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25 अगस्त को बन रहा मंगला गौरी और भौम प्रदोष व्रत का दुर्लभ संयोग, इस शुभ मुहूर्त में करें पूजा

Updated: Mon, 24 Aug 2026 07:00 PM (GMT+05:30)

25 अगस्त को मंगला गौरी और भौम प्रदोष व्रत का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिसमें सुहागिन महिलाएं और अविवाहित कन्याएं पूजा कर सकती हैं।

मंगला गौरी व भौम प्रदोष का शुभ संयोग (Picture Credit- AI Generated)

मंगला गौरी व भौम प्रदोष का शुभ संयोग (Picture Credit- AI Generated) 

HighLights

  1. 25 अगस्त को मंगला गौरी और भौम प्रदोष व्रत का संयोग।

  2. शिव पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 07:49 से 09:57 बजे तक।

  3. वैवाहिक सुख और विवाह बाधा दूर करने के लिए व्रत।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सावन के मंगलवार के दिन मंगला गौरी व्रत किया जाता है। इस व्रत को सुहागिन महिलाएं और अविवाहित कन्याएं करती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को करने से वैवाहिक जीवन खुशहाल रहता है और अविवाहित कन्याओं के विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं।

वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार सावन का आखिरी और चौथा मंगला गौरी व्रत 25 अगस्त को है। इस बार मंगला गौरी व्रत के दिन प्रदोष व्रत का भी दुर्लभ संयोग बन रहा है। प्रदोष व्रत भगवान शिव को और मंगला गौरी व्रत माता पार्वती को समर्पित है। अब आप सोच रहे होंगे कि एक साथ दोनों व्रत कैसे करें। आइए इस आर्टिकल में हम आपको बताते हैं कि प्रदोष व्रत और मंगला गौरी व्रत एक साथ कैसे करें।

प्रदोष व्रत 2026 डेट और शुभ मुहूर्त (Pradosh Vrat 2026 Date and Shubh Muhurat)

वैदिक पंचांग के अनुसार, सावन माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 25 अगस्त को प्रातः 06 बजकर 20 मिनट से होगी। वहीं, इस तिथि का समापन 26 अगस्त को प्रातः 07 बजकर 59 मिनट पर होगा। ऐसे में 25 अगस्त को ही प्रदोष व्रत किया जाएगा। इस दिन शिव पूजा का सही समय शाम को 07 बजकर 49 मिनट से 09 बजकर 57 मिनट तक है। यह व्रत मंगलवार के दिन रखा जा रहा है, इसी वजह से इसे भौम प्रदोष कहा जाता है।

शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 05 बजकर 06 मिनट से 05 बजकर 48 मिनट तक
अभिजीत मुहूर्त- दोपहर 12 बजकर 43 मिनट से 01 बजकर 47 मिनट तक
विजय मुहूर्त- दोपहर 03 बजकर 23 मिनट से 04 बजकर 16 मिनट तक
रवि योग- दोपहर 01 बजकर 21 मिनट से 26 अगस्त को सुबह 06 बजकर 32 मिनट तक

कैसे करें मंगला गौरी व्रत की पूजा?

  • सुबह स्नान करने के बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें।
  • एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर मां पार्वती की प्रतिमा को विराजमान करें।
  • देवी जी को श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें।
  • दीपक जलाकर आरती करें और व्रत कथा का पाठ करें।
  • पार्वती चालीसा का पाठ और मंत्रों का जप करें।
  • सूजी का हलवा, फल और मिठाई आदि चीजों का भोग लगाएं।
  • देवी से जीवन में सुख-शांति की प्राप्ति के लिए कामना करें।
  • पूजा करने के बाद मंदिर में या गरीब लोगों को अन्न-धन आदि का दान करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि दान करने से धन लाभ के योग बनते हैं।

प्रदोष व्रत पूजन

  • शाम को स्नान करने के बाद उत्तर-पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें।
  • इसके बाद शुभ मुहूर्त में शिवलिंग का जल, दूध, दही, शहद और शक्कर से अभिषेक करें।
  • अब प्रभु को बेलपत्र, धतूरा और आक के फूल चढ़ाएं।
  • सच्चे मन से आरती करें।
  • व्रत कथा और शिव चालीसा का पाठ करें।
  • 'ॐ नमः शिवाय' या महामृत्युंजय मंत्र का जप करें।
  • भगवान शिव को खीर, सूजी या आलू के हलवे आदि का भोग लगाएं। मान्यता है कि इन चीजों का भोग लगाने से महादेव प्रसन्न होते हैं और अपनी कृपा बरसाते हैं।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।