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आज रखा जा रहा है हरतालिका तीज का व्रत, यहां पढ़ें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, कथा और आरती

Published: Mon, 14 Sep 2026 06:10 AM (IST)Updated: Mon, 14 Sep 2026 08:12 AM (IST)

आज 14 सितंबर को हरतालिका तीज 2026 का व्रत रखा जा रहा है, जो महादेव और मां पार्वती की कृपा ...और पढ़ें

कैसे करें हरतालिका तीज का व्रत (AI-Generated image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वैदिक पंचांग के अनुसार, आज यानी 14 सितंबर (Hartalika Teej 2026) को हरतालिका तीज का पर्व मनाया जा रहा है। यह दिन महादेव और मां पार्वती की कृपा प्राप्त करने के लिए शुभ माना जाता है। इस व्रत को करने से अखंड सौभाग्य और मनचाहा वर मिलता है। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में जानते हैं पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और कथा के बारे में।

हरतालिका तीज 2026 डेट और टाइम (Hartalika Teej 2026 Date and Time)

भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि की शुरुआत- 13 सितंबर को सुबह 07 बजकर 08 मिनट पर
भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि का समापन- 14 सितंबर को सुबह 07 बजकर 06 मिनट पर
वैदिक पंचांग के अनुसार, आज यानी 14 सितंबर को हरतालिका तीज व्रत किया जा रहा है।

शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 04 बजकर 44 मिनट से 05 बजकर 30 मिनट तक
अभिजीत मुहूर्त- दोपहर 12 बजकर 02 मिनट से 12 बजकर 51 मिनट तक
विजय मुहूर्त- दोपहर 02 बजकर 30 मिनट से 03 बजकर 19 मिनट तक
गोधूलि मुहूर्त- शाम 06 बजकर 36 मिनट से 07:00 बजे तक
अमृत काल- सुबह 07 बजकर 18 मिनट से 08 बजकर 57 मिनट तक

हरतालिका तीज पूजा विधि (Hartalika Teej Puja Vidhi)

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद निर्जला व्रत का संकल्प लें।
  • मिट्टी से महादेव और मां पार्वती की प्रतिमा बनाएं।
  • उनकी चौकी पर स्थापना करें।
  • महादेव का पंचामृत से अभिषेक कर उन्हें बेलपत्र, धतूरा, भांग और सफेद फूल अर्पित करें।
  • मां पार्वती को सुहाग का पूरा सामान अर्पित करें।
  • दीपक जलाकर आरती करें।
  • व्रत कथा का पाठ करें।
  • फल और मिठाई का भोग लगाएं।
  • अगले दिन स्नान करने के बाद पूजा करें और व्रत का पारण करें।

हरतालिका तीज व्रत कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, महादेव को पति के रूप में पाने के लिए मां पार्वती ने तपस्या की थी। इसलिए उन्होंने बाल्यावस्था से ही अन्न-जल त्यागकर गंगा तट पर कठिन साधना की शुरुआत की थी, जिसकी वजह से उनके पिता पर्वतराज हिमालय अत्यंत दुखी रहने लगे थे।

इसी बीच महर्षि नारद ने पर्वतराज हिमालय के सामने भगवान विष्णु के साथ पार्वती जी का विवाह करवाने का प्रस्ताव रखा। इसे पर्वतराज हिमालय ने स्वीकार कर लिया।

इस बात को सुनकर माता पार्वती बहुत दुखी हुईं। इस बीच मां पार्वती एक घने जंगल की गुफा में चली गईं, जहां उन्होंने भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर एक शिवलिंग बनाया। उस शिवलिंग की मां पार्वती ने पूजा-अर्चना की।

उनकी कठोर साधना से महादेव प्रसन्न हुए और उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार करने का वरदान दिया। तभी से भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर हरतालिका तीज व्रत किया जाता है।

।।शिव जी की आरती।। (Lord Shiv Aarti)

जय शिव ओंकारा ॐ जय शिव ओंकारा ।

ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा ॥ ॐ जय शिव...॥

एकानन चतुरानन पंचानन राजे ।

हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे ॥ ॐ जय शिव...॥

दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे।

त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे ॥ ॐ जय शिव...॥

अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी ।

चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी ॥ ॐ जय शिव...॥

श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे ।

सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ॥ ॐ जय शिव...॥

कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता ।

जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता ॥ ॐ जय शिव...॥

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका ।

प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका ॥ ॐ जय शिव...॥

काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी ।

नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी ॥ ॐ जय शिव...॥

त्रिगुण शिवजीकी आरती जो कोई नर गावे ।

कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे ॥ ॐ जय शिव...॥

।।माता पार्वती की आरती।। (Mata Parvati Ki Aarti)

जय पार्वती माता जय पार्वती माता

ब्रह्म सनातन देवी शुभ फल कदा दाता।

जय पार्वती माता जय पार्वती माता।

अरिकुल पद्मा विनासनी जय सेवक त्राता

जग जीवन जगदम्बा हरिहर गुणगु गाता।

जय पार्वती माता जय पार्वती माता।

सिंह को वाहन साजे कुंडल है साथा

देव वधुजहं गावत नृत्य कर ताथा।

जय पार्वती माता जय पार्वती माता।

सतयुग शील सुसुन्दर नाम सती कहलाता

हेमांचल घर जन्मी सखियन रंगराता।

जय पार्वती माता जय पार्वती माता।

शुम्भ निशुम्भ विदारेहेमांचल स्याता

सहस भुजा तनुधरिके चक्र लियो हाथा।

जय पार्वती माता जय पार्वती माता।

सृष्ट‍ि रूप तुही जननी शिव संग रंगराता

नंदी भृंगी बीन लाही सारा मदमाता।

जय पार्वती माता जय पार्वती माता।

देवन अरज करत हम चित को लाता

गावत दे दे ताली मन मेंरंगराता।

जय पार्वती माता जय पार्वती माता।

श्री प्रताप आरती मैया की जो कोई गाता

सदा सुखी रहता सुख संपति पाता।

जय पार्वती माता मैया जय पार्वती माता।

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