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8 अक्टूबर को देवगुरु का अश्लेषा नक्षत्र में गोचर: बैड लक से बचने के लिए अपनाएं ये 5 असरदार उपाय

Published: Mon, 05 Oct 2026 01:15 PM (GMT+05:30)

8 अक्टूबर 2026 को देवगुरु बृहस्पति अश्लेषा नक्षत्र के चौथे चरण में प्रवेश करेंगे, जिसका ज्योतिषीय महत्व बहुत खास है। ...और पढ़ें

देवगुरु बृहस्पति नक्षत्र परिवर्तन

देवगुरु बृहस्पति नक्षत्र परिवर्तन

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वैदिक ज्योतिष शास्त्र में गुरु ग्रह का गोचर बेहद खास माना जाता है। नवग्रहों में गुरु को अत्यंत शुभ और कल्याणकारी ग्रह माना जाता है। यह ज्ञान, धर्म, आध्यात्मिकता, विद्या, संतान, भाग्य, न्याय, दान, समृद्धि और उच्च शिक्षा का प्रमुख कारक माना जाता है। वैदिक ज्योतिष विज्ञान में इसे 'देवताओं का गुरु' भी बताया गया है।

द्रिक पंचांग और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, 8 अक्टूबर 2026 को बृहस्पति शाम 7 बजकर 3 मिनट पर अश्लेषा नक्षत्र के चौथे चरण में प्रवेश करेंगे। गुरु ग्रह का यह नक्षत्र परिवर्तन ज्योतिषीय नजरिए से बेहद खास माना जाता है।

ज्योतिष शास्त्र में अश्लेषा नक्षत्र

वैदिक ज्योतिष के मुताबिक, अश्लेषा नक्षत्र 27 नक्षत्रों में से नौवां (9वां) नक्षत्र है। इस नक्षत्र का स्वामी बुध ग्रह है। देवगुरु बृहस्पति का इस नक्षत्र में प्रवेश करना अच्छे और बुरे परिणाम दोनों दे सकता है। बृहस्पति ज्ञान, बुद्धि, उदारता और समृद्धि का ग्रह माना जाता है।

अलग-अलग नक्षत्रों में इसकी स्थिति व्यक्ति के व्यक्तित्व, व्यवहार और जीवन पथ पर गहरा असर दिखाती है। ऐसे में बृहस्पति अश्लेषा नक्षत्र में हो, तो इसका असर काफी अहम हो सकता है।

अश्लेषा नक्षत्र सर्प प्रतीक से जुड़ा है, जो कि एक रहस्यमयी नक्षत्र माना जाता है। यह नक्षत्र जीवन में जीवन में खुशी और चुनौतियां दोनों ला सकता है। चूंकि 8 अक्टूबर 2026, गुरुवार को गुरु ग्रह अश्लेषा नक्षत्र के चौथे चरण में गोचर होने जा रहा है, तो इसके सकारात्मक और चुनौती भरे असर देखने को मिल सकते हैं।

बृहस्पति का अश्लेषा के चौथे भाव गोचर

वैदिक ज्योतिष के मुताबिक, अश्लेषा नक्षत्र के चौथे पाद में जिसे उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के नाम से भी जाना जाता है, देवगुरु बृहस्पति का प्रभाव खासतौर पर उसकी अनुकूल स्थिति पर निर्भर करता है। अनुकूल स्थिति होने पर व्यक्ति को भौतिक धन और समाज में मान-सम्मान प्राप्त होता है।

वहीं प्रतिकूल स्थिति होने पर संपत्ति के उत्तराधिकार को लेकर परिवार के सदस्यों के बीच कानूनी लड़ाई और विवाद देखने को मिल सकता है। आध्यात्मिक नजरिए से देखा जाए तो यह स्थिति लोगों के जीवन के गहरे पहलुओं को समझने और जीवन के उद्देश्य को समझने के लिए प्रेरित करती है।

देवगुरु बृहस्पति से जुड़े असरदार उपाय

केसर-हल्दी का तिलक
ज्योतिष शास्त्र में गुरु ग्रह का संबंध पीले रंग और खुशहाली से भी जोड़कर देखा जाता है। गुरु ग्रह को मजबूत करने के लिए नियमित रूप से स्नान करना चाहिए। इसके अलावा माथे और नाभि पर केसर या हल्दी का तिलक लगाना भी शुभ माना जाता है।

विष्णु सहस्रनाम का पाठ
बृहस्पति ग्रह की मजबूती के लिए भगवान विष्णु की उपासना बेहद शुभ मानी जाती है। इसलिए नियमित रूप से प्रत्येक गुरुवार को विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना चाहिए।

पीली वस्तुओं का दान
बृहस्पति गोचर के दौरान जरूरतमंदों को पीले रंग की वस्तु दान करना भी शुभ माना जाता है। दान के रूप में आप चने की दाल, केले, पीले कपड़े या धार्मिक पुस्तक दान कर सकते हैं।

केले के पेड़ की पूजा
प्रत्येक गुरुवार को सुबह उठने के बाद केले के पेड़ में पानी डालना चाहिए। इसके अलावा उसमें थोड़ी हल्दी, चने की दाल या गुड़ का मिश्रण जरूर हो। इसके साथ ही 'ऊं बृं बृहस्पतये नमः' मंत्र का जाप करना भी उचित माना जाता है।

गौ माता की सेवा
बृहस्पति गोचर के दौरान मुख्य रूप से गायों की सेवा करने के साथ उन्हें रोटी, चारा और घास खिलाना सही माना जाता है। ऐसा करने से गुरु के अशुभ प्रभावों से मुक्ति मिलती है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।