संतान सप्तमी के दिन अनजाने में भी न करें ये 5 गलतियां, वरना व्यर्थ हो सकता है पूजा का फल!
संतान सप्तमी का व्रत भाद्रपद शुक्ल पक्ष की सप्तमी को संतान की सुरक्षा और अच्छे स्वास्थ्य के लिए रखा जाता ...और पढ़ें

संतान सप्तमी व्रत में न करें ये 5 भूलें, संतान को मिलेगा दीर्घायु का आशीर्वाद (Picture Credit: AI Generated)
HighLights
तामसिक भोजन और लहसुन-प्याज का सेवन वर्जित है।
बिना संकल्प व्रत आरंभ न करें, संतान सप्तमी कथा पढ़ें।
सात गांठ वाला धागा पूजा के बाद हाथ में बांधें।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म के प्रमुख व्रत-त्योहारों में से एक है संतान सप्तमी का व्रत, यह हर साल भाद्रपद शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को रखा जाता है। इस व्रत को माताएं अपनी संतान की सुरक्षा और अच्छी सेहत की कामना में रखती हैं और मुख्य रूप से माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा की जाती है।
इस दिन संतान के लिए पूरे दिन व्रत उपवास किया जाता है और सात गांठों वाला एक धागा अर्पित किया जाता है। यही नहीं इस दिन भोग के लिए 7 पूड़ियां शिव जी को और 7 पूड़ियां माता पार्वती को अर्पित करनी चाहिए।
इस साल संतान सप्तमी का व्रत 18 सितंबर को मनाया जाएगा और इस दिन पूजा के साथ आपको कुछ विशेष नियमों का पालन भी करने की सलाह दी जाती है, जिससे पूजा का फल मिले और संतान को दीर्घायु का आशीर्वाद मिले। आइए जानें इन दिन कौन से काम वर्जित होते हैं।
भूलकर भी न करें तामसिक भोजन
अगर आप संतान सप्तमी का व्रत करती हैं, तो आपको इस दिन पूरे दिन सात्विक भोजन ही करना चाहिए। अगर आप व्रत करती हैं, तो आप फलाहार का सेवन करें और यदि व्रत नहीं भी कर रही हैं तब भी तामसिक भोजन करने से बचना जरूरी है। भूलकर भी आप इस दिन भोजन में लहसुन प्याज को शामिल न करें। यदि आप तामसिक चीजों का उपयोग करती हैं और पूजन भी कर रही हैं, तो यह पूजा स्वीकार्य नहीं मानी जाती है।
व्रत का संकल्प किए बिना ही व्रत करना
किसी भी व्रत के लिए संकल्प बहुत जरूरी है अगर आप संतान सप्तमी के व्रत के दिन बिना संकल्प के ही व्रत आरंभ करती हैं, तो इसका पूर्ण फल नहीं मिलता है।
आपको इस व्रत को हमेशा संकल्प के साथ ही पूरा करना चाहिए और अगर आप दिनभर व्रत करने के बाद इसका पारण अगले दिन करती हैं, तो वैसा ही संकल्प लें। कई लोग इस व्रत की पूजा करने के बाद व्रत का पारण उसी दिन कर देते हैं। आपको पूजा और व्रत का संकल्प उसे के अनुसार करना चाहिए।
बिना कथा के पूजा नहीं मानी जाती है पूर्ण
कई लोग जल्दबाजी में संतान सप्तमी की पूजा तो कर लेते हैं, लेकिन व्रत कथा नहीं पढ़ते हैं। ऐसा करने से व्रत का पूरा फल नहीं मिलता है। आप जब भी पूजा के साथ संतान सप्तमी व्रत कथा का पाठ करें। उसके बाद आरती और प्रसाद वितरण करना चाहिए।
पूजा का धागा न बांधना
संतान सप्तमी की पूजा में सात गांठ वाला धागा बांधना जरूरी होता है और इसे पूजा के बाद माताओं को हाथ में बांधना चाहिए। यदि संभव ही तो इस धागे को एक साल तक बांधें, लेकिन आप ऐसा नहीं कर सकती हैं, तो सात दिन तक इस धागे को जरूर धारण करें। पूजा के बाद हाथ में अगर धागा नहीं बांधा जाता है, तो पूजा का पूर्ण फल नहीं मिलता है।
व्रत में कैंची या सुई का इस्तेमाल करना
वैसे तो किसी भी व्रत में धारदार चीजों का इस्तेमाल करने की मनाही होती है, लेकिन आपको संतान सप्तमी के व्रत के दिन भूलकर भी किसी धार वाली चीज जैसे कैंची या सुई का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। आप इस दिन कपड़े की सिलाई से बचें।
अगर आप भी संतान सप्तमी का व्रत करती हैं,तो यहां बताई गलतियों से बचना चाहिए जिससे आपको पूजा और व्रत का पूर्ण फल मिलता है।
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