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प्राइवेसी के लिए खतरा बने वियरेबल्स और AI पर्सनल असिस्टेंट, हर निजी बात पर रख रहे हैं नजर

Updated: Mon, 17 Aug 2026 09:43 AM (IST)

वियरेबल डिवाइसेज जिस तरह सहायक और सुविधाजनक बन रही हैं, उससे यूजर्स का आकर्षित होना स्वाभाविक है, लेकिन इनके हर समय एक्टिव रहने के कारण हमारी निजता खतरे में भी आ सकती है।

एआई असिस्टेंट की सुविधा बनाम डेटा सुरक्षा के बढ़ते खतरे

एआई असिस्टेंट की सुविधा बनाम डेटा सुरक्षा के बढ़ते खतरे

HighLights

  1. एआई असिस्टेंट सुविधाएँ बढ़ाते हैं, पर निजता का खतरा बढ़ता है।

  2. स्मार्ट वियरेबल्स से अनजाने में रिकॉर्डिंग और निगरानी की आशंका।

  3. डेटा लीक, थर्ड पार्टी एक्सेस से सुरक्षा चिंताएँ गंभीर हो रही हैं।

ब्रह्मानंद मिश्रा, नई दिल्ली। अगर स्मार्टफोन अनलाक किए बगैर ही सभी एप्स के लाइव नोटिफिकेशन, ट्रैफिक, न्यूज, यहां तक कि पूरे दिन के प्लान की एक पर्सनाइलाइज्ड ब्रीफिंग या सुझाव आपको मिल जाए तो निश्चित ही इससे सहजता बढ़ेगी और आपके काम करने का तरीका बदल जाएगा। आज रिमाइंडर सेट करने या मौसम का हाल जानने तक बात सीमित नहीं है, बल्कि एआई असिस्टेंट से आप प्लान शेड्यूल करने, ईमेल, मीटिंग मैनेज करने, स्वास्थ्य की निरंतर निगरानी जैसे काम सहजता से कर सकते हैं। पारंपरिक ऑटोमेशन टूल के इतर एआइ पर्सनल असिस्टेंट यूजर के बर्ताव को समझ और सीखकर अपनी प्रतिक्रिया को लगातार बेहतर और वैयक्तिक बनाते हैं यानी एआई आज लक्जरी नहीं, बल्कि सामान्य सहजता का आधुनिक रूप बन गया है। चूंकि, एआई पावर्ड असिस्टेंट इंटेलिजेंट सॉफ्टवेयर एजेंट होते हैं, जो वॉयस कमांड, नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग और मशीन लर्निंग एल्गोरिदम के जरिये अपने टास्क और सर्विस को पूरा करते हैं। ऐसे में मशीनी दिमाग

आपकी निजता के प्रति कितना संवेदनशील होगा, यह सवाल जटिल होता जा रहा है। मेटा रे-बैन स्मार्ट ग्लासेज, बी एआइ पेंडेंट, प्लाउड नोटपिन जैसे एआई वियरेबल्स निर्देशों को सुनते, सीखते और सहायता करते हैं, उनकी चौकसी किस हद तक है, यह भी हमें समझने की जरूरत है।

सुविधाओं के बीच बढ़ता सतर्कता का महत्व

कुछ समय पहले अयोध्या में एक व्यक्ति को राम मंदिर परिसर में चश्मा पहनकर फोटो लेते हुए पकड़ा गया था। सार्वजनिक सुरक्षा में सेंध का यह गंभीर मामला था। हमें यह समझना होगा कि अगर कोई व्यक्ति एआई स्मार्ट ग्लासेज का प्रयोग कर रहा है तो वह आसानी से फोटो और वीडियो बना सकता है। हालांकि, इसकी जानकारी चश्मे के किनारे पर लगी छोटी एलईडी लाइट से हो सकती है, लेकिन कई बार लो-लाइट की स्थिति में इसे लेकर भ्रम भी हो सकता है।

ऐसे में वियरेबल एआई डिवाइसेज का प्रयोग करते समय छोटी सतर्कता हमें बड़े खतरे से बचा सकती है। इसी तरह डिवाइसेज में फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी से सर्विलांस और अवैधानिक डेटा कलेक्शन की चिंताएं गंभीर हो रही हैं। व्यापक सामाजिक नजरिए से देखें तो हर समय जब रिकार्ड किए जाने का भय रहेगा तो लोग खुलकर बातचीत करने से भी कतराने लगेंगे और अभिव्यक्ति की आजादी का दायरा संकीर्ण होता जाएगा।

किस तरह के हैं खतरे

  • हर समय सर्विलांस : अनजाने में निजी बातचीत रिकार्ड होने पर दुरुपयोग की आशंका रहती है।
  • डाटा सेंध : कंपनियां एआई मॉडल की ट्रेनिंग के लिए यूजर का डेटा का प्रयोग कर सकती हैं।
  • थर्ड पार्टी एक्सेस : आपके वॉयस डेटा का एक्सेस थर्ड पार्टी डेवलपर्स को मिलने पर दुरुपयोग संभव है।

हमेशा सुनने वाले गैजेट्स: मांग और लोकप्रियता

आसपास की ध्वनि पर एक्टिव होने वाली ये डिवाइसेज बातचीत को ट्रांसक्राइब करने, समरी तैयार करने और रिमाइंडर भेजने जैसी सुविधाओं के चलते लोकप्रिय हो रही हैं। ये वायस रिकग्निशन टेक्नोलॉजी पर आधारित होती हैं। इस तरह की डिवाइस 'ओके गूगल' या 'अलेक्सा' जैसे शब्दों को पकड़ने के लिए एंबियंट साउंड को प्रोसेस करती हैं। भले ही ट्रिगर साउंड पर ये एक्टिव होते हों, लेकिन डेटा लीक और सुरक्षा सेंध की अनेक घटनाएं बताती हैं कि अनजाने में होने वाली रिकॉर्डिंग एक वास्तविक खतरा बन रही है। अमेरिका के कैलीफोर्निया कोर्ट में 2021 में एक ऐसा ही मामला आया, जिसमें वादी ने कहा कि यूजर की जानकारी या सहमति के बगैर ही एपल डिवाइस पर सीरी एक्टिवेट हो गया और उनके गोपनीय संवाद को रिकॉर्ड कर
लिया। इससे पहले 2019 में हुए एक अध्ययन में 41 प्रतिशत यूजर्स ने माना कि उनकी सहमति के बिना ही रिकॉर्ड किए जाने की आशंका बनी रहती है। तकनीक की यह प्रगति रिएक्टिव से प्रो-एक्टिव बनने की ओर है। दूसरे अर्थों में कहें तो यूजर के कमांड पर ही निर्भर रहने के बजाय एआई डिवाइसेज आपकी जरूरत के हिसाब से सहायता के लिए स्वत ही तैयार रहती हैं। इससे सहायता और सेंध के बीच की लकीर तेजी से बारीक होती जा रही है।