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करवा चौथ की पूजा में 7 बार ही क्यों फेरा जाता है करवा? 90% लोग नहीं जानते होंगे इस रस्म का महत्व

Published: Mon, 26 Oct 2026 02:30 PM (IST)

करवा चौथ पर सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। इस ...और पढ़ें

करवा चौथ पूजा में 7 बार करवा फेरने का महत्व (Picture Credit: AI Generated)

करवा चौथ पूजा में 7 बार करवा फेरने का महत्व (Picture Credit: AI Generated)

HighLights

  1. करवा चौथ पर सुहागिनें पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं।

  2. पूजा में करवे को 7 बार घुमाने की रस्म निभाई जाती है।

  3. यह रस्म शादी के सात वचनों और खुशहाली का प्रतीक है।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में करवा चौथ का व्रत मुख्य रूप से सुहागिन महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार की खुशहाली की कामना के लिए दिनभर निर्जला उपवास करती हैं और रात में भगवान गणपति और माता पार्वती की पूजा करती हैं।

इस व्रत का पारण चांद निकलने के बाद चंद्र दर्शन के बाद किया जाता है। इस दिन मुख्य रूप से चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है और पति की दीर्घायु की कामना की जाती है। वहीं करवा चौथ की पूजा में खास माना जाता है मिट्टी या धातु का करवा। इसमें पूजा के समय सींकें लगाई जाती हैं और इसी से पूजा पूजन किया जाता है।

इस दौरान एक रस्म होती है करवा फेरने के या करवा बदलने की। इसमें करवा को 7 बार घुमाया जाता है और फिर पूजा के स्थान पर ही रख दिया जाता है। आइए आपको बताते हैं करवा को 7 बार फेरने के रहस्य के बारे में।

करवा चौथ में 7 बार करवा फेरने का महत्व

करवा चौथ की पूजा के दौरान महिलाएं एक-दूसरे के करवे को सात बार फेरती हैं या करवा बदलने की रस्म निभाती हैं। हालांकि, यह परंपरा अलग-अलग स्थानों के अनुसार अलग भी हो सकती है, लेकिन इसे कई स्थानों पर पूजा एक समय निभाया जाता है। यहां तक कि इस रस्म के बिना पूजा को पूर्ण नहीं माना जाता है।

कुछ स्थानों पर करवे के स्थान पर थाली को फेरा या बदला जाता है, लेकिन इसे भी 7 की संख्या में ही घुमाया जाता है। अगर हम इस संख्या के धार्मिक महत्व की बात करें, तो सात अंक को शुभता का और पूर्णता का प्रतीक माना जाता है। इसे वैवाहिक जीवन में खुशहाली बनाए रखने की संख्या माना जाता है। इसी वजह से शादी के समय सात फेरों को रस्म भी निभाई जाती है।

कैसे की जाती है करवा फेरने की रस्म?

इस रस्म में करवा को 7 बार फेरा या घुमाया जाता है और फिर महिलाएं इसे एक दूसरे से बदलती हैं। इस दौरान महिलाएं 'ले सुहागन ले करवा, दे सुहागन दे करवा' बोलती हैं। करवा फेरते समय ही कथा सुनी जाती है और इस रस्म के बाद चंद्रमा निकलने का इंतजार किया जाता है। अगर कोई महिला अकेले ही करवा चौथ की पूजा करती है तो वो दोनों करवा को आपस में बदलती है और करवा चौथ व्रत कथा का पाठ करती है।

करवा को 7 बार घुमाना शादी के 7 वचनों का प्रतीक

करवा चौथ पूजा में करवा को 7 बार फेरने की यह रस्म इसलिए की जाती है क्योंकि ये शादी में बोले जाने वाले सात वचनों और सात फेरों का प्रतीक होती है।

धार्मिक मान्यताओं में सात अंक को हमेशा से ही शुभता, पूर्णता और वैवाहिक जीवन की मजबूती से जोड़कर देखा जाता है। हिंदू शादी में और वैवाहिक जीवन में सात संख्या को अत्यंत पवित्र माना जाता है, इसलिए शादी या वैवाहिक जीवन से जुड़ी किसी भी रस्म में 7 संख्या का हो प्रयोग होता है। इसी वजह से करवा घुमाने में भी इसी संख्या का ध्यान रखा जाता है।

करवा चौथ पर रस्मों के पीछे एक भावना वैवाहिक जीवन में खुशहाली बनाए रखने की होती है और इसी वजह से हर रस्म का अपना अलग महत्व होता है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।