पुत्रदा एकादशी पर किस दिशा में मुंह करके बैठना है शुभ? घर में आएगी सुख-समृद्धि
पुत्रदा एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा के लिए वास्तु नियमों का पालन करना महत्वपूर्ण है। सही दिशा में पूजा करने से सुख-समृद्धि आती है और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।

पुत्रदा एकादशी की पूजा के नियम (AI-Generated Image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हर माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने का विधान है। साथ ही विधिपूर्वक व्रत किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, एकादशी व्रत को करने से साधक को सभी पापों से छुटकारा मिलता है और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।
वैदिक पंचांग के अनुसार, सावन माह के शुक्ल पक्ष में पुत्रदा एकादशी मनाई जाती है। इस दिन पूजा के दौरान विशेष नियम का पालन जरूर करना चाहिए। इससे साधक को साधना का पूर्ण फल प्राप्त होता है और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होगी। पूजा के समय दिशा का जरूर ध्यान रखें। इससे व्रत सफल होगा और सुख-समृद्धि में वृद्धि होगी। ऐसे में आइए आर्टिकल में आपको बताते हैं कि पुत्रदा एकादशी की पूजा के वास्तु नियम।
एकादशी पूजा के वास्तु टिप्स
एकादशी के दिन पूजा करने के लिए पूर्व दिशा को शुभ माना जाता है। इस दिशा को उगते सूर्य और ज्ञान की दिशा माना जाता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, इस दिशा की तरफ मुंह करके पूजा-अर्चना करने से भक्त को सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है और जीवन खुशियों से भरा रहता है। इसलिए पूजा करने से पहले सही दिशा के बारे में जरूर जान लें।
इसके अलावा उत्तर दिशा को भी पूजा करने के लिए उत्तम माना जाता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, इस दिशा को धन, कुबेर देव और माता लक्ष्मी की माना जाता है। इसलिए इस दिशा में पूजा करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि का आगमन होता है और शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं।
क्या है प्रतिमा की शुभ दिशा?
वास्तु शास्त्र में बताया गया है कि भगवान विष्णु की प्रतिमा को इस तरह से स्थापित करें, जिससे उनका मुख पश्चिम या दक्षिण की ओर रहे। एक बात का विशेष ध्यान रखें कि पूजा के दौरान आपका मुख दक्षिण दिशा की तरफ नहीं होना चाहिए, क्योंकि इस दिशा को पितरों की मानी जाती है। इसलिए इस दिशा में मुख करके से शुभ और मांगलिक काम करने की मनाही है।
कब है पुत्रदा एकादशी?
सावन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत- 23 अगस्त को रात 02:00 बजे
सावन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का समापन- 24 अगस्त को सुबह 04 बजकर 18 मिनट पर
उदया तिथि के अनुसार, 23 अगस्त को पुत्रदा एकादशी व्रत किया जाएगा और 24 अगस्त को व्रत का पारण किया जाएगा।
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