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आज पुत्रदा एकादशी पर बन रहा सर्वार्थ सिद्धि योग, पढ़ें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और प्रिय भोग

Updated: Sun, 23 Aug 2026 06:30 AM (IST)

आज 24 अगस्त को सावन पुत्रदा एकादशी मनाई जा रही है, जो भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए शुभ है। इस दिन व्रत रखने से सुख-शांति और शुभ फल मिलते हैं; जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और व्रत पारण का समय।

कैसे करें पुत्रदा एकादशी के दिन पूजा? (AI-Generated Image)

कैसे करें पुत्रदा एकादशी के दिन पूजा? (AI-Generated Image)

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समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वैदिक पंचांग के अनुसार, आज यानी 24 अगस्त को सावन माह की पुत्रदा एकादशी मनाई जा रही है। यह दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए बेहद शुभ माना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्रीहरि की पूजा और व्रत करने से साधक के जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और शुभ फलों की प्राप्ति होती है। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में जानते हैं पुत्रदा एकादशी का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और व्रत पारण का सही समय।

पुत्रदा एकादशी 2026 डेट और शुभ मुहूर्त (Putrada Ekadashi 2026 Date and Shubh Muhurat)

वैदिक पंचांग के अनुसार, सावन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 23 अगस्त की देर रात 02 बजे से होगी। वहीं, 25 अगस्त को सुबह 04 बजकर 18 मिनट पर इस तिथि का समापन होगा। उदयातिथि के अनुसार, आज यानी 24 अगस्त को ही पुत्रदा एकादशी का व्रत किया जा रहा है और अगले दिन व्रत का पारण किया जाएगा।

25 अगस्त को व्रत का पारण करने का शुभ समय दोपहर 01 बजकर 41 मिनट से लेकर शाम 04 बजकर 16 मिनट तक रहेगा। पारण करने से पहले कुछ विशेष चीजों का दान जरूर करना चाहिए। इससे साधक को व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।

ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 05 बजकर 04 मिनट से 05 बजकर 47 मिनट तक
अभिजीत मुहूर्त- दोपहर 12 बजकर 44 मिनट से 01 बजकर 37 मिनट तक
विजय मुहूर्त- दोपहर 02 बजकर 24 मिनट से 03 बजकर 18 मिनट तक
सर्वार्थ सिद्धि योग- सुबह 06 बजकर 29 मिनट से 08 बजकर 14 मिनट तक

पुत्रदा एकादशी पूजा विधि (Putrada Ekadashi Puja Vidhi)

  • पुत्रदा एकादशी के दिन सुबह जल्दी स्नान करने के बाद पीले वस्त्र धारण करें और सूर्य देव को अर्घ्य दें।
  • भगवान के सामने बैठकर हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर व्रत का संकल्प लें।
  • लकड़ी की एक साफ चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं।
  • चौकी पर माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर विराजमान करें।
  • भगवान को पंचामृत से स्नान कराएं।
  • उन्हें पीले फूल, पीले वस्त्र, चंदन और अक्षत अर्पित करें।
  • सच्चे मन से देसी घी का दीपक और धूपबत्ती जलाएं।
  • विष्णु चालीसा और उनके मंत्रों का जाप करें, फिर व्रत कथा का पाठ करके आरती करें।
  • भगवान को मिठाई, माखन-मिश्री या पंचामृत का भोग लगाएं। इस बात का विशेष ध्यान रखें कि प्रभु के भोग में तुलसी के पत्ते जरूर शामिल हों।

भगवान विष्णु के प्रिय भोग

एकादशी के दिन भगवान विष्णु को बेसन के लड्डू, पंचामृत, सूजी का हलवा, ताजा माखन-मिश्री और फलों का भोग लगाएं। मान्यता है कि इससे श्रीहरि प्रसन्न होकर अपना आशीर्वाद प्रदान करते हैं।

जरूर करें इन चीजों का दान

एकादशी के दिन दान-पुण्य करने का अत्यधिक महत्व है। इसलिए इस दिन पूजा संपन्न होने के बाद और पारण से पहले, किसी मंदिर या गरीब व्यक्ति को अन्न, धन, वस्त्र आदि चीजों का दान जरूर करें। ऐसा करने से धन लाभ के योग बनते हैं और जीवन में शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।