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देव दीवाली से गंगा स्नान तक: जानिए नवंबर 2026 में कब है कार्तिक पूर्णिमा और क्या है इसकी पूजा विधि

Published: Thu, 29 Oct 2026 05:00 PM (IST)

हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व है, खासकर कार्तिक पूर्णिमा जिसे त्रिपुरी पूर्णिमा और देव दिवाली भी कहते ...और पढ़ें

नवंबर में कार्तिक पूर्णिमा की तारीख और महत्व

नवंबर में कार्तिक पूर्णिमा की तारीख और महत्व

HighLights

  1. पूर्णिमा तिथि का हिंदू धर्म में विशेष महत्व माना जाता है।

  2. कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा और देव दिवाली भी कहते हैं।

  3. इस दिन देवी शक्ति और भगवान विष्णु की पूजा शुभ है।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व है। पूर्णिमा जिसे अंग्रेजी में फुल मून और हिंदी में पूर्णिमा या पौर्णिमा के नाम से जाना जाता है। यह चांद का 15वां चरण होता है, जब चांद शुक्ल पक्ष में आखिरी स्टेज में पहुंचता है।

इस साल नवंबर महीने में पूर्णिमा 24 नवंबर 2026, मंगलवार को है, जिसे कार्तिक पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा, त्रिपुरारी पूर्णिमा, देव दीवाली, महाकार्तिकी और गंगा स्नान पर्व के नाम से भी जाना जाता है।

कोई भी नया काम या कुछ नया शुरुआत करने के लिए पूर्णिमा तिथि को बेहद शुभ माना जाता है। पूर्णिमा के मौके पर देवी शक्ति की पूजा और खुशहाल जीवन के लिए उनका अपार आशीर्वाद प्राप्त करना बेहद शुभ माना जाता है। इसके अलावा पूर्णिमा पर भगवान विष्णु की सत्यनारायण के रूप में पूजा करना भी अच्छा माना जाता है।

पूर्णिमा व्रत से जुड़ी रस्में

पूर्णिमा पर व्रत रखने वाले लोग अपने दिन की शुरुआत पवित्र स्नान से करते हैं। घर और खासकर पूजा कक्ष को अच्छे से साफ किया जाता है और भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। जो भी लोग इस दिन व्रत रखते हैं वो फलाहार ही करते हैं।

पूर्णिमा पर पूजा के दौरान भगवान को चढ़ाया गया प्रसाद लोगों में बांट दिया जाता है। पूजा के बाद दिन के आखिर में पूरे चांद को देखने के बाद और प्रसाद खाकर ही व्रत का पारण किया जाता है।

पूर्णिमा से जुड़े प्रमुख त्योहार

पूर्णिमा य फुल मून के दौरान आमतौर पर व्रत रखने के साथ शक्तिशाली त्रिदेवी (देवी पार्वती, मां लक्ष्मी और मां सरस्वती) या अपने देवताओं को स्मरण करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक इस दिन व्रत रखने से व्यक्ति अपने सभी पापों से मुक्ति पा लेता है।

पूर्णिमा की तिथि भगवान इंद्र की पूजा के लिए भी समर्पित है। पौराणिक कथाओं के मुताबिक, जब धरती पर इंद्र ने भगवान शिव की पूजा करके अपने सभी पापों से मुक्ति पाई थी। माना जाता है कि यह दक्षिण भारत के मदुरै में चित्रा जिसे 'चैत्र पूर्णिमा' के नाम से भी जाना जाता है, उस दिन हुआ था। इस दिन मदुरै मीनाक्षी अम्मन मंदिर में देवेंद्र पूजा होती है।

पूर्णिमा व्रत रखने के लाभ

हिंदू मान्यताओं के मुताबिक, पूर्णिमा के मौके पर व्रत रखने से कई फायदे मिलते हैं-

दिव्य स्त्री शक्ति की पूजा करने से समृद्धि, वीरता, ज्ञान, पैसा और खुशी प्राप्त होती है।

सत्यनारायण के रूप में भगवान विष्णु की पूजा करने से जातकों को खुशहाल जीवन की प्राप्ति होती है।

इसके अलावा मन और शरीर दोनों ही तरोताजा रहता है।

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