षीय नितिन सैनी पिछले सात सालों से किडनी फेलियर से जूझ रहे हैं। उनकी 29 वर्षीय बहन, सुनीता सैनी उन्हें एसएमएस अस्पताल लेकर आई हैं और अपनी एक किडनी दान करने की तैयारी कर रही हैं।
नितिन ने कहा कि मेरी बहन मुझसे बहुत प्यार करती है। वह मुझे अपनी एक किडनी देने के लिए तैयार है। गांव में, यह दोनों भाई-बहन मिलकर चाय और कॉफी की एक छोटी सी दुकान चलाते हैं। जयपुर में, सुनीता ही उनकी देखभाल कर रही है। वह डॉक्टर के अपॉइंटमेंट लेने से लेकर उनके खर्चों का प्रबंधन तक सब अकेले संभाल रही है।
नितिन भावुक होते हुए कहते हैं कि वह मेरे लिए यह दर्द सह रही है। अभी उसकी शादी नहीं हुई है, फिर भी वह इस त्याग के लिए पूरी तरह तैयार है।
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