सावन में सोमवार को ही क्यों रखा जाता है व्रत? शिव कृपा से जुड़े 3 बड़े रहस्य
सावन में सोमवार का व्रत क्यों रखा जाता है? जानिए माता पार्वती की तपस्या, समुद्र मंथन की कथा और शिव-चंद्रमा कनेक्शन का रहस्य।

जानिए इसके पौराणिक रहस्य (AI-Generated Image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सावन का महीना आते ही चारों ओर भक्त शिव की भक्ति में लीन हो जाते हैं। पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान से माहौल भक्तिमय हो जाता है। वैसे तो पूरे महीने पूजा-पाठ की गूंज रहती है, लेकिन सोमवार के दिन मंदिरों में एक अलग ही रौनक नजर आती है। लेकिन, क्या आपने कभी सोचा है कि सावन में खास तौर पर 'सोमवार' का ही व्रत क्यों रखा जाता है? चलिए इस आर्टिकल में जानेंगे कि सावन के पूरे महीने क्यों सोमवार का ही दिन खास होता है।
1. माता पार्वती की तपस्या
पौराणिक कथाओं के मुताबिक, माता पार्वती भगवान शिव को अपने पति के रूप में पाना चाहती थीं। इसलिए उन्होंने कई सालों तक कठोर तपस्या की। मान्यता है कि उन्होंने सावन के महीने में सोमवार के दिन ही व्रत रखकर भोलेनाथ की आराधना की थी। उनकी सच्ची भक्ति से खुश होकर शिव जी ने उन्हें अपनी अर्धांगिनी स्वीकार किया था। यही वजह है कि आज भी कुंवारी लड़कियां मनचाहा वर पाने और शादीशुदा औरतें अपने परिवार की खुशहाली के लिए यह व्रत रखती हैं।
2. चंद्रमा और भोलेनाथ का कनेक्शन
सोमवार का दिन चंद्र देव को समर्पित है। हमारी पुरानी कहानियों में चंद्रमा को 'सोम' भी कहा गया है। भोलेनाथ अपने माथे पर चंद्रमा धारण किए हैं। इसी वजह से सोमवार शिव जी की पूजा के लिए सबसे खास दिन बन गया। ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को मन का कारक माना गया है, इसलिए कहते हैं कि सोमवार को व्रत रखने से इंसान का मन शांत रहता है और जीवन में सुख-शांति आती है।
3. समुद्र मंथन और नीलकंठ की कथा
एक अन्य कथा समुद्र मंथन से जुड़ी है। मान्यताओं के अनुसार, सावन के महीने में ही देवताओं और असुरों ने मिलकर समुद्र मंथन किया था। इसी में 'हलाहल' विष निकला था। सृष्टि को बचाने के लिए शिव जी ने वह विष ग्रहण किया। जिससे उनका कंठ नीला पड़ गया। शिव के शरीर की उस जलन को मिटाने के लिए देवताओं ने उनपर जल और दूध चढ़ाया। तभी से सावन में शिव जी पर जल चढ़ाने और सोमवार को व्रत रखने का विधान शुरू हो गया।
सोमवार व्रत के फायदे और नियम
- सुबह जल्दी नहाकर साफ-सुथरे कपड़े पहनें।
- तांबे के लोटे से शिवलिंग पर जल या गंगाजल चढ़ाएं।
- भोलेनाथ को बेलपत्र, भांग, धतूरा और सफेद फूल बहुत प्रिय है, इन्हें पूजा में शामिल करें।
- पूजा के दौरान मन ही मन 'ॐ नमः शिवाय' का जप करें।
- शाम (प्रदोष काल) को विधि-विधान से आरती करने के बाद ही फलाहार ग्रहण करें।
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