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पर्युषण पर्व 2026: कब से शुरू हो रहा है जैन धर्म का महापर्व? सही तारीख, महत्व और नियम यहां पढ़ें

Published: Sun, 06 Sep 2026 02:00 PM (IST)

जैन धर्म का महापर्व पर्युषण 8 से 15 सितंबर 2026 तक मनाया जाएगा, जो आत्म-चिंतन और शुद्धि का समय है। ...और पढ़ें

जैन धर्म में क्यों मनाया होता है पर्युषण पर्व? (Picture Credit: AI Generated)

जैन धर्म में क्यों मनाया होता है पर्युषण पर्व? (Picture Credit: AI Generated)

HighLights

  1. पर्युषण पर्व 8 से 15 सितंबर 2026 तक मनाया जाएगा।

  2. यह आत्म-चिंतन, शुद्धि और क्षमा का पवित्र समय है।

  3. अहिंसा, उपवास और विशेष खान-पान नियमों का पालन होता है।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सभी धर्मों के अपने कुछ पर्व और रीती-रिवाज होते हैं जिनका पालन करना बहुत जरूरी माना जाता है। जिस तरह हिंदू धर्म में होली, दीपावली, गणेश चतुर्थी और दुर्गा पूजा का पर्व माना जाता है उसी तरह से जैन धर्म में पर्युषण पर्व मनाया जाता है।

इसे जैन धर्म का महापर्व भी कहा जाता है और ऐसा कहा जाता है कि इस दौरान जैन धर्म के लोग कई नियमों का पालन करते हैं। पर्युषण पर्व दुनियादारी के कामों को सोच-समझकर कम करने और मन की ऐसी स्थिति को बनाने का मौका देता है जो आत्मा की गहराई में जाने वाली यात्रा में मदद करे।

यह पर्व आत्म-चिंतन, आत्म-शुद्धि और क्षमा मांगने व क्षमा करने का एक पवित्र समय माना जाता है। आइए आपको बताते हैं इस साल कब से शुरू होगा यह पर्व और इस दौरान किन नियमों का पालन जरूरी है।

कब से शुरू हो रहा है पर्युषण पर्व?

इस साल जैन धर्म का महापर्व 08 सितंबर से शुरू होकर 15 सितंबर तक मनाया जाएगा। इस पर्व की शुरुआत के पहले दिन 08 सितंबर को उपवास, स्वाध्याय और अहिंसा का संकल्प लिया जाएगा। पर्व के दूसरे दिन 09 सितंबर को आत्म-चिंतन: का दिन होगा और इस दिन कर्मों को दूर करने के बारे में साधु-साध्वियों के प्रवचन सुनना लाभप्रद होगा।

इस पर्व के तीसरे दिन यानी कि 10 सितंबर को पवित्र कल्प सूत्र के स्वागत के लिए एक भव्य जुलूस निकाला जाएगा। पर्व के चौथे दिन कल्पसूत्र का पाठ आधिकारिक तौर पर शुरू होता है, जिसमें तीर्थंकरों के जीवन का वर्णन होता है। इसके पांचवें दिन भगवान महावीर के जन्म का उत्सव मनाया जाएगा।

पर्युषण पर्व के छठे दिन से आखिरी दिन तक अहिंसा पर ज्यादा ध्यान देना, खान-पान के कड़े नियमों का पालन करना और सांसारिक कामों से दूर रहना जरूरी माना जाता है। पर्व का आठवां दिन यानी 15 सितंबर को संवत्सरी और क्षमा-याचना का दिन माना जाएगा और क्षमा मांगने के साथ ही पर्व का समापन होगा।

पर्युषण पर्व का महत्व

जैन धर्म के पर्युषण का पवित्र पर्व साल में एक बार आता है। जो लोग अपनी आंतरिक यात्रा शुरू करना चाहते हैं या उसे और गहरा करना चाहते हैं, उनके लिए यह सबसे अच्छा समय माना जाता है। इस दौरान, पूरा जैन समुदाय अपने मन की शांति के केंद्र की ओर एक आंतरिक यात्रा पर निकलता है।

तपस्या, ध्यान, धर्मग्रंथों के अध्ययन और क्षमा-भाव जैसे कार्यों से भक्तों में जो सामूहिक आध्यात्मिक ऊर्जा पैदा होती है, वह एक ऐसा माहौल बनाती है जो व्यक्तिगत बदलाव के लिए प्रेरित करता है। पर्युषण पर्व , जैन धर्म के मुख्य सिद्धांतों को जानने का भी एक माध्यम है। यह लोगों को अहिंसा, आत्म-अनुशासन और करुणा पर इस धर्म के प्रभाव को समझने का मौका देता है और अक्सर उनके जीवन भर चलने वाले आध्यात्मिक रास्ते की शुरुआत बन जाता है।

पर्युषण पर्व में किन नियमों का पालन जरूरी है?

पर्युषण पर्व के दौरान जैन धर्म के लोगों को कुछ नियमों का पालन करने की सलाह दी जाती है। आइए जानें उनके बारे में-

  • इस दौरान खाने-पीने से जुड़ी कुछ पाबंदियां होती हैं जैसे इस 8 दिनों में हरी सब्जियां नहीं खानी चाहिए और आलू, प्याज या लहसुन भी नहीं खाना चाहिए, क्योंकि ये जमीन के नीचे उगने वाली सब्जियां हैं और इनका सेवन जैन धर्म में वर्जित होता है।
  • इस दौरान सूरज डूबने से पहले खाना खा लेना चाहिए और रात के समय कोई भी भोजन नहीं करना चाहिए। आप इस दौरान पानी जा जूस का सेवन कर सकते हैं।
  • शाम के समय प्रतिक्रमण करना इस दौरान जरूरी माना जाता है। प्रतिक्रमण एक प्रकार का ध्यान होता है जो जैन धर्म के लोगों का ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है।
  • इस दौरान आपको बाहरी आवरण से दूर ही रहना चाहिए और घर में भी कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। जैसे आपको ज्यादा टीवी देखने से बचना चाहिए। इससे आपकी इन्द्रियों पर नियंत्रण बना रहता है।
  • इस दौरान किसी बाहरी से मिलने से बचना चाहिए और अहिंसा का पालन करना चाहिए।

अगर आप भी जैन धर्म के महापर्व के इन नियमों का पालन करेंगे तो आपको जीवन में संयम और आचरण सीखने में मदद मिलेगी।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।