AI में फोटो डालने से पहले रहें सावधान! कहीं चेहरा और निजी डेटा न हो जाए चोरी
इंटरनेट मीडिया पर बहुप्रचलित 1980 का रेट्रो फोटो फिल्टर जितना मजेदार है, उतना ही जोखिम भरा भी। इसके पहले भी ...और पढ़ें

AI में फोटो डालने से पहले रहें सावधान! कहीं चेहरा और निजी डेटा न हो जाए चोरी
HighLights
बायोमेट्रिक डेटा चोरी का गंभीर खतरा।
फर्जी एप्स से निजी जानकारी का दुरुपयोग।
तस्वीरों से मेटाडेटा हटाकर सुरक्षित रहें।
टेक्नोलॉजी डेस्क, नई दिल्ली। इन दिनों इंटरनेट मीडिया पर अपनी तस्वीरों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से 20वीं शताब्दी के आठवें दशक के इयरबुक पोर्ट्रेट में बदलने का प्रचलन तेजी से बढ़ रहा है। लोग बिना सोचे-समझे अपनी तस्वीरें इन एप्स पर अपलोड कर रहे हैं। पहली नजर में यह एक सामान्य और हानिरहित मनोरंजन लगता है। लेकिन साइबर सुरक्षा के लिहाज से देखें तो तस्वीर के इस आकर्षण के पीछे एक बड़ा डिजिटल जाल छिपा है, जिसके खतरों को समझना हर यूजर के लिए अनिवार्य है।
बायोमेट्रिक डेटा की चोरी
पुराने समय के फोटो फिल्टर्स केवल आपकी तस्वीर के ऊपर रंगों की एक परत जोड़ते थे, जिससे आपकी मूल पहचान सुरक्षित रहती थी। इसके विपरीत, आज के आधुनिक जेनरेटिव एआइ माडल आपके चेहरे की ज्यामिति, आंखों की पुतलियों के रंग और चेहरे के हर सूक्ष्म हिस्से को गहराई से स्कैन करते हैं।
जब आप कोई फोटो अपलोड करते हैं, तो आप अनजाने में इन टेक कंपनियों को अपना बायोमेट्रिक डेटा मुफ्त में सौंप देते हैं। याद रखें, एक डिजिटल पासवर्ड लीक होने पर तुरंत बदला जा सकता है, लेकिन आपका चेहरा और बायोमेट्रिक्स कभी नहीं बदले जा सकते। भविष्य में इस डाटा का दुरुपयोग आपकी पहचान चुराकर वित्तीय धोखाधड़ी करने या आपके नाम से डीपफेक वीडियो बनाने के लिए किया जा सकता है।
छिपी जासूसी और जाली एप्स
खतरा केवल मुख्य एआइ एप्स तक सीमित नहीं है। जब कोई फिल्टर वायरल होता है, तो प्ले स्टोर पर सैकड़ों फर्जी और संदिग्ध एप्स भी आ जाते हैं। ये एप्स फोटो बदलने के बहाने आपके फोन की गैलरी, कांटैक्ट लिस्ट, माइक्रोफोन और लाइव लोकेशन का एक्सेस मांगते हैं। इन्हीं में से कुछ एप्स में ऐसे कोड होते हैं जो आपके कीबोर्ड पर आपकी उंगलियों की गतिविधियों को रिकार्ड करते हैं, जिससे आपके नेट बैंकिंग का पासवर्ड भी चोरी हो सकता है।
यह अकल्पनीय भले ही लगता है मगर आपकी व्यक्तिगत तस्वीरों में छिपा मेटाडेटा आपके घर की सटीक जीपीएस लोकेशन तक साइबर अपराधियों को पहुंचा सकता है। याद रखें, ये तमाम एआइ फिल्टर्स और अजीबो-गरीब ट्रेंड्स कुछ ही दिनों या हफ्तों में आपकी फीड से पूरी तरह गायब हो जाएंगे। लोग नए ट्रेंड्स की तरफ बढ़ जाएंगे और पुरानी तस्वीरें इतिहास का हिस्सा बन जाएंगी।
लेकिन जो बायोमेट्रिक डेटा एक बार कंपनियों के सर्वर और साइबर अपराधियों के शिकंजे में जा चुका है, वह कभी डिलीट नहीं होने वाला। इसलिए जागरूक रहिए, क्योंकि इंटरनेट पर मुफ्त दिखने वाली हर चीज की कीमत अंततः हमें ही चुकानी पड़ती है!
मुफ्त सेवा का गुप्त मुनाफा
इंटरनेट पर जो सेवा आपको मुफ्त दिखाई देती है, वही कंपनियों का सबसे बड़ा बिजनेस माडल है। आपके द्वारा अपलोड तस्वीरों का उपयोग कंपनियां अपने एआइ माडल को प्रशिक्षित करने या डेटा ब्रोकर्स को बेचने के लिए करती हैं।
कई एप्स शुरुआत में केवल दो, तीन या पांच तस्वीरें मुफ्त बनाकर देते हैं और बाद में बेहतर नतीजों के लिए आपसे सब्सक्रिप्शन फीस वसूलते हैं। इसके अलावा आपकी उम्र, लिंग और लोकेशन का डेटा विज्ञापन एजेंसियों को बेचा जाता है ताकि आपको लक्षित विज्ञापन दिखाए जा सकें।
सुरक्षा की लक्ष्मण रेखा
आप तकनीक का आनंद भी लेना चाहते हैं और सुरक्षित भी रहना चाहते हैं, तो इन नियमों का पालन करें:
- डेटा ट्रेनिंग तुरंत बंद करें: यदि आप चैटजीपीटी या किसी अन्य एआइ टूल का उपयोग करते हैं, तो उसकी सेटिंग्स में जाकर माडल ट्रेनिंग परमिशन को आफ कर दें। इससे कंपनी आपकी तस्वीरों का उपयोग अपने सिस्टम को सिखाने के लिए नहीं कर पाएगी।
- टेक्स्ट प्रांप्ट का प्रयोग करें: अपनी असली फोटो अपलोड करने के बजाय, एआइ को केवल शाब्दिक रूप से लिखकर निर्देश दें। एआई आपके लिए एक काल्पनिक चेहरा बना देगा, जिससे आपका असली चेहरा सुरक्षित रहेगा।
- मेटाडाटा डिलीट करें: यदि फोटो अपलोड करना ही है, तो फोन की गैलरी सेटिंग या किसी अन्य टूल की मदद से फोटो के भीतर छिपी लोकेशन और डिवाइस की जानकारी मतलब मेटाडेटा को हटा दें।
- अनावश्यक अनुमति ब्लाक करें: अपने फोन में अनधिकृत एप्स के कैमरा, स्टोरेज और लोकेशन एक्सेस को तुरंत बंद करें।
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