जन्माष्टमी व्रत पारण 2026: व्रत खोलने से पहले जरूर जानें ये नियम, क्या खाकर करें व्रत का समापन
धार्मिक शास्त्रों में जन्माष्टमी व्रत पारण का सही समय और तरीका बताया गया है। व्रत खोलने के लिए भगवान कृष्ण ...और पढ़ें
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जन्माष्टमी व्रत पारण । (Picture Credit- AI Generated)
HighLights
व्रत पारण मध्यरात्रि या अगले दिन सूर्योदय पर।
भगवान कृष्ण के प्रसाद से करें व्रत की शुरुआत।
पारण के बाद हल्का और सुपाच्य भोजन लें।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में जन्माष्टमी का पर्व भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस दिन भक्त भगवान श्रीकृष्ण के प्रति श्रद्धा से व्रत रखते हैं। दिनभर व्रत रखने के बाद रात में भगवान कृष्ण के जन्म के समय पूजा-अर्चना की जाती है और उन्हें भोग लगाया जाता है। इसके बाद व्रत का पारण किया जाता है। जन्माष्टमी के व्रत का पारण बहुत खास होता है। यह अन्य रखे गए व्रतों के पारण से अलग होता है। इसमें व्रत वाले दिन ही उपवास खोल लिया जाता। साथ ही इस व्रत के पारण में अन्न खाना भी अनिवार्य है। तो चलिए जानते हैं कृष्ण जन्माष्टमी के पारण की विधि और व्रत खोलते वक्त क्या खाना चाहिए।
रात 12 बजे के बाद किया जाता है पारण
मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मध्यरात्रि में हुआ था। इसलिए जन्माष्टमी की रात करीब 12 बजे भगवान के जन्म का उत्सव मनाया जाता है। इस दौरान लड्डू गोपाल का अभिषेक, पूजन, आरती और भोग लगाया जाता है।
कई लोग भगवान के जन्म और पूजा के बाद प्रसाद ग्रहण करके उसी समय व्रत खोल लेते हैं । यानी रात 12 बजे के बाद इस व्रत का पारण किया जा सकता है। वहीं, कुछ लोग अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण करते हैं।
सबसे पहले लें भगवान का प्रसाद
व्रत खोलते समय सबसे पहले भगवान श्रीकृष्ण को अर्पित किया गया प्रसाद ग्रहण करना शुभ माना जाता है। पारण की शुरुआत चरणामृत, माखन-मिश्री, धनिया पंजीरी या ताजे फल से होनी चाहिए है। चरणामृत ग्रहण करने के बाद थोड़ा प्रसाद लेकर व्रत खोलें।
जन्माष्टमी पर रात में ही क्यों खोला जाता है व्रत?
जन्माष्टमी पर मध्यरात्रि का विशेष महत्व माना जाता है, क्योंकि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म इसी समय हुआ था। इसी कारण भक्त रात 12 बजे भगवान का जन्मोत्सव मनाते हैं।
जन्म के बाद बाल कृष्ण का अभिषेक किया जाता है। उन्हें नए वस्त्र पहनाए जाते हैं और माखन-मिश्री, पंजीरी, फल आदि का भोग लगाया जाता है। इसके बाद कई स्थानों पर भक्त भगवान का प्रसाद ग्रहण करके व्रत का पारण करते हैं।
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