बरेली में अंतिम संस्कार के बाद जिंदा घर लौटे 72 साल के मंशालाल, शिनाख्त की गलती से दूसरे बुजुर्ग का हुआ था दाह संस्कार
बरेली में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई, जहां परिवार ने एक बुजुर्ग का अंतिम संस्कार मंशालाल समझकर कर दिया, ...और पढ़ें
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यह तस्वीर एआई के द्वारा बनाई गई है।
HighLights
मंशालाल को मृत मानकर परिवार ने अंतिम संस्कार कर दिया।
अगले ही दिन मंशालाल जिंदा अपने घर वापस लौटे।
मृतक चंद्रिका सिंह थे, जिनकी पहचान में गलती हुई।
जागरण संवाददाता, बरेली। मंशालाल अपने दोस्त के घर रुके थे, मगर एक गलतफहमी ने परिवार को शोकाकुल कर दिया। रेल पटरी पर क्षतविक्षत शव देखकर स्वजन ने मंशालाल के रूप में पहचान कर अंतिम संस्कार कर दिया। इसके अगले ही दिन शनिवार को चौंकाने वाला घटनाक्रम हुआ। मंशालाल अचानक दरवाजे पर पहुंच गए। उन्हें देखकर परिवार की खुशियां लौट आईं, परंतु सवाल उठा कि जिनका अंतिम संस्कार हुआ, वह कौन थे? चंद घंटे बाद ही इसका जवाब मिल गया कि वह चंद्रिका सिंह थे। दोनों की उम्र समान होने के कारण ऐसी गलतफहमी हुई।
न्यू माडर्न रेलवे कालोनी निवासी मंशालाल ने वर्ष 2012 में रेलवे के ट्रैकमैन पद से स्वैच्छिक सेवानिवृति ली थी। वह शुक्रवार को पीलीभीत निवासी दोस्त से मिलने की बात कहकर घर से निकले थे। कुछ देर बाद उनके बेटे को सूचना मिली कि शहीद गेट रेलवे क्रासिंग के पास किसी बुजुर्ग की ट्रेन से कटकर मौत हो गई है। केशव, उनकी मां सोनावती, स्वजन हरी बाबू, शशिकांत, संतोष कुमार मौके पर पहुंचे। उन्होंने हुलिया के आधार पर मंशालाल के रूप में शव की पहचान की।
शाम को पोस्टमार्टम के बाद अंतिम संस्कार भी कर दिया। शनिवार दोपहर को रिश्तेदार, पड़ोसी शोक संवेदनाएं व्यक्त करने के लिए उनके घर में थे। अचानक दरवाजे पर मंशालाल ने आवाज लगाई तो स्वजन हैरान रह गए। उन्हें बैरियर-एक पुलिस चौकी ले जाकर प्रकरण बताया कि भूलवश किसी अन्य का अंतिम संस्कार कर दिया। पुलिस के अनुसार, कुछ देर बाद डिफेंस कालोनी निवासी आलोक यादव चौकी पर आए। उन्होंने बताया कि शुक्रवार सुबह को पिता चंद्रिका सिंह टहलने निकले, मगर लौटकर नहीं आए।
वह सेवानिवृत लोको पायलट थे। उनका फोटो, हुलिया व कपड़ों की जानकारी भी दी। इस पर पुलिसकर्मियों का माथा ठनका। इंस्पेक्टर सुरेश चंद्र गौतम ने बताया कि आंरभिक जांच में पता चला कि हादसे में चंद्रिका सिंह की मौत हुई थी। मंशालाल की उम्र भी उनके समान 72 वर्ष थी। हुलिया भी मिलता-जुलता था। इसी कारण केशव ने भूलवश शव की शिनाख्त अपने पिता मंशालाल के तौर पर कर ली। आलोक को बता दिया गया कि उनके पिता चंद्रिका सिंह का अंतिम संस्कार मंशालाल के रूप में कर दिया। मंशालाल व चंद्रिका सिंह के स्वजन एक-दूसरे को जानते हैं, क्योंकि दोनों के घर आसपास की कालोनी में हैं।
