विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

माता सीता ने हनुमान जी को क्यों दिया था अमर होने का वरदान? पढ़ें सुंदरकांड की यह खास कथा

Published: Sat, 12 Sep 2026 08:00 AM (GMT+05:30)

हिंदू धर्म में हनुमान जी को 'संकटमोचन' कहा जाता है और उन्हें अमरता का वरदान प्राप्त है। यह वरदान माता ...और पढ़ें

हनुमान जी के अमर होने की कथा (Picture Credit- AI Generated)

हनुमान जी के अमर होने की कथा (Picture Credit- AI Generated)

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में हनुमान जी को 'संकटमोचन' कहा जाता है, क्योंकि सच्चे मन से उनकी साधना करने से भक्त के जीवन में आने वाले सभी संकट दूर हो जाते हैं और प्रभु की असीम कृपा प्राप्त होती है। भगवान हनुमान का जीवन कई रहस्यों से भरा हुआ है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, हनुमान जी को अमरता का वरदान प्राप्त है। इस बात का वर्णन रामचरितमानस के किष्किंधा कांड और सुंदरकांड में मिलता है। आखिर हनुमान जी को अमरता का वरदान किसने और क्यों दिया? आइए जानते हैं इसके पीछे की पौराणिक कथा और वजह।

कैसे हुए हनुमान जी अमर?

पौराणिक कथा के अनुसार, वनवास के दौरान जब लंकापति रावण ने माता सीता का हरण कर लिया था, तब भगवान श्रीराम ने हनुमान जी को माता सीता की खोज के लिए भेजा था। राम जी की आज्ञा का पालन करते हुए हनुमान जी माता सीता की खोज में निकल पड़े।

lord hanuman

 (Picture Credit- AI Generated)

अशोक वाटिका पहुंचे हनुमान जी

जब हनुमान जी लंका की अशोक वाटिका में माता सीता को खोजते हुए पहुंचे, तो उन्होंने सीता जी को भगवान राम की अंगूठी दी और उन्हें रामकथा सुनाई। इस दौरान हनुमान जी ने माता सीता को ढांढस बंधाते हुए कहा कि भगवान श्रीराम आपको लेने जल्द ही आएंगे।

माता हुईं बेहद प्रसन्न

हनुमान जी की निस्वार्थ सेवा, भक्ति और समर्पण को देखकर माता सीता अत्यंत प्रसन्न और भावुक हुईं। उसी समय माता सीता ने हनुमान जी को अजर-अमर होने का वरदान दिया। इस बात का स्पष्ट उल्लेख श्रीरामचरितमानस के सुंदरकांड की इस चौपाई में मिलता है:

"अजर अमर गुननिधि सुत होहू। करहुं बहुत रघुनायक छोहू॥"

इस चौपाई के माध्यम से मां सीता रामभक्त हनुमान जी को आशीर्वाद देते हुए कहती हैं हे पुत्र! तुम अजर, अमर हो जाओ और सभी सद्गुणों के भंडार बनो। भगवान श्रीराम तुम पर सदैव अपनी अपार कृपा और स्नेह बनाए रखें।

यह भी पढ़ें- सौम्य और शांत माता सीता को क्यों लेना पड़ा रणचंडी का रूप? इस तरह हुआ कुंभकर्ण के पुत्र का वध

यह भी पढ़ें- माता सीता की पूजा में करना न भूलें ये काम, वरना अधूरी रह जाएगी आपकी आराधना

अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।