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भाई-बहन का रिश्ता क्यों माना जाता है सबसे पवित्र? राखी के धागे में छिपा है रहस्य

Updated: Mon, 24 Aug 2026 02:32 PM (IST)

रक्षा बंधन का संदेश बहुत व्यापक है। रक्षा का अर्थ केवल शरीर की रक्षा ही नहीं, बल्कि एक-दूसरे के सम्मान, सपनों, आत्मविश्वास और गरिमा की भी रक्षा करनी है।

भाई-बहन का रिश्ता क्यों है पवित्र

भाई-बहन का रिश्ता क्यों है पवित्र

शैलबाला पण्ड्या (प्रमुख, अखिल विश्व गायत्री परिवार)। राखी का त्योहार आते ही घर-आंगन में एक अलग ही अपनापन उतर आता है। बहन के हाथों से सजी राखी की थाली, मिठाई की खुशबू, माथे पर तिलक और भाई की कलाई पर बंधता प्रेम का धागा, ये सब मिलकर बचपन की अनगिनत यादों को जीवंत कर देते हैं। देखने में राखी का धागा बहुत साधारण होता है, लेकिन इसमें भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और अनकही भावनाओं की पूरी दुनिया समाई होती है।

भाई-बहन का संबंध जीवन के सबसे सहज और आत्मीय संबंधों में से एक है। बचपन में जिस भाई से छोटी-सी बात पर झगड़ा होता है, उसी के लिए बहन बड़े होकर सबसे अधिक चिंतित होती है। जिस बहन की शिकायतों से भाई कभी परेशान होता था, वही बहन दूर चली जाए तो घर का एक कोना सूना लगने लगता है। समय बदलता है, जिम्मेदारियां बढ़ती हैं, शहर और परिस्थितियां बदल जाती हैं, लेकिन बचपन का अपनापन मन में हमेशा जीवित रहता है। इसलिए राखी केवल त्योहार नहीं, बल्कि पुरानी स्मृतियों को फिर से जी लेने का अवसर भी है।

रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रति प्रेम, विश्वास और जिम्मेदारी का बंधन है। बहन जब भाई की कलाई पर राखी बांधती है तो उसके मन में भाई के सुख, स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य की कामना होती है। भाई भी उसके सम्मान, सुरक्षा और खुशी के प्रति अपने दायित्व का संकल्प लेता है। आज रक्षा का अर्थ और व्यापक हो गया है। हमें केवल शरीर की नहीं, बल्कि एक-दूसरे के सम्मान, सपनों, आत्मविश्वास और गरिमा की भी रक्षा करनी है। यही राखी के धागे का वास्तविक अर्थ है।

युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी ने व्यक्ति निर्माण और संस्कारों को समाज निर्माण का आधार माना। उनका प्रेरक संदेश “हम बदलेंगे, युग बदलेगा” राखी के अवसर पर भी अत्यंत प्रासंगिक है। यदि व्यक्ति अपने भीतर प्रेम, संवेदना, संयम और जिम्मेदारी के संस्कार विकसित करे तो परिवार और समाज का वातावरण स्वतः बदलने लगता है। राखी का धागा हमें अपने भीतर भी एक शुभ संकल्प बांधने की प्रेरणा देता है, रिश्तों में अहंकार के स्थान पर प्रेम, शिकायत के स्थान पर संवाद और स्वार्थ के स्थान पर सहयोग को स्थान दें।

आज की युवा पीढ़ी के पास अवसर और साधन बहुत हैं, लेकिन जीवन की व्यस्तता में रिश्तों के लिए समय कम होता जा रहा है। मोबाइल और इंटरनेट मीडिया ने दूर बैठे लोगों से जुड़ना आसान कर दिया है, लेकिन कभी-कभी अपने ही परिवार के लोगों से दिल की बात करना कठिन हो जाता है। राखी हमें इसी भावनात्मक दूरी को कम करने का अवसर देती है। युवाओं को समझना होगा कि जीवन की सबसे बड़ी सफलता केवल ऊंचा पद, पैसा या प्रतिष्ठा नहीं है। वास्तविक सफलता तब है, जब हमारी उपलब्धियों के साथ हमारे संबंधों की गर्माहट भी बनी रहे।

भाई अपनी बहन के सपनों को उड़ान दे और बहन भाई के संघर्ष में उसकी शक्ति बने, यही इस संबंध की सुंदरता है। इस राखी पर केवल एक धागा न बांधें, बल्कि एक संकल्प भी बांधें, अपनों को समय देंगे, उनका सम्मान करेंगे, रिश्तों को स्वार्थ से ऊपर रखेंगे और एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ खड़े रहेंगे।

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