भारतीय निशानेबाजों के लिए खुशखबरी: अब विदेश नहीं, देश में ही होगी गन और कारतूस की सटीकता की जांच, लाखों रुपये बचेंगे
अब भारतीय निशानेबाजों को अपनी गन और कारतूस की सटीकता जांचने के लिए विदेश नहीं जाना पड़ेगा। नेशनल राइफल एसोसिएशन ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर।
HighLights
निशानेबाजों को अब गन-कारतूस परीक्षण के लिए विदेश नहीं जाना पड़ेगा।
एनआरएआई दिल्ली के डॉ. करणी सिंह शूटिंग रेंज में सुविधा शुरू करेगा।
इससे लाखों रुपये बचेंगे और भारतीय निशानेबाजों का प्रदर्शन सुधरेगा।
गौरव दुबे, अलीगढ़। अब देशभर के राज्य व राष्ट्रीयस्तर के निशानेबाजों को अपनी-अपनी गन (पिस्टल-राइफल) और कारतूस की सटीकता जांचने के लिए विदेश जाने की जरूरत नहीं होगी। नेशनल राइफल एसोसिएशन आफ इंडिया (एनआरएआइ) ने देश में ही कारतूस परीक्षण की सुविधा शुरू करने की पहल की है।
इसके लिए दिल्ली के तुगलकाबाद स्थित डॉ. करणी सिंह शूटिंग रेंज में जगह भी तय कर ली गई है। अभी अंतरराष्ट्रीय स्तर के निशानेबाज ही वर्ष में एक बार विदेश जाकर अपनी गन और कारतूस का परीक्षण करा पाते हैं। जबकि विशेषज्ञों के अनुसार, यह परीक्षण हर छह महीने में किया जाना चाहिए।
विदेश में एक बार परीक्षण कराने पर करीब तीन लाख रुपये तक खर्च हो जाते हैं। नई व्यवस्था शुरू होने से राष्ट्रीय स्तर तक के खिलाड़ियों के लिए बेहतर प्रशिक्षण व प्रदर्शन की राह खुलेगी।
देश में ही परखी जाएगी निशानेबाजों की गन और कारतूस की सटीकता
अभी तक परीक्षण के लिए शूटर्स आस्ट्रिया, जर्मनी, बेल्जियम, फ्रांस, स्पेन, इंग्लैंड, हंगरी, फिनलैंड, चक गणराज्य आदि यूरोपीय देशों में जाते हैं। भारत में अधिकतम कारतूस एली कंपनी आपूर्ति करती है। इसके कारतूसों की जांच बर्मिंघम प्रूफ हाउस (यूके) में होते हैं। यह जांच अब देश में ही हो जाएगी। निशानेबाजों के प्रदर्शन में सुधार लाने व ओलिंपिक में पदक जीतने की संभावनाओं को बढ़ाने के उद्देश्य से यह व्यवस्था बनाई जा रही है।
राष्ट्रीय स्तर तक के शूटर दिल्ली में करा सकेंगे परीक्षण, विदेश जाने की जरूरत नहीं
27 अगस्त 2026 को एनआरएआई के पदाधिकारियों ने कारतूस की आपूर्तिकर्ता एली कंपनी के प्रतिनिधियों के साथ दिल्ली की शूटिंग रेंज का निरीक्षण कर जगह सुनिश्चित कर ली। यहां कंक्रीट का खंभा व सॉफ्टवेयर इंस्टाल करने का सेटअप लगाकर नवंबर तक चालू करने का लक्ष्य है। पहले खेलो इंडिया और राष्ट्रीयस्तर के निशानेबाजों को यह सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इसके बाद राज्यस्तर के खिलाड़ियों को भी इसका लाभ देने की योजना है।
जरा-सा कंपन बिगाड़ सकता है निशाना
अंतरराष्ट्रीय शूटिंग ज्यूरी और कोच वेदप्रकाश शर्मा ने बताया कि निशानेबाजी में गन और कारतूस की सटीकता बेहद महत्वपूर्ण होती है। गन से निकलने के बाद लक्ष्य तक पहुंचने के दौरान कारतूस में होने वाला बेहद मामूली कंपन या विचलन भी स्कोर पर असर डाल सकता है। खिलाड़ी वर्षों की मेहनत के बाद जिस स्तर पर पहुंचता है, वहां ऐसी छोटी-सी तकनीकी कमी भी पदक की संभावनाओं को प्रभावित कर सकती है। इसलिए जिस कंपनी के कारतूस का इस्तेमाल खिलाड़ी कर रहा है, उसके अलग-अलग बैच का गन के साथ परीक्षण किया जाता है। इससे यह पता चलता है कि संबंधित गन के लिए कौन-सा बैच सबसे बेहतर और सटीक है।
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ऐसे काम करता है सिस्टम
नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के महासचिव पवन कुमार सिंह ने बताया कि परीक्षण के लिए कंक्रीट का मजबूत खंभा बनाया जाता है। इसमें वाइस (क्लैंप) लगाया जाता है, जिसमें गन को मजबूती से फिक्स कर दिया जाता है। इससे फायरिंग के दौरान गन का मूवमेंट शून्य हो जाता है। कारतूस के अलग-अलग बैच का परीक्षण किया जाता है।
उदाहरण के लिए, किसी गन में बैच-1 बेहतर परिणाम दे सकता है तो बैच-2 किसी दूसरी गन में सटीक हो सकता है। तीन अलग-अलग बैच के कारतूस से फायरिंग कराई जाती है। यदि कारतूस में कंपन या कोई अन्य तकनीकी विचलन होता है तो साफ्टवेयर उसकी पहचान कर लेता है। इसके आधार पर कंपनी गन के अनुरूप कारतूस में जरूरी सुधार कर उसे खिलाड़ी के लिए उपलब्ध कराती है।
अपने देश में स्टेट व नेशनल शूटर्स के लिए कारतूस के परीक्षण की व्यवस्था से इस खेल में प्रदर्शन की तस्वीर ही बदल जाएगी। बड़ी स्पर्धाओं में पदक निश्चित ही भारत की झोली में आएंगे।
सानवी उपाध्याय, नेशनल शूटर, वाराणसी
