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राखी में क्यों लगाई जाती हैं 3 गांठें? ज्योतिषी ने बताया ब्रह्मा, विष्णु और महेश से जुड़ा इसका गहरा रहस्य

Updated: Sun, 23 Aug 2026 02:35 PM (IST)

रक्षाबंधन (Raksha Bandhan 2026) पर राखी में तीन गांठें बांधने का शास्त्रीय विधान है, जो ब्रह्मा, विष्णु और महेश का प्रतीक हैं।

राखी की 3 गांठों का महत्व (Picture Credit- AI Generated)

राखी की 3 गांठों का महत्व (Picture Credit- AI Generated)

HighLights

  1. राखी में तीन गांठें त्रिदेवों ब्रह्मा, विष्णु, महेश का प्रतीक हैं।

  2. पहली गांठ भाई की लंबी आयु, दूसरी समृद्धि, तीसरी शांति देती है।

  3. राखी हमेशा शुभ मुहूर्त में बांधें, भद्रा काल और काले कपड़े टालें।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हर साल सावन पूर्णिमा के दिन रक्षाबंधन का पर्व बेहद उत्साह के साथ मनाया जाता है। वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार यह पर्व 28 अगस्त (Raksha Bandhan 2026 Date) को मनाया जाएगा। यह पर्व यह भाई-बहन के अटूट प्रेम, विश्वास का पवित्र प्रतीक है।

इस खास अवसर पर बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं और तिलक करती हैं। साथ ही भाई की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की प्रभु से कामना करती हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि राखी बांधते समय बहनें हमेशा तीन गांठें ही क्यों लगाती हैं। यह परंपरा प्राचीन समय से चली आ रही है, तो ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको एस्ट्रोपत्री के श्री चंद्रेश शर्मा जी के अनुसार बताते हैं इसके पीछे की वजह के बारे में।

श्री चंद्रेश शर्मा जी बताते हैं कि रक्षाबंधन पर बहन जब भाई की कलाई पर रक्षासूत्र बांधती है, तो उसमें 3 गांठें लगाने का शास्त्रीय विधान है।

raksha bandhan 2026 (3)

 

"त्रिदेव रक्षा कुर्वन्तु सर्वदा।" — शास्त्रीय मान्यता

त्रिदेवों का प्रतीक और उनका महत्व

ये 3 गांठें त्रिदेवों- ब्रह्मा, विष्णु और महेश का प्रतीक मानी जाती हैं:
पहली गांठ (ब्रह्मा): भाई की लंबी आयु और स्वास्थ्य के लिए लगाई जाती है।
दूसरी गांठ (विष्णु): समृद्धि और सुरक्षा प्रदान करती है।
तीसरी गांठ (शिव)

मानसिक शांति और दुष्ट शक्तियों से रक्षा के लिए होती है।

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ग्रहों और जीवन के पुरुषार्थों से कनेक्शन

इसके अलावा, ये 3 गांठें नवग्रहों के अशुभ प्रभाव को शांत करने और भाई-बहन के रिश्ते को धर्म, अर्थ और काम के सही संतुलन से बांधने का भी प्रतिनिधित्व करती हैं।

इन बातों का रखें ध्यान

  • राखी बांधने से पहले इस बात का रखें कि भद्रा काल न हो। शास्त्रों के अनुसार, भद्रा काल में राखी नहीं बांधनी चाहिए। इस दौरान शुभ और मांगलिक काम करने की मनाही है।
  • राखी हमेशा शुभ मुहूर्त में ही बांधनी चाहिए।
  • राखी बांधते समय भूलकर भी भाई और बहन को काले रंग के कपड़े नहीं पहनने चाहिए। ऐसा माना जाता है कि काला रंग नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है।
  • वास्तु शास्त्र के अनुसार, राखी बंधवाते समय भाई का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। राखी बंधवाते समय इस दिशा में मुख होना शुभ माना जाता है। वहीं, बहन के मुख पश्चिम या दक्षिण दिशा की तरफ होना चाहिए।
  • राखी को बांधते समय बहन को किसी बारे में गलत नहीं सोचना चाहिए।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।