चित्रकूट ग्राउंड रिपोर्ट: कभी बाढ़ तो कभी सूखा, मंदाकिनी किनारे बसे 60 गांवों का दर्द '365 दिन संकट'
चित्रकूट में मंदाकिनी नदी के कारण 60 गांव साल भर बाढ़ और सूखे की दोहरी मार झेल रहे हैं, जिससे ...और पढ़ें

बाढ़ से प्रभावित महुआ गोशाला में भरा पानी। ग्राम पंचायत
HighLights
मंदाकिनी नदी से चित्रकूट के 60 गांव बाढ़-सूखे की चपेट में।
बरवारा डायवर्जन नहर फटने से फसलें जलमग्न, भारी नुकसान।
बड़े बांध का निर्माण बाढ़ और सूखे का स्थायी समाधान।
शिवा अवस्थी, चित्रकूट। अरे भइया, हम तो रजौला से कर्वी तक किए गए अवैध कब्जों के कारण मंदाकिनी नदी के कोप का भाजन साल के 365 दिन बनते हैं। अभी बाढ़ है तो देखिए बरवारा डायवर्जन नहर दो जगह फटने से फसलें जलमग्न हैं। गर्मी में सूखा झेलते हैं। पानी बढ़ा और नहरें ओवरफ्लो हुईं तो फिर नुकसान तय है। मंदाकिनी दोहरी मुसीबत बन गई है। बाढ़ में डुबोती है तो गर्मी में रुलाती है। ये दर्द बंधोइन बंधे के पास बाढ़ की विभीषिका देखने पहुंचे ग्रामीण राजेश कुमार का है।
यही व्यथा-कथा बंधोइन व आसपास के गांवों के हर ग्रामीण की भी है। कारण, बंधोइन बंधा ही है, जो चित्रकूट की चार पुरानी जल परियोजनाओं के साथ मंदाकिनी के जल को गर्मी में भी बचाए रखता है व 25 हजार एकड़ कृषि भूमि की सिंचित करने में मदद करता है। बाढ़ व सूखे से बचने को बंधोइन से कनकोटा गांव में मंदाकिनी के यमुना में मिलने तक आवश्यकता एक बड़े बांध की है, जो इस क्षेत्र के 60 गांवों को नया जीवन दे सकता है, जिनमें बाढ़ के पानी से अभी त्राहिमाम है। बांध बनने से बाढ़ का संकट खत्म होगा तो गर्मी में सूखा खत्म होगा व सिंचाई के लिए आत्मनिर्भरता आएगी।
दैनिक जागरण के मंदाकिनी में बाढ़ व उसके कारणों को तलाशते चार दिवसीय समाचारीय शृंखला की तीसरी कड़ी में बंधोइन से यमुना के संगम तक 38 किलोमीटर क्षेत्र में की पड़ताल की गई। बंधोइन बंधा युवाओं का बड़ा सेल्फी प्वाइंट भी है। इसलिए यहां दिन भर 50 से युवक रहते ही हैं। इस बंधे के कारण ऊपर पानी रुकने से कर्वी में इंटकवेल, मानिकपुर क्षेत्र में सुदूर फैली विंध्य पर्वतमाला में कभी डकैतों के शरणगाह रहे पाठा के पौने दो लाख कोल आदिवासियों को पानी उपलब्ध कराने वाली झांसी-मीरजापुर हाईवे पर कर्वी पुल घाट के पास वर्ष 1932 में अस्तित्व में आई पाठा जलकल योजना संचालित है।
बनकट पंप कैनाल से निकली नहरों व बरवारा डायवर्जन नहर से गांवों की 25 हजार एकड़ जमीन सिंचित होती है। हालांकि, बंधा 60 गांवों को बाढ़ की विभीषिका देता है तो गर्मी में इन्हीं गांवों के लिए सूखे के हालात पैदा करता है, क्योंकि तब इतना पानी भी इसके ऊपर से आगे नहीं बढ़ पाता है कि जल धारा भी दिखाई पड़ सके। बुंदेली सेना के जिलाध्यक्ष अजीत सिंह कहते हैं कि ये बंधा हटाने की मांग यदाकदा उठती है पर इसे हटाना श्रेयष्कर नहीं होगा, क्योंकि तब फिर इसके माध्यम से चल रही चारों जल परियोजनाएं दम तोड़ देंगी।
गर्मी में नदी का जल आचमन योग्य भी नहीं रहेगा। वर्तमान में बाढ़ का असर इन क्षेत्रों में है। किसान त्राहिमाम कर रहे हैं। बंधोइन माता का मंदिर भी भीषण बाढ़ में इस बार डूब गया था। मान्यता है कि मंदाकिनी की बाढ़ से बंधोइन माता ही रक्षा करती हैं। इससे साफ है कि मंदाकिनी के इस क्षेत्र में तटबंध और मजबूत करने की आवश्यकता है। बड़ा बांध अच्छा विकल्प है।
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चित्रकूट के 84 कोस में ऐसे रुक सकती जलप्रलय
चित्रकूट के 84 कोस को जलप्रलय से बचाने के लिए डोडामाफी बांध, रसिन, बरुआ, ओहन व गुंता बांधों के साथ बरदहा, शरभंग, वाल्मीकि, झूरी नदियों व पहाड़ी नालों का पानी कुछ और बांध बनाकर संरक्षित करना चाहिए। इससे वर्ष भर मंदाकिनी को जल मिलेगा तो बाढ़ सूखा खत्म होगा।
बरदहा-शरभंग नदियों पर स्थित शबरी (राघव) जल प्रपात वर्ष भर पानी मिलने से आकर्षण बिखेरता रहेगा। मुंबई-हावड़ा रेलमार्ग पर जलभराव रोकने में मदद मिलेगी तो मानिकपुर वाया चित्रकूटधाम कर्वी-बांदा झांसी रेलमार्ग पर मंदाकिनी पुल पर बाढ़ में ट्रेनों की गति धीमी नहीं करनी पड़ेगी।
